Chandrayaan-3: भारत ने चंद्रयान-3 को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतारकर इतिहास रच दिया है। भारत का चंद्रयान-3 मिशन सफल रहा है। चांद पर पहुंचने वाला भारत चौथा और दक्षिणी ध्रुव पर जाने वाला पहला देश बन गया है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने चंद्रयान मिशन के जरिए विक्रम लैंडर चांद की सतह पर उतारा था। विक्रम लैंडर के साथ ही प्रज्ञान रोवर भी चांद पर पहुंच था जिसने चांद की सतह पर चहलकदमी की।
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चांद की सतह पर राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह और इसरो के निशान नहीं बनने से दक्षिणी ध्रुव के मिट्टी को लेकर एकदम नई समझ पैदा होती है। चंद्रमा की सतह पर मिट्टी नहीं है। वह एक अलग चीज बनी है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि वह किस चीज से बनी है।
दरअसल, चांद की मिट्टी बहुत अधिक धूल भरी नहीं है, लेकिन वह ढेलेदार है। इससे पता चलता है कि वहां पर कुछ ऐसे तत्व हैं, जिससे मिट्टी बंध जाती है और वह उनका ढेला बन जाता है। शिव शक्ति प्वाइंट के आसपास प्रज्ञान रोवर 105 मीटर चल चुका है। बीते करीब 18 दिनों से रोवर सो रहा है जिसे इसरो जगाने की कोशिश कर रहा है।
रोवर में लगे हैं ये जांच करने वाले यंत्र
प्रज्ञान रोवर में दो पेलोड्स लगाए हैं। एक है लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप, जो एलिमेंट कंपोजिशन की स्टडी करने के लिए हैं। उदाहरण के तौर पर मैग्नीशियम, अल्यूमिनियम, सिलिकन, पोटैशियम, कैल्सियम, टिन और लोहा। अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर दूसरा प्लेड है, जो चांद की सतह पर मौजूद केमकल्स यानी रसायनों की मात्रा और गुणवत्ता की स्टडी करने के लिए लगा है। इसके अलावा खनिजों की खोज के लिए है।
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एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इसरो के प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा है कि अस्पष्ट प्रतीक और लोगो के निशान ने एक नई समझ पैदा की है। हम पहले पता था कि यह मिट्टी एकदम अलग है। लेकिन हमें अब यह जानना होगा कि इसे क्या अलग बना रहा है।
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