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Lower Import Duty: भारत में टेस्ला के लिए आयात शुल्क हो सकता है कम! जानें इससे ईवी सेक्टर में क्या होगा असर
Wed, 18 Oct 2023 01:33 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 18 Oct 2023 01:33 PM IST
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Elon Musk Tesla Cars
- फोटो : Amar Ujala
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भारत सरकार Tesla (टेस्ला) जैसे निर्माताओं से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर कम आयात शुल्क की अनुमति दे सकती है, अगर ये कंपनियां आने वाले समय में स्थानीय मैन्युफेक्चरिंग (विनिर्माण) और स्थानीय सोर्सिंग की योजनाओं पर आश्वासन दें। वर्तमान में, 40,000 डॉलर से ज्यादा कीमत वाले इलेक्ट्रिक कार मॉडल पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क का मतलब है कि अगर इन्हें भारत लाया जाएगा तो ये अन्य बाजारों की कीमतों की तुलना में काफी ज्यादा महंगे होंगे।
Tesla Car Plant
- फोटो : Tesla
यदि योजनाएं सही तरह से पूरी होती हैं, तो विशेष रूप से टेस्ला को बड़ा फायदा होगा। दुनिया की सबसे बड़ी ईवी निर्माता पिछले कुछ समय से भारतीय कार क्षेत्र पर नजर गड़ाए हुए है, लेकिन अब तक भारत में भेजी जाने वाली पूरी तरह से निर्मित इकाइयों पर उच्च आयात टैक्स संरचना के कारण इसमें बाधा आ रही है। सीईओ एलन मस्क ने टेस्ला के भारत में भी आने की इच्छा जाहिर की है, लेकिन उच्च आयात शुल्क को लेकर आपत्ति भी जताई है।
Tata Nexon EV Max
- फोटो : Tata Motors
भारत कारों पर उच्च आयात टैक्स क्यों लगाता है?
भारत सरकार देश में ईवी को लोकप्रिय बनाना चाहती है और उसने समय-समय पर ऐसे वाहनों के कई बेनिफिट्स के बारे बताती है। जिनमें उत्सर्जन में बड़ी मात्रा में कमी से लेकर आयातित ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर निर्भरता कम करना शामिल है। लेकिन सरकार ऑटोमोटिव सहित सभी क्षेत्रों और उद्योगों में स्थानीय मैन्युफेक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए भी प्रतिबद्ध है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले साल बताया था कि टेस्ला का अपनी शंघाई प्लांट से कारों को आयात करने के बजाय भारत में मैन्युफेक्चरिंग स्थापित करने के लिए स्वागत है। उन्होंने पिछले साल अप्रैल में कहा था, "चीन में बनाना और यहां बेचना अच्छा सौदा नहीं है।''
स्थानीय मैन्युफेक्चरिंग के कई फायदे हैं, जिसमें रोजगार पैदा होने से लेकर ओवरऑल आर्थिक विकास को रफ्तार देना तक शामिल है। जैसे, हाई-एंड वाहनों पर उच्च आयात टैक्स निर्माताओं को वाहनों में शिपिंग के बजाय स्थानीय स्तर पर निर्माण करने के लिए प्रेरित करने वाले प्रमुख कारक के रूप में काम करता है।
भारत सरकार देश में ईवी को लोकप्रिय बनाना चाहती है और उसने समय-समय पर ऐसे वाहनों के कई बेनिफिट्स के बारे बताती है। जिनमें उत्सर्जन में बड़ी मात्रा में कमी से लेकर आयातित ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर निर्भरता कम करना शामिल है। लेकिन सरकार ऑटोमोटिव सहित सभी क्षेत्रों और उद्योगों में स्थानीय मैन्युफेक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए भी प्रतिबद्ध है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले साल बताया था कि टेस्ला का अपनी शंघाई प्लांट से कारों को आयात करने के बजाय भारत में मैन्युफेक्चरिंग स्थापित करने के लिए स्वागत है। उन्होंने पिछले साल अप्रैल में कहा था, "चीन में बनाना और यहां बेचना अच्छा सौदा नहीं है।''
स्थानीय मैन्युफेक्चरिंग के कई फायदे हैं, जिसमें रोजगार पैदा होने से लेकर ओवरऑल आर्थिक विकास को रफ्तार देना तक शामिल है। जैसे, हाई-एंड वाहनों पर उच्च आयात टैक्स निर्माताओं को वाहनों में शिपिंग के बजाय स्थानीय स्तर पर निर्माण करने के लिए प्रेरित करने वाले प्रमुख कारक के रूप में काम करता है।
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Mercedes-Benz Cars
- फोटो : Mercedes-Benz
दुनिया भर में वाहनों पर आयात शुल्क कितना है?
