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Car Gearbox: ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के बढ़ते रुझान के बावजूद क्यों लोकप्रिय है मैनुअल गियरबॉक्स, वजह है खास
Fri, 15 Mar 2024 07:33 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 15 Mar 2024 07:33 PM IST
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Car Transmission
- फोटो : For Reference Only
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भारतीय उपभोक्ता कार खरीदते समय ऑटोमैटिक गियरबॉक्स टेक्नोलॉजी के बढ़ते रूझान के बावजूद अभी भी मैनुअल गियरबॉक्स को तरजीह देते हैं। कोविड-19 महामारी के बाद से, लोग पर्सनल मोबिलिटी के महत्व के बारे में ज्यादा जागरूक हो गए हैं। नतीजतन, कई यूजर कार खरीदते समय, ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाली कारों को मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कारों की तुलना में चुनते हैं। क्योंकि शहरी इलाकों में खासकर भारी ट्रैफिक में गाड़ी चलाना कम सुविधाजनक होता है। जहां बार-बार गियर बदलना और क्लच का इस्तेमाल करना पड़ता है।
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- फोटो : iStock
फिर भी, ऑटोमैटिक गियरबॉक्स टेक्नोलॉजी में प्रगति के बावजूद, मैनुअल गियरबॉक्स वाली कारों की बिक्री अभी भी सभी यात्री वाहनों की बिक्री का एक बड़ा हिस्सा है। यहां कुछ मुख्य कारण बताए जा रहे हैं कि आखिर ऑटोमैटिक गियरबॉक्स की मांग के बावजूद भारत में मैन्युअल ट्रांसमिशन अभी भी लोकप्रिय क्यों हैं।
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ज्यादा कीमत
ऑटोमैटिक गियरबॉक्स वाली कारें ज्यादा महंगी होती हैं। भारत एक मूल्य-संवेदनशील बाजार है। और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स की जटिलता कार निर्माताओं के लिए आम-बाजार मॉडल को डुअल पैडल टेक्नोलॉजी से लैस करना महंगा बना देती है। स्पिननी की रिपोर्ट के मुताबिक, कार के एंट्री लेवल एएमटी वैरिएंट की कीमत मैनुअल गियरबॉक्स वाले वैरिएंट से लगभग 80,000 रुपये ज्यादा है। इसका मतलब है कि खरीदार को ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाली कार के लिए मैन्युअल ट्रांसमिशन वाली कार की तुलना में ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं।
ऑटोमैटिक गियरबॉक्स वाली कारें ज्यादा महंगी होती हैं। भारत एक मूल्य-संवेदनशील बाजार है। और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स की जटिलता कार निर्माताओं के लिए आम-बाजार मॉडल को डुअल पैडल टेक्नोलॉजी से लैस करना महंगा बना देती है। स्पिननी की रिपोर्ट के मुताबिक, कार के एंट्री लेवल एएमटी वैरिएंट की कीमत मैनुअल गियरबॉक्स वाले वैरिएंट से लगभग 80,000 रुपये ज्यादा है। इसका मतलब है कि खरीदार को ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाली कार के लिए मैन्युअल ट्रांसमिशन वाली कार की तुलना में ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं।
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रखरखाव लागत है ज्यादा
इसके अलावा, ऑटोमैटिक गियरबॉक्स वाली कारों का रखरखाव मैनुअल गियरबॉक्स वाली कारों की तुलना में ज्यादा महंगा होता है। ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन का निर्माण ज्यादा जटिल होता है। जिसकी वजह से ओनरशिप की कुल अवधि में मालिक के लिए रखरखाव लागत बढ़ जाती है।
इसके अलावा, ऑटोमैटिक गियरबॉक्स वाली कारों का रखरखाव मैनुअल गियरबॉक्स वाली कारों की तुलना में ज्यादा महंगा होता है। ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन का निर्माण ज्यादा जटिल होता है। जिसकी वजह से ओनरशिप की कुल अवधि में मालिक के लिए रखरखाव लागत बढ़ जाती है।
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कम भरोसेमंद
मैनुअल गियरबॉक्स टेक्नोलॉजी ज्यादा समय से चली आ रही है और इसका विकास हो चुका है। निस्संदेह, उपभोक्ता उनकी सिद्ध विश्वसनीयता के कारण मैनुअल गियरबॉक्स वाली गाड़ियों को पसंद करते हैं। गियरबॉक्स की समस्या होने पर, मैनुअल गियरबॉक्स के लिए मैकेनिक ढूंढना ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के लिए तकनीशियन ढूंढने से आसान होता है।
मैनुअल गियरबॉक्स टेक्नोलॉजी ज्यादा समय से चली आ रही है और इसका विकास हो चुका है। निस्संदेह, उपभोक्ता उनकी सिद्ध विश्वसनीयता के कारण मैनुअल गियरबॉक्स वाली गाड़ियों को पसंद करते हैं। गियरबॉक्स की समस्या होने पर, मैनुअल गियरबॉक्स के लिए मैकेनिक ढूंढना ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के लिए तकनीशियन ढूंढने से आसान होता है।