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अमेरिका का राष्ट्रपति बनने वाला वो शख्स, जो पत्नी के डर से नहीं जाया करता था घर

Tue, 10 Nov 2020 10:37 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Tue, 10 Nov 2020 10:37 PM IST
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abraham lincoln president of america who did not go home for fear of his bully wife
अब्राहम लिंकन - फोटो : सोशल मीडिया

6 नवंबर 1860 को अब्राहम लिंकन अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति बने थे। सादगी, कर्मठता और ईमानदारी के साथ आज भी अब्राहम लिंकन सबसे सफल राष्ट्रपतियों में गिने जाते हैं। उससे भी बड़ी बात थी, उनका बेहद गरीब पृष्ठभूमि से निकलते हुए राष्ट्रपति की गद्दी पर पहुंचना। हालांकि, अब्राहम लिंकन जितने ही सहज और सरल थे, उनकी पत्नी उतनी ही लड़ाकू, खुदगर्ज और लालची थी।

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अब्राहम लिंकन - फोटो : सोशल मीडिया

अब्राहम लिंकन की पत्नी को अमेरिकी राष्ट्रपतियों के इतिहास में सबसे लालची पत्नी के रूप में भी याद किया जाता है। लिंकन की जीवनी लिखने वाले कई लेखकों ने तो यहां तक लिख दिया है कि उनकी पत्नी उनसे लगातार लड़ती ही नहीं थी। इतना ही नहीं कई बार वो पत्नी की हाथापाई के भी शिकार बने। अब्राहम लिंकन का दांपत्य जीवन कलह से भरा हुआ था।

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अब्रहाम लिंकन और उनकी पत्नी - फोटो : सोशल मीडिया

अब्राहम लिंकन ने मैरी टाड के साथ शादी की थी, जबकि उन्हें ये रिश्ता बिल्कुल पसंद नहीं था। एक बार उनकी सगाई टूट भी गई, लेकिन मैरी आमादा थीं कि वो शादी लिंकन से ही करेंगी। येन-केन प्रकारेण उन्होंने ऐसा कर भी लिया। किताब 'लिंकन द अननोन' में लेखक डेल कारनेगी लिखते हैं कि लिंकन ने जब पहली बार सगाई तोड़ी थी, तो उनका यही मानना था कि अगर शादी हुई तो विनाशकारी होगी।

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Abraham Lincoln

अब्रहाम लिंकन वकालत कर रहे थे और उनकी ख्याति जबरदस्त वक्ता के रूप में होनी लगी। पत्नी से बचने के लिए वो आमतौर पर घर से दूर रहने की कोशिश करते थे और रातें आफिस में बिताते थे। 1860 में जब शिकागो में नवगठित रिपब्लिकन पार्टी ने राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार का चयन किया, तो लिंकन के नाम की कोई संभावना ही नहीं थी। एक से मजबूत एक दावेदार थे, घंटों के वादविवाद और गुटबाजी के चलते जब लिंकन के नाम का नामांकन हुआ तो लोग हैरान रह गए। लिंकन को कोई नहीं जानता था।

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अब्राहम लिंकन - फोटो : सोशल मीडिया

दासप्रथा को लेकर जब अमेरिका का दक्षिणी हिस्सा जल रहा था, उस समय लिंकन का भाषण लोगों को प्रभावित करने वाला था। उनकी बातें जनता के दिलों तक पहुंचती थी। वह भाषणों में कहते थे, ‘अगर दासता गलत नहीं है तो कुछ भी गलत नहीं है।' वह चुनाव जीते और राष्ट्रपति बने। 1 जनवरी 1963 को राष्ट्रपति के तौर पर अब्राहम लिंकन ने दासप्रथा के खिलाफ कानून पर हस्ताक्षर किए।

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