{"_id":"6841496e66caa52bcc0e8b23","slug":"india-s-electric-vehicle-ev-ambition-hit-roadblock-due-to-china-s-curbs-on-rare-earth-exports-2025-06-05","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Rare Earth Exports: चीन ने रेयर अर्थ निर्यात पर लगाई रोक, क्या भारत की ईवी योजनाओं पर लगेगा ब्रेक?","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
Rare Earth Exports: चीन ने रेयर अर्थ निर्यात पर लगाई रोक, क्या भारत की ईवी योजनाओं पर लगेगा ब्रेक?
Thu, 05 Jun 2025 01:08 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 05 Jun 2025 01:08 PM IST
सार
भारत की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बनाने की महत्वाकांक्षा को एक बड़ा झटका लगा है। चीन ने रेयर अर्थ मैग्नेट्स, मिश्रण और अलॉय जैसे जरूरी कंपोनेंट्स के निर्यात पर रोक लगा दी है।
विज्ञापन
Electric Car Charging
- फोटो : Freepik
भारत की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बनाने की महत्वाकांक्षा को एक बड़ा झटका लगा है। चीन ने रेयर अर्थ मैग्नेट्स, मिश्रण और अलॉय जैसे जरूरी कंपोनेंट्स के निर्यात पर रोक लगा दी है। ये चीजें न सिर्फ निकालने में मुश्किल होती हैं, बल्कि इनसे पर्यावरण को भी बड़ा नुकसान होता है और लागत भी काफी ज्यादा होती है।
Electric Vehicles Charging Station
- फोटो : Freepik
सरकार का ईवी सेक्टर को बढ़ावा देने का प्रयास
यह सब ऐसे समय में हुआ है जब भारत सरकार ईवी सेक्टर को तेजी से आगे बढ़ाने में लगी है। बजट 2025 में भी ईवी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन और फंड आवंटित किए गए हैं ताकि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन और ई-मोबिलिटी को बढ़ावा मिल सके।
यह भी पढ़ें - 2025 Yezdi Adventure: नई 2025 येजदी एडवेंचर मोटरसाइकिल भारत में लॉन्च, जानें कीमत और क्या है नया
यह सब ऐसे समय में हुआ है जब भारत सरकार ईवी सेक्टर को तेजी से आगे बढ़ाने में लगी है। बजट 2025 में भी ईवी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन और फंड आवंटित किए गए हैं ताकि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन और ई-मोबिलिटी को बढ़ावा मिल सके।
यह भी पढ़ें - 2025 Yezdi Adventure: नई 2025 येजदी एडवेंचर मोटरसाइकिल भारत में लॉन्च, जानें कीमत और क्या है नया
Electric car
- फोटो : Freepik
चीन ने रेयर अर्थ पर पाबंदी क्यों लगाई?
चीन का यह फैसला अमेरिका की ओर से उसकी टेक्नोलॉजी, खासतौर से सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री पर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में लिया गया कदम माना जा रहा है। यह चीन के उस दबदबे को भी दिखाता है जो वह खनिज संसाधनों की सप्लाई चेन में रखता है। यह कदम अमेरिका के साथ उसकी ट्रेड वॉर में एक हथियार के रूप में देखा जा रहा है।
चीन ने रेयर अर्थ एलॉय और मैग्नेट्स के निर्यात को स्थगित कर दिया है, जिससे दुनियाभर के ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर और मिलिट्री इंडस्ट्री की सप्लाई चेन पर असर पड़ा है।
यह भी पढ़ें - Bus in Air: देहरादून में चलेगी 'हवा में दौड़ने वाली बस'? नितिन गडकरी का अनोखा प्रस्ताव
चीन का यह फैसला अमेरिका की ओर से उसकी टेक्नोलॉजी, खासतौर से सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री पर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में लिया गया कदम माना जा रहा है। यह चीन के उस दबदबे को भी दिखाता है जो वह खनिज संसाधनों की सप्लाई चेन में रखता है। यह कदम अमेरिका के साथ उसकी ट्रेड वॉर में एक हथियार के रूप में देखा जा रहा है।
चीन ने रेयर अर्थ एलॉय और मैग्नेट्स के निर्यात को स्थगित कर दिया है, जिससे दुनियाभर के ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, सेमीकंडक्टर और मिलिट्री इंडस्ट्री की सप्लाई चेन पर असर पड़ा है।
यह भी पढ़ें - Bus in Air: देहरादून में चलेगी 'हवा में दौड़ने वाली बस'? नितिन गडकरी का अनोखा प्रस्ताव
विज्ञापन
विज्ञापन
Electric Car
- फोटो : Adobe Stock
भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा?
