साल 2018 में, जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर पहली बार डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख का असर दिखने लगा था, तब दुनिया का सबसे बड़ा कार बाजार, चीन अचानक सुस्त पड़ गया था। दशकों तक लगातार बढ़त के बाद चीन में कार बिक्री गिरने लगी, क्योंकि अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो गई। उस समय विदेशी कार कंपनियां, जिनकी बाजार हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत थी, सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं।
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Chinese Cars: क्या चीन का कार बाजार फिर सिकुड़ने जा रहा है? क्या दुनिया भर के कार निर्माताओं पर पड़ेगा असर?
Wed, 18 Feb 2026 06:59 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 18 Feb 2026 06:59 PM IST
सार
चीन में अभी जो बदलाव हो रहे हैं, उनका स्तर अभी भी पक्का नहीं है, लेकिन खतरे की घंटी बज रही है। 2021 में ग्रोथ वापस आने के बाद, पिछले साल कारों की सालाना बिक्री 2.38 करोड़ तक पहुंच गई, जो 2024 के मुकाबले करीब 4 प्रतिशत ज्यादा है।
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Dongfeng Motor Cars
- फोटो : Dongfeng Motor
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- फोटो : Geely
गिरावट के संकेत कितने गंभीर हैं?
चीन में मौजूदा गिरावट का पैमाना अभी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन चेतावनी के संकेत साफ दिख रहे हैं। 2021 में दोबारा ग्रोथ की राह पर लौटने के बाद, पिछले साल चीन में कारों की सालाना बिक्री 2.38 करोड़ यूनिट्स तक पहुंची, जो 2024 के मुकाबले करीब 4 प्रतिशत ज्यादा थी। यह आंकड़े चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन (CPCA) के हैं।
लेकिन साल की आखिरी तिमाही में हर महीने बिक्री पिछले साल से कम रही। CPCA को उम्मीद है कि इस साल बिक्री स्थिर रहेगी, मगर सभी इतने आशावादी नहीं हैं। ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन का अनुमान है कि बिक्री में 5 से 9 प्रतिशत तक गिरावट हो सकती है।
चीन में मौजूदा गिरावट का पैमाना अभी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन चेतावनी के संकेत साफ दिख रहे हैं। 2021 में दोबारा ग्रोथ की राह पर लौटने के बाद, पिछले साल चीन में कारों की सालाना बिक्री 2.38 करोड़ यूनिट्स तक पहुंची, जो 2024 के मुकाबले करीब 4 प्रतिशत ज्यादा थी। यह आंकड़े चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन (CPCA) के हैं।
लेकिन साल की आखिरी तिमाही में हर महीने बिक्री पिछले साल से कम रही। CPCA को उम्मीद है कि इस साल बिक्री स्थिर रहेगी, मगर सभी इतने आशावादी नहीं हैं। ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन का अनुमान है कि बिक्री में 5 से 9 प्रतिशत तक गिरावट हो सकती है।
Chery Arrizo 8
- फोटो : Chery
और कौन-से संकेत चिंता बढ़ा रहे हैं?
पिछले महीने चीन ऑटोमोबाइल निर्माता संघ ने अपना साप्ताहिक बिक्री डेटा जारी करने में देरी की, जिसे जानकार कमजोर आंकड़ों को लेकर बढ़ती बेचैनी का संकेत मान रहे हैं।
इसके अलावा, रिसर्च फर्म गावेकल का मानना है कि कई साल की तेज बढ़त के बाद इस साल ईवी की बिक्री में भी गिरावट देखी जा सकती है।
चीन के कार बाजार में सुस्ती क्यों आ रही है?
इस गिरावट के पीछे कई वजहें हैं। गावेकल के मुताबिक, 2024 के आखिर में पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर दी गई सब्सिडी के चलते ईवी की खरीद में तेज उछाल आया था। खासकर कंपनियों और सरकारी संस्थानों की तरफ से। लेकिन इस साल सब्सिडी कम होने से मांग पर दबाव पड़ेगा।
इसके अलावा, ईवी पर 5-10 प्रतिशत का नया खरीद टैक्स लगाया गया है। वहीं, डीलरों पर यह पाबंदी भी सख्त की गई है कि वे सिर्फ बिक्री आंकड़े बढ़ाने के लिए खुद गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन कर उन्हें "जीरो-माइल" सेकेंड-हैंड कार बताकर निर्यात न करें। इन सभी वजहों से बिक्री के आंकड़े प्रभावित हो रहे हैं।
पिछले महीने चीन ऑटोमोबाइल निर्माता संघ ने अपना साप्ताहिक बिक्री डेटा जारी करने में देरी की, जिसे जानकार कमजोर आंकड़ों को लेकर बढ़ती बेचैनी का संकेत मान रहे हैं।
इसके अलावा, रिसर्च फर्म गावेकल का मानना है कि कई साल की तेज बढ़त के बाद इस साल ईवी की बिक्री में भी गिरावट देखी जा सकती है।
चीन के कार बाजार में सुस्ती क्यों आ रही है?
