साल का वह समय फिर आ गया है जब दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) विषाक्त स्तर तक बिगड़ जाता है। पराली जलाने से लेकर मौसम की स्थिति तक - ऐसे कई कारक हैं जो प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं। और राजधानी शहर की वाहन आबादी भी इस समग्र गंभीर स्थिति में अपना योगदान देती है। लेकिन यह कितना है?
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वायु प्रदूषण
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क्या कहते हैं सर्वे
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियोरोलॉजी (IITM) पुणे द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली में वाहन यहां के कुल प्रदूषण में लगभग 14 प्रतिशत का योगदान करते हैं। इसकी तुलना में, अध्ययन में पाया गया कि पराली जलाने से सिर्फ 1.3 प्रतिशत से 2.4 प्रतिशत ही प्रदूषण होता है। कुल प्रदूषण का 32 प्रतिशत से 44 प्रतिशत हिस्सा ऐसे स्रोतों से होता है, जिनके बारे में अभी तक पता नहीं है। लेकिन क्या इससे सभी वाहनों को दोषमुक्त करार दिया जा सकता है? जानकार कहते हैं, बिल्कुल भी नहीं।
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दिल्ली ट्रैफिक
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दिल्ली के प्रदूषण स्तर में आपका वाहन कितना योगदान दे रहा है?
दिल्ली में 15 साल से ज्यादा पुराने पेट्रोल वाहन और 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहन प्रतिबंधित हैं। इसका मतलब है कि ज्यादातर BS3 और कई BS4 वाहन शहर की सीमा के भीतर चलाने के लिए अवैध हैं। और यह अच्छी बात हो सकती है।
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दिल्ली वायु प्रदूषण
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कार से कितना होता है उत्सर्जन
BS3 डीजल वाहन में कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन की अधिकतम मात्रा 0.64 ग्राम/किमी, नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जन की अधिकतम मात्रा 0.50 ग्राम/किमी और हाइड्रो कार्बन+नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन की अधिकतम मात्रा 0.56 ग्राम/किमी होती है। वहीं, BS6 डीजल वाहन में कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन की अधिकतम मात्रा 0.50 ग्राम/किमी, नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जन की अधिकतम मात्रा 0.06 ग्राम/किमी और हाइड्रो कार्बन+नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन की अधिकतम मात्रा 0.17 ग्राम/किमी होती है। इसे और सरल भाषा में कहें तो, पेट्रोल से चलने वाली कार में आमतौर पर प्रति किलोमीटर 145 ग्राम CO2 होता है और डीजल इंजन वाली कारों के लिए यह आंकड़ा लगभग 165 ग्राम CO2 प्रति किलोमीटर होता है।
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Electric Car
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इसकी तुलना में, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) में शून्य उत्सर्जन होता है। और यही एक मुख्य कारण है कि बैटरी से चलने वाले मोबिलिटी विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है। बेशक, आलोचकों का तर्क है कि ईवी की उत्पादन प्रक्रिया पारंपरिक वाहनों के निर्माण की तुलना में कहीं ज्यादा प्रदूषणकारी है।