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मस्जिद जैसा दिखता है ये मंदिर, मुगल शासक ने कटवा दिए थे मूर्तियों के सिर!

Thu, 21 Mar 2019 01:19 PM IST
गौरव शुक्ला फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव शुक्ला Updated Thu, 21 Mar 2019 01:19 PM IST
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Ashtbhuja dham temple where Idols are worshiped without head
- फोटो : You Tube

आमतौर पर लोग टूटी हुई या खंडित हुई मूर्तियों की पूजा नहीं करते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में एक ऐसा मंदिर है, जहां बिना सिर वाली मूर्तियों की पूजा होती है। यहां देवी-देवताओं की ज्यादातर मूर्तियों पर सिर ही नहीं है। इन मूर्तियों को 900 सालों से संरक्षित किया जा रहा है। 

Ashtbhuja dham temple where Idols are worshiped without head
अष्टभुजा धाम मंदिर - फोटो : Social Media

900 साल पुराना यह मंदिर लखनऊ से 170 किलोमीटर दूर प्रतापगढ़ के गोंडे गांव में स्थित है। इस मंदिर का नाम है अष्टभुजा धाम मंदिर, बताया जाता है कि यहां की मूर्तियों के सिर मुगल शासक औरंगजेब ने कटवा दिए थे। इसके बाद से आज तक ये मूर्तियां वैसी की वैसी ही हैं। 

Ashtbhuja dham temple where Idols are worshiped without head
अष्टभुजा धाम मंदिर - फोटो : Social Media

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के रिकॉर्ड्स के मुताबिक, औरंगजेब ने वर्ष 1699 में हिंदू मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया था। उस समय इसे बचाने के लिए यहां के पुजारी ने मंदिर का मुख्य द्वार मस्जिद की तरह बनवा दिया था, ताकि मुगल सैनिकों को भ्रम हो जाए और मंदिर टूटने से बच जाए। 2007 में दिल्ली से आए कुछ पुरातत्वविदों ने इसे 11वीं शताब्दी का मंदिर बताया था। इतिहास में दर्ज उल्लेखों के अनुसार ऐसे मंदिर सिन्धु घाटी सभ्यता में होते थे। 

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Ashtbhuja dham temple where Idols are worshiped without head
- फोटो : Social Media

कहते हैं कि मुगल सेना को इस मंदिर का मुख्य द्वार देखने के बाद भ्रम हो गया था और वो यहां से लगभग आगे निकल ही गए थे, लेकिन अचानक एक सेनापति की नजर मंदिर में टंगे घंटे पर पड़ गई। बाद में सेनापति ने अपने सैनिकों को भेजकर इस मंदिर में स्थापित मूर्तियों के सिर कटवा दिए। 

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Ashtbhuja dham temple where Idols are worshiped without head
- फोटो : Social Media

इस मंदिर के मुख्य द्वार पर विशेष भाषा में कुछ लिखा हुआ है, लेकिन इस भाषा को आज तक कोई भी समझ नहीं पाया है। इसे समझने में कई पुरातत्वविद् और इतिहासकार भी फेल हो चुके हैं।  

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