अमेरिकी सीक्रेट सर्विस को दुनिया की सबसे तेजतर्रार एजेंसियों में गिना जाता है। यही वजह है कि वे अपने राष्ट्रपति के हर आधिकारिक वाहन के साथ वन जोड़ देते हैं, क्योंकि वे सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करते। वहीं इसकी दूसरी वजह भी है क्योंकि राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक होते हैं, तो उनके हर आधिकारिक वाहन के साथ वन जोड़ा जाता है। जानते हैं अमेरिकी प्रेसिडेंट के आधिकारिक वाहनों के बारे में...
अमेरिकी राष्ट्रपति के इन आधिकारिक वाहनों के नाम के साथ क्यों जोड़ा जाता है ‘वन’?
एयर फोर्स वन
अमेरिकी राष्ट्रपति जिस जहाज से सफर करते हैं उसका नाम एयरफोर्स वन है, जो बोइंग 747-200बी सीरीज एयरलाइनर का मिलिट्री वर्जन बोइंग VC-25A है। इसे खासतौर पर राष्ट्रपति के आने-जाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें हवा में ईंधन भरने की क्षमता है। हमेशा इस जहाज पर डॉक्टर तैनात रहता है और इसमें एक मेडिकल सूट भी है। इसमें तीन स्तर पर 4,000 स्क्वॉयर फीट का फ्लोर स्पेस मिलता है। इसमें दो किचन हैं, जहां 100 लोगों का खाना बन सकता है। यह जहाज 13,750 मीटर के एल्टीट्यूड तक उड़ान भर सकता है। वहीं कॉमर्शियल फ्लाइट्स 9,100 मीटर तक ही उड़ान भर पाती हैं। खास बात यह है कि एयर फोर्स वन के रखरखाव का जिम्मा व्हाइट हाउस मिलिट्री ग्रुप के प्रेसिडेंशियल एयरलिफ्ट ग्रुप के पास होता है।
कैडिलेक वन
अमेरिकी राष्ट्रपति की आधिकारिक कार नाम द बीस्ट है। जो लेटेस्ट सुरक्षा उपकरणों से लैस है। ट्रक की चेसिस पर बनी इस का कार वजन 6400 किग्रा है। इस कार राष्ट्रपति के ब्लड से मिलता एक ब्लड बैंक बैंक भी है। इस कार को यूनाइटेड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस के स्टैंडर्ड्स के मुताबिक बनाया गया है। राष्ट्रपति जब इस कार में चलते हैं तो पूरी दुनिया से उनका संपर्क खत्म हो जाता है। हाल ही में इसमें वाशिंगटन डीसी की लाइसेंस प्लेट लगाई गई है।
ग्राउंड फोर्स वन
अमेरिका राष्ट्रपति की बस का गैर-आधिकारिक नाम ग्राउंड फोर्स वन है। ग्राउंड फोर्स वन की लंबाई 45-फुट है जिसे खासतौर पर अमेरिका की सिक्रेट सर्विस ने तैयार किया है। इससे पहले अमेरिकी सीक्रेट सर्विस किराए पर बस लेती थी। लेकिन 2011 में बराक ओबामा के राष्ट्रपति पद पर बने रहने के दौरान बस की पूरी फ्लीट तैयार की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति की कार की तरह इसे भी बिलकुल काला रंग दिया गया है। अमेरिकी सिक्रेट सर्विस ने ग्राउंड फोर्स वन को एक टेनेसी स्थित कंपनी से 1.1 मिलियन डॉलर (करीब 7.1 करोड़ रुपए) में खरीदा था। हालांकि बाद में भी इस पर खर्चा किया गया है। ग्राउंड फोर्स वन आने से पहले हर बार नई बस किराए पर लेनी पड़ती थी और उसे हथियारों से लैस करना पड़ता था। बस के टायर अंदर से मैटल के बने हैं और ऊपर से रबड़ चढ़ाई गई है, ताकि क्षतिग्रस्त होने के बाद भी बस आसानी से चल पाएगी। बस आधुनिक हथियारों से लैस है और इसके ग्लास भी बुलेटप्रूफ हैं।
मैरीन वन
अमेरिकी राष्ट्रपति व्हाइट हाउस से मैरीलैंड स्थित एंड्रयूज एयरफोर्स बेस जाने के लिए मैरीन वन हैलीकॉप्टर का इस्तेमाल करते हैं। अंतरराष्ट्रीय दौरों के दौरान भी इसका इस्तेमाल होता है। भारत आने वाली फ्लीट में यह भी शामिल है। जब राष्ट्रपति इसमें सफर कर रहे होते हैं, केवल तभी यह मैरीन-वन का इलेक्ट्रानिक सिग्नेचर इस्तेमाल करता है, अन्यथा यह नाइटहॉक के सिग्नेचर पर उड़ान भरता है। इसकी अधिकतम गति 241 किलोमीटर प्रति घंटा है। ट्रंप के हेलीकॉप्टर को पहली बार पिछले साल चार जुलाई के पेश किया गया था। इस VH-92 कॉप्टर को लॉकहीड मार्टिंन की कंपनी सिकोरस्काई ने बनाया है। यह कॉप्टर सिकोरस्काई के कॉमर्शियल एस-92 पर बेस्ड है, जो ज्यादातर ऑयल एंड गैस इंडस्ट्री में इस्तेमाल होता है। खुद राष्ट्रपति ट्रंप के पास दो सिकोरस्काई एस-76 हेलीकॉप्टर्स हैं, जिन्हें उनके राष्ट्रपति बनने के बाद उड़ाने की अनुमति नहीं है। यह ऐसा हैलिकॉप्टर है, जिसमें बाथरूम भी होता है। कैडिलैक वन की तरह इसे भी सी-17 ग्लोबमास्टर या सी-5 गैलेक्सी जैसे ताकतवर प्लेन से ट्रांसपोर्ट किया जाता है।