अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको में काम कर रही ऑटोमोबाइल कंपनियों पर नए टैरिफ लगाने के फैसले को फिलहाल रोक दिया है। यह एक महीने की छूट यूएस-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) के तहत आने वाले वाहनों और उनके पुर्जों पर लागू होगी। यह फैसला ट्रंप की Ford (फोर्ड), General Motors (जनरल मोटर्स) और Stellantis (स्टेलेंटिस) जैसी बड़ी ऑटो कंपनियों से बातचीत के बाद लिया गया। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, ट्रंप ने कंपनियों से कहा है कि "निवेश करना शुरू करें, उत्पादन शिफ्ट करें, और अमेरिका में निर्माण बढ़ाएं।"
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Ford Bronco
- फोटो : Ford
क्या ये तूफान से पहले की शांति है?
हालांकि यह राहत सिर्फ अस्थायी है, क्योंकि 25 प्रतिशत टैरिफ 2 अप्रैल 2025 से लागू होंगे। ट्रंप प्रशासन का संदेश साफ है – इस नए कर से बचने का कोई तरीका नहीं है। ऑटोमोबाइल सेक्टर इस फैसले को लेकर सतर्क रवैया अपना रहा है और इसे सकारात्मक रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। फोर्ड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "हम प्रशासन के साथ स्वस्थ और स्पष्ट संवाद जारी रखेंगे ताकि ऑटो इंडस्ट्री और अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।" वहीं, जनरल मोटर्स और स्टेलेंटिस ने भी ट्रंप के इस फैसले का समर्थन किया है और इसे अमेरिका में निवेश बढ़ाने का अवसर बताया है।
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Jeep Meridian Limited (O)
- फोटो : Jeep
ऑटो कंपनियों के लिए आसान नहीं होगा ये बदलाव
ऑटोमोबाइल कंपनियां इस स्थिति का सामना मजबूती से कर रही हैं, लेकिन यह सफर उनके लिए आसान नहीं होगा। यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के मैनेजमेंट प्रोफेसर जॉन पॉल मैकडफी के अनुसार, "प्रत्येक कंपनी पर इस फैसले का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि उनकी सप्लाई चेन कहां स्थित है। अगर लक्ष्य उत्पादन को अमेरिका में स्थानांतरित करना है, तो यह संभव है, लेकिन यह प्रक्रिया जल्द पूरी नहीं होगी।"
विशेषज्ञों का मानना है कि 25 प्रतिशत टैरिफ वाहनों, इंजनों और अन्य ऑटो पार्ट्स की कीमतों को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, यह संकट बड़ी संख्या में नौकरियों के नुकसान का कारण भी बन सकता है।
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Cadillac Escalade
- फोटो : Cadillac
फिलहाल ऑटोमोबाइल कंपनियों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन यह ज्यादा दिनों तक टिकने वाली नहीं है। अगर कंपनियां अमेरिका में उत्पादन नहीं बढ़ाती हैं, तो उन्हें भारी टैक्स का सामना करना पड़ेगा, जिससे कारों की कीमतें बढ़ेंगी और नौकरियों पर भी असर पड़ सकता है। अब देखना यह है कि आने वाले महीनों में ये कंपनियां अपनी रणनीति कैसे बदलती हैं और अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले का क्या असर होता है।
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