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US Tariffs: ट्रंप के ऑटो टैरिफ का भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर पर होगा बेहद कम असर, GTRI का खुलासा
Thu, 27 Mar 2025 01:18 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 27 Mar 2025 01:18 PM IST
सार
भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर देश की विनिर्माण जीडीपी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, इसलिए इस क्षेत्र को स्थिर बनाए रखना बेहद जरूरी है। GTRI के मुताबिक भारत सरकार को इस टैरिफ को अवसर के रूप में देखना चाहिए और कोई हड़बड़ी में कदम उठाने से बचना चाहिए।
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Automobile Industry
- फोटो : Adobe Stock
अमेरिका द्वारा 3 अप्रैल से पूरी तरह से निर्मित वाहनों (कंप्लीट बिल्ट व्हीकल्स) और ऑटो पार्ट्स पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा का भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर पर सीमित प्रभाव पड़ेगा। बल्कि, यह भारतीय निर्यातकों के लिए एक अवसर भी बन सकता है। ऐसा थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का मानना है, जिन्होंने गुरुवार को यह जानकारी दी।
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- फोटो : PTI
2024 में भारत ने अमेरिका को सिर्फ 8.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की यात्री कारें निर्यात कीं, जो भारत के कुल 6.98 अरब डॉलर के कार निर्यात का सिर्फ 0.13 प्रतिशत है। इसलिए, इस टैरिफ से भारत की कार एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को कोई महत्वपूर्ण झटका नहीं लगेगा।
इसी तरह, भारत ने अमेरिका को 12.5 मिलियन डॉलर के ट्रक निर्यात किए, जो भारत के कुल ट्रक निर्यात का मात्र 0.89 प्रतिशत था। इन आंकड़ों से साफ है कि अमेरिका के नए टैरिफ से भारत की वाहन निर्यात नीति पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
यह भी पढ़ें - ABS Bikes: भारत में मिलने वाली टॉप-5 सबसे किफायती ABS फीचर से लैस मोटरसाइकिलें, कीमत करीब एक लाख रुपये
इसी तरह, भारत ने अमेरिका को 12.5 मिलियन डॉलर के ट्रक निर्यात किए, जो भारत के कुल ट्रक निर्यात का मात्र 0.89 प्रतिशत था। इन आंकड़ों से साफ है कि अमेरिका के नए टैरिफ से भारत की वाहन निर्यात नीति पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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- फोटो : Adobe Stock
कहां पड़ सकता है असर?
कुछ हद तक असर कार चेसिस (इंजन लगे हुए) के निर्यात पर हो सकता है। 2024 में भारत ने अमेरिका को 28.2 मिलियन डॉलर मूल्य के कार चेसिस निर्यात किए थे, जो भारत के वैश्विक 246.9 मिलियन डॉलर के निर्यात का 11.4 प्रतिशत था। हालांकि, इस श्रेणी में भी जोखिम सीमित ही रहेगा।
ऑटो पार्ट्स सेक्टर को मिल सकता है फायदा
सबसे ज्यादा चर्चा ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ बढ़ने को लेकर हो रही है। 2024 में भारत ने अमेरिका को 2.2 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स निर्यात किए, जो उसके कुल वैश्विक ऑटो पार्ट्स निर्यात का 29.1 प्रतिशत था। पहली नजर में यह चिंताजनक लग सकता है, लेकिन गहराई से देखने पर पता चलता है कि सभी निर्यातक देशों को समान चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
अमेरिका ने 2023 में कुल 89 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स आयात किए थे। जिसमें मेक्सिको 36 अरब डॉलर, चीन 10.1 अरब डॉलर, और भारत सिर्फ 2.2 अरब डॉलर का योगदान दे रहा था। अब जब 25 प्रतिशत टैरिफ सभी देशों पर लागू होगा, तो प्रतिस्पर्धा के नियम समान हो जाएंगे।
यह भी पढ़ें - Electric Cars: भारत में जल्द लॉन्च होने वाली हैं ये इलेक्ट्रिक कारें, जानें बैटरी, ड्राइविंग रेंज जैसी अहम डिटेल्स