इस गिरावट के पीछे कई वजहें हैं। गावेकल के मुताबिक, 2024 के आखिर में पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर दी गई सब्सिडी के चलते ईवी की खरीद में तेज उछाल आया था। खासकर कंपनियों और सरकारी संस्थानों की तरफ से। लेकिन इस साल सब्सिडी कम होने से मांग पर दबाव पड़ेगा।
इसके अलावा, ईवी पर 5-10 प्रतिशत का नया खरीद टैक्स लगाया गया है। वहीं, डीलरों पर यह पाबंदी भी सख्त की गई है कि वे सिर्फ बिक्री आंकड़े बढ़ाने के लिए खुद गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन कर उन्हें "जीरो-माइल" सेकेंड-हैंड कार बताकर निर्यात न करें। इन सभी वजहों से बिक्री के आंकड़े प्रभावित हो रहे हैं।
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BYD Cars
- फोटो : BYD
क्या कीमतों की जंग और तेज होगी?
जैसे-जैसे चीन का घरेलू बाजार सिकुड़ता है, वहां लंबे समय से चल रही प्राइस वॉर (कीमत की जंग) और तेज होने की आशंका है। अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के चलते कंपनियां पहले से ही भारी छूट दे रही हैं।
इसी को देखते हुए सरकार ने हाल ही में डिस्काउंट पर लगाम लगाने की कोशिश की है। 12 फरवरी को चीन की एंटीट्रस्ट अथॉरिटी ने नियम जारी कर कहा कि कंपनियां अब गाड़ियां निर्माण लागत से कम कीमत पर नहीं बेच सकेंगी। हालांकि, यह साफ नहीं है कि इन नियमों को कितनी सख्ती से लागू किया जाएगा। विदेशी कार कंपनियों को उम्मीद है कि यह पहल सफल होगी, क्योंकि वे चीनी ब्रांड्स से कीमत के मोर्चे पर मुकाबला नहीं कर पा रही हैं।
जैसे-जैसे चीन का घरेलू बाजार सिकुड़ता है, वहां लंबे समय से चल रही प्राइस वॉर (कीमत की जंग) और तेज होने की आशंका है। अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के चलते कंपनियां पहले से ही भारी छूट दे रही हैं।
इसी को देखते हुए सरकार ने हाल ही में डिस्काउंट पर लगाम लगाने की कोशिश की है। 12 फरवरी को चीन की एंटीट्रस्ट अथॉरिटी ने नियम जारी कर कहा कि कंपनियां अब गाड़ियां निर्माण लागत से कम कीमत पर नहीं बेच सकेंगी। हालांकि, यह साफ नहीं है कि इन नियमों को कितनी सख्ती से लागू किया जाएगा। विदेशी कार कंपनियों को उम्मीद है कि यह पहल सफल होगी, क्योंकि वे चीनी ब्रांड्स से कीमत के मोर्चे पर मुकाबला नहीं कर पा रही हैं।
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SAIC
- फोटो : SAIC
इसका असर बाकी दुनिया पर कैसे पड़ेगा?
विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन में मांग कमजोर होने का मतलब है कि वहां से वाहनों का निर्यात और बढ़ेगा। साइनो ऑटो इनसाइट्स के तू ली का कहना है कि चीनी कंपनियां पहले ही विदेशों में ज्यादा मुनाफे वाले बाजार तलाश रही हैं।
बर्नस्टीन का अनुमान है कि 2026 में चीन से वाहन निर्यात 10-15 प्रतिशत और बढ़कर 65-70 लाख यूनिट्स तक पहुंच सकता है। जबकि 2018 में यह आंकड़ा सिर्फ 7.5 लाख यूनिट्स था। इससे बाकी देशों की कार कंपनियों पर दबाव और बढ़ेगा। खासकर उन पर जिन्होंने चीनी ईवी निर्माताओं से मुकाबले के लिए भारी निवेश किए हैं।
आगे क्या उम्मीद की जा सकती है?
यह अभी साफ नहीं है कि चीन का कार बाजार कितने समय तक सुस्त रहेगा। लेकिन इतना तय है कि दुनिया की ऑटो इंडस्ट्री के लिए चीन की चाल बेहद अहम है। वहां होने वाला हर उतार-चढ़ाव वैश्विक कार उद्योग की दिशा तय करता है। और यह गिरावट भी उसी सच्चाई की एक और याद दिलाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन में मांग कमजोर होने का मतलब है कि वहां से वाहनों का निर्यात और बढ़ेगा। साइनो ऑटो इनसाइट्स के तू ली का कहना है कि चीनी कंपनियां पहले ही विदेशों में ज्यादा मुनाफे वाले बाजार तलाश रही हैं।
बर्नस्टीन का अनुमान है कि 2026 में चीन से वाहन निर्यात 10-15 प्रतिशत और बढ़कर 65-70 लाख यूनिट्स तक पहुंच सकता है। जबकि 2018 में यह आंकड़ा सिर्फ 7.5 लाख यूनिट्स था। इससे बाकी देशों की कार कंपनियों पर दबाव और बढ़ेगा। खासकर उन पर जिन्होंने चीनी ईवी निर्माताओं से मुकाबले के लिए भारी निवेश किए हैं।
आगे क्या उम्मीद की जा सकती है?
यह अभी साफ नहीं है कि चीन का कार बाजार कितने समय तक सुस्त रहेगा। लेकिन इतना तय है कि दुनिया की ऑटो इंडस्ट्री के लिए चीन की चाल बेहद अहम है। वहां होने वाला हर उतार-चढ़ाव वैश्विक कार उद्योग की दिशा तय करता है। और यह गिरावट भी उसी सच्चाई की एक और याद दिलाती है।