भारत फिलहाल रेयर अर्थ मैग्नेट्स के लिए आयात पर निर्भर है, जो ईवी निर्माण का एक छोटा लेकिन बेहद जरूरी हिस्सा है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 870 टन रेयर अर्थ मैग्नेट्स का आयात किया, जिसकी कीमत 306 करोड़ रुपये थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत रेयर अर्थ खनन और 90 प्रतिशत उत्पादन में अकेले भागीदार है। ऐसे में उसका निर्यात रोकना ईवी इंडस्ट्री के लिए बड़ा संकट बन सकता है। इसकी वजह से इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें लगभग 8 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं, जिसका बोझ ग्राहकों पर पड़ेगा।
अब भारत के ऑटो निर्माता कंपनियों को मैग्नेट्स का 'एंड यूज' यानी इनके अंतिम इस्तेमाल की स्वयं घोषणा करनी होगी, तभी शिपमेंट क्लियर किया जाएगा। यह प्रक्रिया काफी लंबी है और इसे चीनी दूतावास से मंजूरी लेनी होती है। खबरों के मुताबिक, भारत की तरफ से 30 एप्लिकेशन भेजी गई हैं जो अभी भी चीन की मंजूरी का इंतजार कर रही हैं।
यह भी पढ़ें - EV Policy India: भारत की प्रमुख ईवी पॉलिसी लॉन्च, इसके बारे में अहम डिटेल्स जो आपको जानना चाहिए
भारत फिलहाल रेयर अर्थ मैग्नेट्स के लिए आयात पर निर्भर है, जो ईवी निर्माण का एक छोटा लेकिन बेहद जरूरी हिस्सा है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 870 टन रेयर अर्थ मैग्नेट्स का आयात किया, जिसकी कीमत 306 करोड़ रुपये थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन दुनिया के लगभग 70 प्रतिशत रेयर अर्थ खनन और 90 प्रतिशत उत्पादन में अकेले भागीदार है। ऐसे में उसका निर्यात रोकना ईवी इंडस्ट्री के लिए बड़ा संकट बन सकता है। इसकी वजह से इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें लगभग 8 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं, जिसका बोझ ग्राहकों पर पड़ेगा।
अब भारत के ऑटो निर्माता कंपनियों को मैग्नेट्स का 'एंड यूज' यानी इनके अंतिम इस्तेमाल की स्वयं घोषणा करनी होगी, तभी शिपमेंट क्लियर किया जाएगा। यह प्रक्रिया काफी लंबी है और इसे चीनी दूतावास से मंजूरी लेनी होती है। खबरों के मुताबिक, भारत की तरफ से 30 एप्लिकेशन भेजी गई हैं जो अभी भी चीन की मंजूरी का इंतजार कर रही हैं।
यह भी पढ़ें - EV Policy India: भारत की प्रमुख ईवी पॉलिसी लॉन्च, इसके बारे में अहम डिटेल्स जो आपको जानना चाहिए
विज्ञापन
MG Comet EV with Charger
- फोटो : MG Motor India
ऑटो सेक्टर की क्या है प्रतिक्रिया
भारतीय ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स की संस्था SIAM (सियाम) ने इस मुद्दे को लेकर सरकार के सामने चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि अगर रेयर अर्थ मैग्नेट्स की सप्लाई में रुकावट आई, तो गाड़ियों का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।
जवाब में, भारतीय सरकार इस स्थिति को सुलझाने के लिए ऑटो इंडस्ट्री के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल बीजिंग भेजने पर विचार कर रही है। ताकि चीन के साथ बातचीत कर कोई समाधान निकाला जा सके।
यह भी पढ़ें - Commercial Vehicles: एक नवंबर से दिल्ली में गैर-BS6 और गैर-CNG व्यावसायिक गाड़ियों पर बैन
यह भी पढ़ें - Electric Cars: आईईए प्रमुख ने कहा- भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की कुंजी हैं इलेक्ट्रिक कारें, ईवी पर सब्सिडी जरूरी
भारतीय ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स की संस्था SIAM (सियाम) ने इस मुद्दे को लेकर सरकार के सामने चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि अगर रेयर अर्थ मैग्नेट्स की सप्लाई में रुकावट आई, तो गाड़ियों का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।
जवाब में, भारतीय सरकार इस स्थिति को सुलझाने के लिए ऑटो इंडस्ट्री के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल बीजिंग भेजने पर विचार कर रही है। ताकि चीन के साथ बातचीत कर कोई समाधान निकाला जा सके।
यह भी पढ़ें - Commercial Vehicles: एक नवंबर से दिल्ली में गैर-BS6 और गैर-CNG व्यावसायिक गाड़ियों पर बैन
यह भी पढ़ें - Electric Cars: आईईए प्रमुख ने कहा- भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की कुंजी हैं इलेक्ट्रिक कारें, ईवी पर सब्सिडी जरूरी