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नितिन गडकरी: मार्च 2027 तक 100% बैरियर-फ्री फास्टैग टोल का लक्ष्य, ₹25,000 करोड़ सालाना लाभ की उम्मीद
Mon, 14 Sep 2026 04:21 PM IST
Amar Sharma
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amar Sharma
Updated Mon, 14 Sep 2026 04:21 PM IST
सार
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सरकार मार्च 2027 तक सभी राष्ट्रीय राजमार्ग टोल बूथों को बैरियर-फ्री बनाने की दिशा में काम कर रही है।
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बैरियर-फ्री (MLFF) टोल सिस्टम
- फोटो : एएनआई
विस्तार
भारत में हाईवे पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए अब टोल प्लाजा पर रुकने का झंझट खत्म होने जा रहा है। केंद्र सरकार पूरे देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर 100% बैरियर-फ्री टोल कलेक्शन सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। मुंबई में आयोजित 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026' में बोलते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एलान किया है कि दिसंबर 2026 के अंत तक देश के 70 प्रतिशत से अधिक टोल बूथों को बैरियर-फ्री कर दिया जाएगा। वहीं, मार्च 2027 तक यह व्यवस्था देश के 100 प्रतिशत राष्ट्रीय राजमार्गों पर पूरी तरह लागू हो जाएगी।
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बैरियर-फ्री सिस्टम से सरकार और आम लोगों को कितना फायदा होगा?
नितिन गडकरी के अनुसार, जब यह इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम पूरी तरह से काम करने लगेगा, तो केवल इस विभाग के माध्यम से भारत सरकार को सालाना 20,000 करोड़ रुपये से 25,000 करोड़ रुपये तक का वित्तीय लाभ मिलेगा।इस नई व्यवस्था से होने वाले प्रमुख फायदे ये हैं:
- टोल राजस्व में बढ़ोतरी: फास्टैग के आने से पहले ही टोल कलेक्शन में 10 प्रतिशत (लगभग 7,000 करोड़ रुपये) का इजाफा हुआ है। जिससे कुल टोल राजस्व बढ़कर 82,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। बैरियर-फ्री व्यवस्था से इसमें 7,000 रुपये से 8,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी।
- ऑपरेशनल लागत में भारी कमी: टोल प्लाजा चलाने का खर्च (ऑपरेटिंग कॉस्ट) पहले के 12 प्रतिशत से घटकर अब महज 2 से 3 प्रतिशत रह गया है।
- ईंधन और समय की बचत: टोल प्लाजा पर वाहनों का वेटिंग टाइम कम होने से वाहन चालकों को सालाना 5,250 करोड़ रुपये से अधिक के ईंधन की बचत हो रही है।
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बिना बैरियर के टोल कलेक्शन कैसे काम करेगा?
सरकार फास्टैग को 'ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन' (ANPR) तकनीक के साथ जोड़कर बैरियर-फ्री सिस्टम की ओर बढ़ रही है।11 मई 2026 को मुंबई के एक टोल प्लाजा पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 'मल्टी-लेन फ्री-फ्लो' (MLFF) टोलिंग सिस्टम की शुरुआत की गई थी। इस तकनीक की मदद से गाड़ियां बिना रुके तेज गति में टोल प्लाजा से गुजर सकती हैं और कैमरे व सेंसर्स की मदद से टोल टैक्स अपने आप कट जाता है। पहले जहाँ वाहनों को टोल पर औसतन 12 मिनट रुकना पड़ता था, अब यह स्टॉपेज टाइम न के बराबर रह जाएगा।
'OneTag' पोर्टेबिलिटी फैसिलिटी क्या है और इससे ड्राइवरों को क्या सुविधा मिलेगी?
कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने फास्टैग पोर्टेबिलिटी सुविधा वन टैग (OneTag) का भी शुभारंभ किया।- आसान बैंक ट्रांसफर: इस नई सुविधा के जरिए वाहन मालिक राजमार्ग यात्रा (Rajmarg Yatra) ऐप का उपयोग करके अपने मौजूदा फास्टैग को बिना नया टैग खरीदे किसी भी नए बैंक खाते से आसानी से जोड़ सकते हैं।
- डिजिटल इंटीग्रेशन: यह कदम ग्राहक केंद्रित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।
फास्टैग की मौजूदा स्थिति और भविष्य की योजनाएं क्या हैं?
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर फास्टैग की पहुंच 98 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर चुकी है और अब तक देश भर में 13 करोड़ से अधिक फास्टैग जारी किए जा चुके हैं।भविष्य के रोड मैप पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगला चरण फास्टैग, वाहन डेटा, इंश्योरेंस और बैंकिंग सिस्टम का आपस में गहरा एकीकरण होगा। इसके अलावा, गडकरी ने टेक-विशेषज्ञों और स्टार्टअप्स से ट्रकों में ओवरलोडिंग का पता लगाने वाली तकनीक विकसित करने की अपील भी की ताकि माल ढुलाई क्षेत्र में पूरी पारदर्शिता लाई जा सके। उन्होंने जानकारी दी कि अनियमितताओं के चलते एक टोल ऑपरेटर के खिलाफ सीबीआई मामला दर्ज कर जांच भी कर रही है।