कुछ हद तक असर कार चेसिस (इंजन लगे हुए) के निर्यात पर हो सकता है। 2024 में भारत ने अमेरिका को 28.2 मिलियन डॉलर मूल्य के कार चेसिस निर्यात किए थे, जो भारत के वैश्विक 246.9 मिलियन डॉलर के निर्यात का 11.4 प्रतिशत था। हालांकि, इस श्रेणी में भी जोखिम सीमित ही रहेगा।
ऑटो पार्ट्स सेक्टर को मिल सकता है फायदा
सबसे ज्यादा चर्चा ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ बढ़ने को लेकर हो रही है। 2024 में भारत ने अमेरिका को 2.2 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स निर्यात किए, जो उसके कुल वैश्विक ऑटो पार्ट्स निर्यात का 29.1 प्रतिशत था। पहली नजर में यह चिंताजनक लग सकता है, लेकिन गहराई से देखने पर पता चलता है कि सभी निर्यातक देशों को समान चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
अमेरिका ने 2023 में कुल 89 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स आयात किए थे। जिसमें मेक्सिको 36 अरब डॉलर, चीन 10.1 अरब डॉलर, और भारत सिर्फ 2.2 अरब डॉलर का योगदान दे रहा था। अब जब 25 प्रतिशत टैरिफ सभी देशों पर लागू होगा, तो प्रतिस्पर्धा के नियम समान हो जाएंगे।
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भारत के लिए संभावनाएं
GTRI का मानना है कि भारत की कम लागत वाली उत्पादन क्षमता और अनुकूल आयात शुल्क ढांचा (0 से 7.5 प्रतिशत के बीच) इसे अमेरिका में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर दे सकता है। भारत को इस टैरिफ को चुनौती के बजाय संभावित अवसर के रूप में देखना चाहिए।
इसके बजाय, भारत सरकार को कोई प्रतिशोधी कदम उठाने की जरूरत नहीं है। बल्कि इसे एक तटस्थ या हल्का फायदेमंद अवसर मानना चाहिए।
यह भी पढ़ें - Porsche Taycan Facelift: पोर्शे टायकन फेसलिफ्ट RWD हुई लॉन्च, जानें कीमत, रेंज और फीचर्स
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इसके बजाय, भारत सरकार को कोई प्रतिशोधी कदम उठाने की जरूरत नहीं है। बल्कि इसे एक तटस्थ या हल्का फायदेमंद अवसर मानना चाहिए।
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आयात शुल्क में कटौती का खतरा
कुछ लोग भारत द्वारा अपने आयात शुल्क कम करने की संभावना पर विचार कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया ने 1980 के दशक में अपने ऑटो सेक्टर पर आयात शुल्क 45 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया था, जिसके कारण वहां की पूरी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री खत्म हो गई।
चूंकि भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर देश की विनिर्माण जीडीपी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, इसलिए इस क्षेत्र को स्थिर बनाए रखना बेहद जरूरी है। श्रीवास्तव का कहना है कि भारत को इसी तरह के किसी गलत कदम से बचना चाहिए।
कुल मिलाकर, सरकार को इस टैरिफ को अवसर के रूप में देखना चाहिए और कोई हड़बड़ी में कदम उठाने से बचना चाहिए।
यह भी पढ़ें - तूझे भूलना तो चाहा, लेकिन भुला न पाए!: भारत की मशहूर टू-स्ट्रोक बाइक्स, जानें क्या थी इनकी खूबियां
कुछ लोग भारत द्वारा अपने आयात शुल्क कम करने की संभावना पर विचार कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया ने 1980 के दशक में अपने ऑटो सेक्टर पर आयात शुल्क 45 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया था, जिसके कारण वहां की पूरी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री खत्म हो गई।
चूंकि भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर देश की विनिर्माण जीडीपी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, इसलिए इस क्षेत्र को स्थिर बनाए रखना बेहद जरूरी है। श्रीवास्तव का कहना है कि भारत को इसी तरह के किसी गलत कदम से बचना चाहिए।
कुल मिलाकर, सरकार को इस टैरिफ को अवसर के रूप में देखना चाहिए और कोई हड़बड़ी में कदम उठाने से बचना चाहिए।
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