कार हो या बाइक हर किसी को बेहतर माइलेज चाइये। और अच्छी माइलेज में सबसे अहम भूमिका टायर्स भी निभाते है। इसलिए टायर्स की देखभाल बेहद जरूरी भी है। देश में ज्यादातर गाड़ियों में रेडियल टायर्स और सेमी रेडियल टायर्स सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं। लेकिन अब जल्द ही आपको लो रोलिंग रेजिस्टेंस टायर्स भी देखने को मिलेंगे जो न सिर्फ आपकी गाड़ी के लिए अच्छे होंगे बल्कि फ्यूल की भी काफी बचत करेंगे। आइये जानते हैं लो रोलिंग रेजिस्टेंस टायर्स के बारे में...
लो रोलिंग रेजिस्टेंस क्या होता है?
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Low Rolling Resistance Tires
जो एनर्जी गाड़ी को पुल करने के लिए लगती है उसे लो कम रोलिंग रेजिस्टेंस कहा जाता है। रोलिंग रेजिस्टेंस कम होने पर टायर्स को ज्यादा ताकत नहीं लगानी पड़ती जिसकी वजह से फ्यूल की खपत कम हो जाती है और माइलेज में इजाफा होता है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों में लो रोलिंग रेजिस्टेंस टायर्स का इस्तेमाल किया जाता है ताकि वो कम एनर्जी में ज्यादा दूरी तय कर सकें। कम रोलिंग रेजिस्टेंस से करीब 10 फीसदी तक फ्यूल की बचत की जा सकती है। जापान, यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में कारों के टायर्स में रोलिंग रेजिस्टेंस मानक लागू हैं और टायर्स पर रोलिंग रेजिस्टेंस लिखा भी होता है। फ्यूल की बचत के साथ-साथ इन टायर्स से गाड़ी की परफॉरमेंस भी बेहतर होती है जिससे आपका सफर भी सुहाना बनता है।
भारत में जल्द होंगे लांच
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Low Rolling Resistance Tires
देश में सरकार भी अब गाड़ियों के रेडियल टायरों के लिए नए रोलिंग रेजिस्टेंस मानक लागू करने की कवायद में जुट गई है। अब टायर निर्माता कंपनियों को ऐसे टायर्स बनाने होंगे जिनके चलाने से एनर्जी की खपत कम हो। दरअसल टायर्स के बनाने में तकनीकी बदलाव करके यह किया जाता है। इस मानक के लागू होने पर गाड़ियों को चलाने जहां मजा आएगा वही इसकी माइलेज में भी करीब 15 फीसदी तक बढ़ोतरी हो जाएगी।