भारत 40,000 डॉलर से ज्यादा कीमत वाली कारों पर 100 प्रतिशत और अन्य सभी कारों पर 70 प्रतिशत आयात कर लगाता है। इसकी तुलना में, संयुक्त राज्य अमेरिका सिर्फ 2.5 प्रतिशत का आयात कर लगाता है जबकि ऑस्ट्रेलिया में यह पांच प्रतिशत है। कनाडा लगभग 6.1 प्रतिशत शुल्क लगाता है जबकि फ्रांस में यह 10 प्रतिशत है। सऊदी अरब (15 प्रतिशत), चीन (23 प्रतिशत) और ब्राजील (35 प्रतिशत) के आंकड़े ज्यादा हैं लेकिन फिर भी भारत से कम हैं।
भारत 40,000 डॉलर से ज्यादा कीमत वाली कारों पर 100 प्रतिशत और अन्य सभी कारों पर 70 प्रतिशत आयात कर लगाता है। इसकी तुलना में, संयुक्त राज्य अमेरिका सिर्फ 2.5 प्रतिशत का आयात कर लगाता है जबकि ऑस्ट्रेलिया में यह पांच प्रतिशत है। कनाडा लगभग 6.1 प्रतिशत शुल्क लगाता है जबकि फ्रांस में यह 10 प्रतिशत है। सऊदी अरब (15 प्रतिशत), चीन (23 प्रतिशत) और ब्राजील (35 प्रतिशत) के आंकड़े ज्यादा हैं लेकिन फिर भी भारत से कम हैं।
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For Reference Only
- फोटो : tesla
भारत में ईवी पर कम आयात टैक्स से किसे फायदा होगा?
यदि आयात कर में अस्थायी कटौती की अनुमति दी जाती है तो टेस्ला को सबसे ज्यादा फायदा होने की संभावना है, ऑडी और बीएमडब्ल्यू जैसे अन्य लग्जरी खिलाड़ियों को भी फायदा हो सकता है। दोनों ब्रांडों के पास पहले से ही भारत में ईवी हैं लेकिन ये आयात मार्ग के जरिए आते हैं और अनिवार्य रूप से एक विकसित गतिशीलता परिदृश्य को टेस्ट करने के तरीके हैं। मर्सिडीज-बेंज भारतीय बाजार के लिए अपने कुछ ईवी को स्थानीय स्तर पर असेंबल करती है।
यदि आयात कर में अस्थायी कटौती की अनुमति दी जाती है तो टेस्ला को सबसे ज्यादा फायदा होने की संभावना है, ऑडी और बीएमडब्ल्यू जैसे अन्य लग्जरी खिलाड़ियों को भी फायदा हो सकता है। दोनों ब्रांडों के पास पहले से ही भारत में ईवी हैं लेकिन ये आयात मार्ग के जरिए आते हैं और अनिवार्य रूप से एक विकसित गतिशीलता परिदृश्य को टेस्ट करने के तरीके हैं। मर्सिडीज-बेंज भारतीय बाजार के लिए अपने कुछ ईवी को स्थानीय स्तर पर असेंबल करती है।