Mystery of Antarctica Blood Falls: धरती के कई रहस्यों से वैज्ञानिकों ने पर्दा उठा दिया है, तो अभी कुछ रहस्यों के बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं। अब वैज्ञानिकों ने एक और रहस्य का खुलासा कर दिया है। दरअसल, अंटार्कटिका (Antarctica) में ग्लेशियर से खून का झरना बह रहा है। पूर्वी अंटार्कटिका के विक्टोरिया लैंड (Victoria Land) पर टेलर ग्लेशियर मौजूद है, जहां पर खोजकर्ता और वैज्ञानिक खून का झरना बहता देख हैरान थे।
Blood Falls: ग्लेशियर से क्यों बह रहा खून का झरना? रहस्य से उठ गया पर्दा, वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला खुलासा
जानिए क्या कहते हैं वैज्ञानिक
जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक केन लिवी का कहना है कि वह माइक्रोस्कोप की तस्वीरों को देखकर हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि यह छोटे नैनोस्फेयर थे और उसमें आयरन भरा हुआ था। प्राचीन रोगाणुओं से छोटे कण आते हैं और इंसान की लाल रक्त कोशिकाओं के आकार के सौवें भाग के बराबर होते हैं।
लोहे के साथ-साथ, नैनोस्फेयर में सिलिकॉन, कैल्शियम, एल्युमीनियम और सोडियम भी होता है। नमकीन पानी का हिस्सा यह अनोखी संरचना है और ग्लेशियर से फिसलकर ऑक्सीजन, सूरज की रोशनी और गर्मी से मिलते ही चमकदार, सबग्लेशियल पानी को लाल कर देती है। हालांकि वैज्ञानिक पानी में नैनोस्फेयर का पता नहीं लगा पाए हैं। उनका मानना है कि कुछ खनिज खूनी पानी की वजह हैं, लेकिन नैनोस्फेयर को खनिज नहीं माना जाता है।
ग्लेशियर से बहने वाले खूनी झरने के पानी का स्वाद नमकीन है, जो एक बेहद प्राचीन इकोसिस्टम का हिस्सा है। टेलर ग्लेशियर के नीचे बेहद प्राचीन जगह है। खून के झरने को नजदीक से जाकर देखने वाले वैज्ञानिक बताते हैं कि इसका स्वाद नमकीन है, जिस तरह खून होता है। यह स्थान खतरों से भरा है और यहां जाना जान को जोखिश में डालने जैसा है।
ब्रिटिश खोजकर्ता थॉमस ग्रिफिथ टेलर (Thomas Griffith Taylor) ने सबसे पहले खून के झरने की खोज साल 1911 में की थी। यूरोपियन वैज्ञानिक अंटार्कटिका के इस क्षेत्र में सबसे पहले पहुंचे थे। ब्रिटिश खोजकर्ता थॉमस और उनके साथियों ने इस लाल रंग को एल्गी (Red Algae) समझा था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं था जिसके बाद इस मान्यता को रद्द कर दिया गया।
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