अधिकांश पेट्रोल और डीजल कारों के लिए 70–90 किमी/घंटा की रफ्तार सबसे संतुलित मानी जाती है। इस स्पीड पर इंजन टॉप गियर में बिना ज्यादा दबाव के काम करता है और फ्यूल की खपत कंट्रोल में रहती है।
कितनी होनी चाहिए स्पीड?
माइलेज को लेकर अक्सर ड्राइवरों में भ्रम रहता है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कुछ और ही मानना है, इनके अनुसार:
- हाईवे का स्वीट स्पॉट: अधिकांश कारों के लिए 70 से 80 किमी/घंटा की रफ्तार सबसे किफायती है। इस स्पीड पर इंजन टॉप गियर में होता है और हवा का दबाव (Aerodynamic Drag) भी नियंत्रण में रहता है।
- शहर की ड्राइविंग: ट्रैफिक में 40-50 किमी/घंटा की स्थिर गति सबसे बेहतर है। यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि गियर और स्पीड का तालमेल सही रहे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : freepik
किन गलतियों से घटता है माइलेज?
- ओवरस्पीडिंग और एयर ड्रैग: जब आप कार को 100 किमी/घंटा से ऊपर ले जाते हैं, तो हवा का प्रतिरोध बढ़ जाता है। इसे काटने के लिए इंजन को ज्यादा ईंधन जलाना पड़ता है।
- गलत गियर का चुनाव: कम स्पीड पर ऊंचे गियर में गाड़ी खींचना या हाई स्पीड पर छोटे गियर में चलाना, दोनों ही स्थितियां इंजन पर अनावश्यक दबाव डालती हैं।
- अचानक एक्सीलरेशन: रैश ड्राइविंग या बार-बार ब्रेक लगाने से ईंधन की बर्बादी सीधे तौर पर बढ़ जाती है। ये कुछ आदतें है जो इंजन पर दबाव बढ़ाता है और फ्यूल तेजी से खर्च होता है।
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माइलेज बढ़ाने के स्मार्ट हैक्स
- टायर प्रेशर का ध्यान: टायरों में हवा कम होने पर घर्षण (Friction) बढ़ता है, जिससे इंजन को जोर लगाना पड़ता है। इसलिए हमेशा कंपनी की ओर से बताए गए पीएसआई (पाउंड प्रति वर्ग इंच) पर ही हवा रखें।
- क्रूज कंट्रोल का जादू: अगर आप हाइवे पर हैं, तो क्रूज कंट्रोल ऑन करें। ये एक समान गति बनाए रखता है, जिससे फ्यूल की बड़ी बचत होती है।
- एसी बनाम खिड़कियां: हाइवे पर तेज रफ्तार में खिड़कियां खोलना माइलेज कम करता है क्योंकि हवा कार को पीछे धकेलती है। ऐसे में एसी चलाना ज्यादा किफायती साबित हो सकता है, लेकिन शहर में कम स्पीड पर एसी बंद कर खिड़कियां खोलना बेहतर है।