सेना के पुराने वाहनों का लोगों में काफी क्रेज होता है। केवल आम आदमी ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधियों में भी सेना के पुराने वाहन काफी पॉपुलर हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2017-18 में तकरीबन 36 सांसदों ने पुराने सैन्य वाहन खरीदने की इच्छा जताई। इन वाहनों में मारुति जिप्सी, महिंद्रा जीप और रॉयल एनफील्ड बुलेट्स जैसी गाड़ियां शामिल थीं। लेकिन सांसदों के अलावा आप भी सेना के पुराने वाहन खरीद सकते हैं। आइए जानते हैं इन वाहनों के बारे में...
सांसदों को भी खूब भाते हैं भारतीय सेना के ये पुराने वाहन, इन्हें खरीदने के लिए मचती है होड़!
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आम नहीं ‘Olive Green’
हम आपको सबसे पहले बताते हैं कि आखिर क्यों ‘Olive Green’ रंग में ऑटोमोबाइल कंपनियां अपने वाहन लॉन्च नहीं करती हैं। असल इसकी वजह है भारतीय सेना। यह रंग भारतीय सेना के लिए आरक्षित है और नागरिक वाहनों पर यह रंग इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है। कुछ साल पहले रॉयल एनफील्ड ने Royal Enfield Classic 500 Pegasus लॉन्च की थी, लेकिन सेना की आपत्ति के बाद कंपनी ने इस रंग में बाइक को बनाना बंद कर दिया।
मारुति जिप्सी
एक वक्त था जब सेना में मारुति जिप्सी की तूती बोलती थी, लेकिन अब इनकी जगह टाटा सफारी ने ले ली है। हालांकि अभी भी सेना में कई स्तर पर जिप्सी का इस्तेमाल हो रहा है और भारतीय सेना ने जिप्सी की व्यावहारिकता को देखते हुए मारुति सुजकी को और जिप्सी बनाने का ऑर्डर दिया है। आज भी मिलिट्री ऑक्शन में जिप्सी एक लाख रुपये तक की कीमत में मिल जाती हैं। वैसे भी सेना के हर वाहन का अपना एक स्वर्णिम इतिहास होता है, जिसके लिए यह कीमत कुछ भी नहीं है।
जीप
मारुति जिप्सी से पहले सेना में जीप काफी पॉपुलर थी। जिप्सी के आने के पहले तक कई युद्ध जीप से ही लड़े गए। भारतीय सेना ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सेनाओं में आधुनिक वाहनों के आने से पहले जीप ही इस्तेमाल होती थी। जीप की क्षमता और व्यावहारिकता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि 55 साल पहले 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग में परमवीर चक्र से सम्मानित शहीद अब्दुल हमीद ने गन माउंडेट आरसीएल जीप ने पाकिस्तान के सात पैंटन टैंकों के परखच्चे उड़ा दिए थे। ऑनलाइन साट्स पर जीप आज भी आसानी से उपलब्ध है।
रॉयल एनफील्ड
वहीं अब बात करते हैं सबसे पॉपुलर वाहन रॉयल एनफील्ड बुलेट की। रॉयल एनफील्ड आज भी सेना में इस्तेमाल होती हैं और दशकों से यह सेना का सबसे पसंदीदा दोपहिया वाहन रहा है। इसका ऑफरोड कैपेबिलिटी ही इसका यूएसपी है। तकरीबन पिछले 65 सालों से यह सेना की सेवा कर रही है। आज भी सेना इसकी 2 से 3 हजार यूनिट्स साल दो साल में ऑर्डर करती है। 1985 मॉडल की बुलेट आज भी आपको 40-50 हजार रुपये में मिल सकती है।