आप सड़क पर गाड़ी चला रहे हैं और सामने कोई धीमी रफ्तार वाली गाड़ी चल रही है। आप ओवरटेक करने के लिए साइड से निकलते हैं, लेकिन तभी अचानक सामने से एक और गाड़ी आ जाती है या बगल से कोई बाइक निकल जाती है। अगर ऐसा कभी हुआ है तो समझ लीजिए कि आप ‘ब्लाइंड स्पॉट’ का शिकार हुए हैं।
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ओवरटेकिंग में सतर्कता जरूरी
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ओवरटेकिंग में सतर्कता जरूरी
भारत में सड़क हादसों का एक बड़ा कारण गलत तरीके से ओवरटेक करना भी है। ओवरटेक करना गलत नहीं, लेकिन इसे सही तरीके और सतर्कता से करना बेहद जरूरी है। ओवरटेकिंग के समय जो चीज सबसे ज्यादा नजरअंदाज की जाती है, वह है ब्लाइंड स्पॉट।
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क्या होता है ब्लाइंड स्पॉट?
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क्या होता है ब्लाइंड स्पॉट?
ये वो हिस्से होते हैं जो साइड मिरर या रियर व्यू मिरर में नजर नहीं आते। यानी कोई गाड़ी आपकी कार के पास में चल रही होती है, लेकिन आपको उसका कोई अंदाजा नहीं होता। ऐसे में थोड़ी सी चूक हादसे को न्योता दे सकती है।
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रियर व्यू मिरर की सेटिंग ऐसे करें
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रियर व्यू मिरर की सेटिंग ऐसे करें
जब आप ड्राइविंग सीट पर बैठते हैं तो सबसे पहले बीच वाले मिरर यानी रियर व्यू मिरर को ऐसे सेट करें कि आपको पूरी की पूरी पिछली विंडो साफ नजर आए। आपकी कार या सीट का कोई हिस्सा इसमें न दिखे, तभी यह सही सेटिंग मानी जाएगी।
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लेफ्ट साइड ORVM
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लेफ्ट साइड मिरर में दिखे सड़क
बाईं ओर का मिरर इस बात के लिए जिम्मेदार है कि आपको पीछे से आ रही बाईं लेन की गाड़ियां दिखाई दें। इसे ऐसे सेट करें कि सिर्फ आपकी कार का थोड़ा सा हिस्सा (10-15%) दिखे, बाकी पूरा व्यू पीछे की सड़क और ट्रैफिक का हो।