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Blood Falls: ग्लेशियर से क्यों बह रहा खून का झरना? रहस्य से उठ गया पर्दा, वैज्ञानिकों का चौंकाने वाला खुलासा

Thu, 06 Jul 2023 07:31 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Thu, 06 Jul 2023 07:31 PM IST
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Blood Falls Mystery: mystery of antarctica blood falls mystery finally solved
Blood Falls Mystery - फोटो : Twitter@pixikiIler

Mystery of Antarctica Blood Falls: धरती के कई रहस्यों से वैज्ञानिकों ने पर्दा उठा दिया है, तो अभी कुछ रहस्यों के बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं। अब वैज्ञानिकों ने एक और रहस्य का खुलासा कर दिया है। दरअसल, अंटार्कटिका (Antarctica) में ग्लेशियर से खून का झरना बह रहा है। पूर्वी अंटार्कटिका के विक्टोरिया लैंड (Victoria Land) पर टेलर ग्लेशियर मौजूद है, जहां पर खोजकर्ता और वैज्ञानिक खून का झरना बहता देख हैरान थे।



दशकों से बह रहा है खून का झरना

बताया जाता है कि टेलर ग्लेशियर से खून का झरना दशकों से ऐसे ही बह रहा है। इस खून के झरने को देखकर विशेषज्ञ परेशान थे। इसके साथ ही आशंका जताई जा रही थी कि इसके नीचे दूसरी दुनिया के जीव हो सकते हैं। हालांकि अब वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर से खून का झरना बहने की वजह का पता लगा लिया है। आइए जानते हैं कि वैज्ञानिकों का क्या कहना है?
 

Blood Falls Mystery: mystery of antarctica blood falls mystery finally solved
Blood Falls Mystery - फोटो : Twitter @summerstoli

जानिए क्या कहते हैं वैज्ञानिक

जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक केन लिवी का कहना है कि वह माइक्रोस्कोप की तस्वीरों को देखकर हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि यह छोटे नैनोस्फेयर थे और उसमें आयरन भरा हुआ था। प्राचीन रोगाणुओं से छोटे कण आते हैं और इंसान की लाल रक्त कोशिकाओं के आकार के सौवें भाग के बराबर होते हैं। 
 

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Blood Falls Mystery - फोटो : Twitter @pixikiIler

लोहे के साथ-साथ, नैनोस्फेयर में सिलिकॉन, कैल्शियम, एल्युमीनियम और सोडियम भी होता है। नमकीन पानी का हिस्सा यह अनोखी संरचना है और ग्लेशियर से फिसलकर ऑक्सीजन, सूरज की रोशनी और गर्मी से मिलते ही चमकदार, सबग्लेशियल पानी को लाल कर देती है। हालांकि वैज्ञानिक पानी में नैनोस्फेयर का पता नहीं लगा पाए हैं। उनका मानना है कि कुछ खनिज खूनी पानी की वजह हैं, लेकिन नैनोस्फेयर को खनिज नहीं माना जाता है। 



 

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Blood Falls Mystery - फोटो : Twitter @summerstoli

ग्लेशियर से बहने वाले खूनी झरने के पानी का स्वाद नमकीन है, जो एक बेहद प्राचीन इकोसिस्टम का हिस्सा है। टेलर ग्लेशियर के नीचे बेहद प्राचीन जगह है। खून के झरने को नजदीक से जाकर देखने वाले वैज्ञानिक बताते हैं कि इसका स्वाद नमकीन है, जिस तरह खून होता है। यह स्थान खतरों से भरा है और यहां जाना जान को जोखिश में डालने जैसा है। 

 

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Blood Falls Mystery - फोटो : Twitter @DubiousByName

ब्रिटिश खोजकर्ता थॉमस ग्रिफिथ टेलर (Thomas Griffith Taylor) ने सबसे पहले खून के झरने की खोज साल 1911 में की थी। यूरोपियन वैज्ञानिक अंटार्कटिका के इस क्षेत्र में सबसे पहले पहुंचे थे। ब्रिटिश खोजकर्ता थॉमस और उनके साथियों ने इस लाल रंग को एल्गी (Red Algae) समझा था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं था जिसके बाद इस मान्यता को रद्द कर दिया गया। 

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