छत्तीसगढ़ में अब गाय-भैंस पालने वालों के दिन फिरने वाले हैं। क्योंकि राज्य सरकार ने अब किसानों से डेढ़ रुपये प्रति किलो के हिसाब से गोबर खरीदने का फैसला किया है। गोबर खरीदने के लिए हाल ही में राज्य सरकार ने मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया था, जिसने गोबर खरीदी की दर पर अंतिम मुहर लगा दी है। राज्य के कृषि मंत्री और समिति के अध्यक्ष रवींद्र चौबे ने शनिवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा, "हमने डेढ़ रुपये प्रति किलो के हिसाब से गोबर खरीदने की अनुशंसा की है। इसे मंत्रिमंडल में पेश किया जाएगा। हमने गोबर खरीदने की पूरी तैयारी कर ली है और गांवों में 21 जुलाई, हरेली त्योहार के दिन से गोबर खरीदी की शुरुआत की जाएगी।"
अब गोबर खरीदेगी इस राज्य की सरकार, एक किलो की कीमत 1.5 रुपये
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राज्य सरकार ने 'गोधन न्याय योजना' के नाम से गोबर खरीदने का फैसला पिछले महीने लिया था। लेकिन गोबर खरीदी की दर क्या हो, इसे लेकर संशय था। इसके अलावा गोबर प्रबंधन को लेकर भी कई सवाल थे। इसके बाद गोबर खरीदने के लिये मंत्रिमंडलीय उपसमिति बनाई गई थी। इस योजना के बारे में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना था कि पशु रखने के काम को व्यावसायिक रूप से फायदेमंद बनाने, सड़कों पर आवारा पशु की समस्या से निपटने और पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से योजना महत्वपूर्ण है।
हालांकि सरकार ने अब तक ये स्पष्ट नहीं किया है कि वो एक दिन में कुल कितना गोबर खरीदेगी और इस पूरी योजना में कुल कितना खर्च होगा और ये खर्च आएगा कहां से। गोबर की खरीदी को लेकर राज्य के मुख्य सचिव आरपी मंडल की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गई है। ये समिति गोबर खरीदी के वित्तीय प्रबंधन पर रिपोर्ट तैयार कर रही है।
कैसे होगी गोबर की खरीद?
राज्य सरकार का दावा है कि गोबर खरीदी की पूरी की पूरी कार्य योजना बेहद महत्वाकांक्षी और ग्रामीण अर्थव्यव्था को मजबूती प्रदान करने वाली साबित होगी। कृषि मंत्री रवींद्र चौबे का कहना है कि गांवों में बनाई गई गौठान समिति अथवा महिला स्व-सहायता समूह द्वारा घर-घर जाकर गोबर एकत्र किया जाएगा। इसके लिए ग्रामीणों का विशेष खरीदी कार्ड बनाया जाएगा, जिसमें हर दिन के गोबर की मात्रा और भुगतान का विवरण दर्ज होगा। मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने किसानों और पशुपालकों से खरीदे गए गोबर के एवज में हर पखवाड़े यानी हर पंद्रह दिन में एक बार भुगतान किए जाने की बात कही है। नगरीय इलाकों में गोबर की खरीदी का काम नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा तथा जंगल के इलाके में वन प्रबंधन समितियों द्वारा किया जाएगा।
रविंद्र चौबे ने कहा कि वर्मी कम्पोस्ट की आवश्यकता किसानों के साथ-साथ हार्टिकल्चर में, वन विभाग एवं नगरीय प्रशासन विभाग को भी होती है। ऐसे में गोबर से तैयार वर्मी कम्पोस्ट की खपत और उसकी मार्केटिंग की चिंता सरकार को नहीं है। रवींद्र चौबे का कहना है कि गौठानों में पहले से ही गोबर से कंपोस्ट बनाया जा रहा है। यहां बनने वाले वर्मी कम्पोस्ट को प्राथमिकता के आधार पर उसी गांव के कृषकों को निर्धारित मूल्य पर दिया जाएगा।