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पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल मिश्रण की जानकारी देना हो अनिवार्य!: 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट करेगा याचिका पर सुनवाई

Sat, 29 Aug 2026 03:45 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Sat, 29 Aug 2026 03:45 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट आगामी 31 अगस्त को एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर सुनवाई करने जा रहा है। इस याचिका में केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि देश के सभी पेट्रोल पंपों के डिस्पेंसिंग नोजल पर पेट्रोल में मौजूद इथेनॉल के सटीक प्रतिशत का अनिवार्य और स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाए।

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Supreme Court to Hear Plea on Mandatory Ethanol Content Labelling at Petrol Pumps on August 31
Supreme Court - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की वास्तविक प्रतिशत मात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर 31 अगस्त को सुनवाई होने वाली है। याचिका में मांग की गई है कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर प्रत्येक ईंधन भरने वाली मशीन के नोजल पर पेट्रोल में मौजूद इथेनॉल का सटीक प्रतिशत स्पष्ट और एक समान तरीके से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाए।

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सुप्रीम कोर्ट की 31 अगस्त की वाद सूची के अनुसार, इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ करेगी।

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Supreme Court to Hear Plea on Mandatory Ethanol Content Labelling at Petrol Pumps on August 31
पेट्रोल पंप - फोटो : AI

पेट्रोल पंपों पर क्या जानकारी अनिवार्य करने की मांग है?

नरेंद्र कुमार गोस्वामी द्वारा दायर याचिका में केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश देने की मांग की गई है कि पेट्रोल पंपों के प्रत्येक डिस्पेंसिंग नोजल पर पेट्रोल में मिलाए गए इथेनॉल का सटीक प्रतिशत अनिवार्य रूप से लिखा जाए।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि ग्राहकों को दिए जाने वाले प्रत्येक ईंधन बिल या रसीद पर भी पेट्रोल में मौजूद इथेनॉल का प्रतिशत स्पष्ट और आसानी से पढ़े जाने योग्य तरीके से दर्ज किया जाए। 

 

वाहनों की इथेनॉल अनुकूलता का सार्वजनिक डाटाबेस बनाने की मांग क्यों?

याचिका में केंद्र और अन्य संबंधित प्राधिकरणों को एक आधिकारिक और सार्वजनिक वाहन-अनुकूलता डाटाबेस तैयार करने और प्रकाशित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

इस डाटाबेस में वाहन निर्माता, मॉडल, इंजन के प्रकार और निर्माण वर्ष के आधार पर यह जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है कि कौन-सा वाहन किस स्तर तक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए उपयुक्त है। 

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

क्या ई20 पर स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की भी मांग की गई है?

याचिका में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी की गई है। इसमें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ स्वतंत्र ऑटोमोबाइल इंजीनियरों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। 

प्रस्तावित समिति से मौजूदा वाहन बेड़े में ई20 पेट्रोल की वास्तविक परिस्थितियों में अनुकूलता का अध्ययन कर एक सार्वजनिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने की मांग की गई है।

 

समिति को किन मुद्दों की जांच करने की मांग है?

याचिका के अनुसार, विशेषज्ञ समिति से कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर रिपोर्ट देने की मांग की गई है। इनमें शामिल हैं-

  • ईंधन दक्षता पर प्रभाव
  • इंजन की आयु पर असर
  • रखरखाव लागत
  • वारंटी और बीमा से जुड़े प्रभाव
  • टेलपाइप उत्सर्जन सहित पर्यावरणीय प्रभाव
  • इथेनॉल उत्पादन में पानी की खपत
  • खाद्य सुरक्षा और इथेनॉल उत्पादन के लिए संसाधनों के उपयोग से जुड़ी चिंताएं
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Supreme Court to Hear Plea on Mandatory Ethanol Content Labelling at Petrol Pumps on August 31
Petrol Pump - फोटो : AdobeStock

उपभोक्ताओं के लिए राष्ट्रीय सूचना व्यवस्था की मांग क्यों की गई है?

याचिका में सभी प्रकार के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए एक राष्ट्रीय उपभोक्ता सूचना व्यवस्था तैयार करने की भी मांग की गई है। इसके लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय मानक ब्यूरो के साथ परामर्श करने का सुझाव दिया गया है। 

 

ई20 नीति से जुड़े दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में पेश करने की मांग क्या है?

याचिकाकर्ता ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की है कि ई20 के अनिवार्य विस्तार से जुड़े सभी नीति दस्तावेज, तकनीकी अध्ययन, वाहन अनुकूलता रिपोर्ट, सुरक्षा मानक, उपभोक्ता परामर्श और सार्वजनिक परामर्श से जुड़े रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं।

Supreme Court to Hear Plea on Mandatory Ethanol Content Labelling at Petrol Pumps on August 31
पेट्रोल पंप - फोटो : संवाद

पुराने और गैर-अनुकूल वाहनों के लिए क्या व्यवस्था मांगी गई है?

याचिका में पुराने और इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए अनुकूल नहीं माने जाने वाले वाहनों के लिए एक पारदर्शी और समयबद्ध परिवर्तन योजना तैयार करने की मांग की गई है।

इसके तहत जहां तकनीकी, आर्थिक और आपूर्ति व्यवस्था के लिहाज से संभव हो, वहां कम इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल की उपलब्धता पर विचार करने की भी मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस संबंध में कोई भी निर्णय विशेषज्ञों की राय और सार्वजनिक परामर्श के आधार पर लिया जाना चाहिए। 

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