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Chandrayaan-3: चांद की सतह पर अशोक स्तम्भ का निशान नहीं छोड़ पाया प्रज्ञान रोवर, जानिए आखिर क्या वजह

Sun, 24 Sep 2023 05:38 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Sun, 24 Sep 2023 05:38 PM IST
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chandrayaan 3 pragyan rover unable to leave clear imprint of national emblem and isro logo
chandrayaan 3 pragyan rover unable to leave clear imprint of national emblem and isro logo - फोटो : Isro

Chandrayaan-3: भारत ने चंद्रयान-3 को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतारकर इतिहास रच दिया है। भारत का चंद्रयान-3 मिशन सफल रहा है। चांद पर पहुंचने वाला भारत चौथा और दक्षिणी ध्रुव पर जाने वाला पहला देश बन गया है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने चंद्रयान मिशन के जरिए विक्रम लैंडर चांद की सतह पर उतारा था। विक्रम लैंडर के साथ ही प्रज्ञान रोवर भी चांद पर पहुंच था जिसने चांद की सतह पर चहलकदमी की। 



प्रज्ञान रोवर की खास बात यह थी कि इसके पहियों पर भारतीय प्रतीक चिन्ह और इसरो का लोगो लगा था। यह इसलिए लगाया गया था कि जब यह चांद की सतह पर चलेगा, तो भारत के राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह अशोक स्तम्भ और इसरो के लोगो के निशान को छोड़ेगा, लेकिन प्रज्ञान रोवर इसमें कामयाब नहीं हुआ है। चांद की सतह पर बने निशान उतने स्पष्ट नहीं बने जितनी उम्मीद थी। लेकिन यह चिंता करने वाली बात नहीं है, बल्कि अच्छी खबर है। 
 

chandrayaan 3 pragyan rover unable to leave clear imprint of national emblem and isro logo
chandrayaan 3 pragyan rover unable to leave clear imprint of national emblem and isro logo - फोटो : Isro

चांद की सतह पर राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह और इसरो के निशान नहीं बनने से दक्षिणी ध्रुव के मिट्टी को लेकर एकदम नई समझ पैदा होती है। चंद्रमा की सतह पर मिट्टी नहीं है। वह एक अलग चीज बनी है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि वह किस चीज से बनी है। 

 

chandrayaan 3 pragyan rover unable to leave clear imprint of national emblem and isro logo
chandrayaan 3 pragyan rover unable to leave clear imprint of national emblem and isro logo - फोटो : Twitter@SPACEdotcom

दरअसल, चांद की मिट्टी बहुत अधिक धूल भरी नहीं है, लेकिन वह ढेलेदार है। इससे पता चलता है कि वहां पर कुछ ऐसे तत्व हैं, जिससे मिट्टी बंध जाती है और वह उनका ढेला बन जाता है। शिव शक्ति प्वाइंट के आसपास प्रज्ञान रोवर 105 मीटर चल चुका है। बीते करीब 18 दिनों से रोवर सो रहा है जिसे इसरो जगाने की कोशिश कर रहा है। 
 

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chandrayaan 3 pragyan rover unable to leave clear imprint of national emblem and isro logo - फोटो : iStock

रोवर में लगे हैं ये जांच करने वाले यंत्र

प्रज्ञान रोवर में दो पेलोड्स लगाए हैं। एक है लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप, जो एलिमेंट कंपोजिशन की स्टडी करने के लिए हैं। उदाहरण के तौर पर मैग्नीशियम, अल्यूमिनियम, सिलिकन, पोटैशियम, कैल्सियम, टिन और लोहा। अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर दूसरा प्लेड है, जो चांद की सतह पर मौजूद केमकल्स यानी रसायनों की मात्रा और गुणवत्ता की स्टडी करने के लिए लगा है। इसके अलावा खनिजों की खोज के लिए है। 

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chandrayaan 3 pragyan rover unable to leave clear imprint of national emblem and isro logo - फोटो : iStock

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इसरो के प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा है कि अस्पष्ट प्रतीक और लोगो के निशान ने एक नई समझ पैदा की है। हम पहले पता था कि यह मिट्टी एकदम अलग है। लेकिन हमें अब यह जानना होगा कि इसे क्या अलग बना रहा है।

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