{"_id":"68e3a37b53e110866e051d2f","slug":"car-brands-left-indian-market-ford-fiat-chevrolet-mitsubishi-datsun-details-2025-10-06","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Car Companies: भारत से गायब हो गईं ये मशहूर कार कंपनियां! एक के तो वापस आने की भी है चर्चा","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
Car Companies: भारत से गायब हो गईं ये मशहूर कार कंपनियां! एक के तो वापस आने की भी है चर्चा
Mon, 06 Oct 2025 04:40 PM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Mon, 06 Oct 2025 04:40 PM IST
सार
Car Brands Discontinued From India: भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, जहां करीब 40 लाख कारें हर साल बेंची जाती हैं। मगर कड़ी प्रतिस्पर्धा और बदलते नियमों के चलते कई दिग्गज कंपनियों ने भारतीय मार्केट को अलविदा कह दिया है।
विज्ञापन
भारत को इन कार कंपनियों ने कहा अलविदा
- फोटो : AI
अगर सेल्स के आंकड़ों को देखें तो भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है। देश में यूटिलिटी व्हीकल्स (UV) और हैटबैक कारों का काफी जलवा है। भारत की कुछ प्रमुख कार निर्माता कंपनियों की बात की जाए तो इनमें मारुति सुजुकी, महिंद्रा, टाटा मोटर्स, टोयोटा और होंडा की कारों का दबदबा है। ये कंपनियां ही देश में सबसे ज्यादा कारें बेच रही हैं और इसी वजह से ये कंपनियां मुनाफे में हैं।
Ford Ecosport
- फोटो : Ford
1. आज भी दिल से नहीं निकल पाई है Ford
अमेरिकी कार निर्माता फोर्ड की कारों को लोग दमदार बिल्ड क्वालिटी और इंजन परफॉर्मेंस के लिए खूब पसंद करते थे। फोर्ड ही वहीं कार निर्माता थी जिसने EcoSport की लॉन्च के साथ भारत में कॉम्पैक्ट एसयूवी का चलन शुरू किया था। आज भी ये कार कहीं न कहीं जरूर दिख जाएगी। लग्जरी सेगमेंट में फोर्ड एंडेवर (Ford Endeavor), तो हैचबैक सेगमेंट में फोर्ड फिगो (Ford Figo) जैसी गाड़ियों को लोग खूब पसंद कर रहे थे। देश में फोर्ड का विस्तृत सेल्स और सर्विस नेटवर्क भी मौजूद था, लेकिन टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी कंपनियों से फोर्ड को कड़ी टक्कर मिल रही थी। वजह थी कि कंपनी भारत में नई कारें लाने में काफी देर कर रही थी, जिसके चलते कंपनी की मौजूदा कारें आउटडेट हो चुकी थीं। वहीं, ग्राहकों को मारुति, टाटा और महिंद्रा से बेहतर कारें मिलने से फोर्ड की सेल्स तेजी से गिर रही थी। कुछ रिपोर्ट्स बताते हैं कि भारत में फोर्ड का घाटा 2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, जिस वजह से कंपनी को अपना इंडियन ऑपरेशन सितंबर 2021 में पूरी तरह बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा। कुछ रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि इसके पीछे कंपनी की इंटरनल मिसमैनेजमेंट का हाथ था। वहीं, अब यह भी चर्चा होने लगी है कि कंपनी मास मार्केट कारों के साथ बाजार में दोबारा कदम रख सकती है। हालांकि, फोर्ड के प्लांट्स अब टाटा के पास हैं।
अमेरिकी कार निर्माता फोर्ड की कारों को लोग दमदार बिल्ड क्वालिटी और इंजन परफॉर्मेंस के लिए खूब पसंद करते थे। फोर्ड ही वहीं कार निर्माता थी जिसने EcoSport की लॉन्च के साथ भारत में कॉम्पैक्ट एसयूवी का चलन शुरू किया था। आज भी ये कार कहीं न कहीं जरूर दिख जाएगी। लग्जरी सेगमेंट में फोर्ड एंडेवर (Ford Endeavor), तो हैचबैक सेगमेंट में फोर्ड फिगो (Ford Figo) जैसी गाड़ियों को लोग खूब पसंद कर रहे थे। देश में फोर्ड का विस्तृत सेल्स और सर्विस नेटवर्क भी मौजूद था, लेकिन टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी कंपनियों से फोर्ड को कड़ी टक्कर मिल रही थी। वजह थी कि कंपनी भारत में नई कारें लाने में काफी देर कर रही थी, जिसके चलते कंपनी की मौजूदा कारें आउटडेट हो चुकी थीं। वहीं, ग्राहकों को मारुति, टाटा और महिंद्रा से बेहतर कारें मिलने से फोर्ड की सेल्स तेजी से गिर रही थी। कुछ रिपोर्ट्स बताते हैं कि भारत में फोर्ड का घाटा 2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, जिस वजह से कंपनी को अपना इंडियन ऑपरेशन सितंबर 2021 में पूरी तरह बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा। कुछ रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि इसके पीछे कंपनी की इंटरनल मिसमैनेजमेंट का हाथ था। वहीं, अब यह भी चर्चा होने लगी है कि कंपनी मास मार्केट कारों के साथ बाजार में दोबारा कदम रख सकती है। हालांकि, फोर्ड के प्लांट्स अब टाटा के पास हैं।
Fiat Punto
- फोटो : Fiat
2. Fiat जो बनाती थी "नेशनल इंजन"
भारत में फिएट का सफर साल 1996 में पहली कार की लॉन्च के साथ शुरू हुआ था। कंपनी ने भारतीय ग्राहकों को Punto, Avventura, Urban Cross और Linea जैसी कई कारें दीं। हालांकि, कंपनी देश में बदलते एमिशन नॉर्म्स (उत्सर्जन नियमों) के चलते कार बाजार में अपनी रेस जारी नहीं रख पाई। फिएट अपने लिए प्रोडक्शन करने के अलावा, देश में मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, शेव्रोले समेत कई कंपनियों के लिए इंजन बनाती और एक्सपोर्ट भी करती थी। कंपनी की भारत में बनने वाले 1.3-लीटर मल्टीजेट डीलज इंजन को "नेशनल इंजन" कहा जाता था। यह इंजन 24 से ज्यादा कारों को पावर दे रहा था। हालांकि, देश में बीएस-6 एमिशन नॉर्म्स के लागू होते ही कई कंपनियों ने डीजल मॉडल ही बंद कर दिए या इंजन अपग्रेडेशन के खर्च से बचने के लिए खुद के इंजन पर काम शुरू कर दिया। इससे कंपनी के लिए ऑपरेशंस को चालू रखना घाटे का सौदा साबित होने लगा और आखिरकार कंपनी ने 2019 में भारतीय कार मार्केट को अलविदा कह दिया।
भारत में फिएट का सफर साल 1996 में पहली कार की लॉन्च के साथ शुरू हुआ था। कंपनी ने भारतीय ग्राहकों को Punto, Avventura, Urban Cross और Linea जैसी कई कारें दीं। हालांकि, कंपनी देश में बदलते एमिशन नॉर्म्स (उत्सर्जन नियमों) के चलते कार बाजार में अपनी रेस जारी नहीं रख पाई। फिएट अपने लिए प्रोडक्शन करने के अलावा, देश में मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, शेव्रोले समेत कई कंपनियों के लिए इंजन बनाती और एक्सपोर्ट भी करती थी। कंपनी की भारत में बनने वाले 1.3-लीटर मल्टीजेट डीलज इंजन को "नेशनल इंजन" कहा जाता था। यह इंजन 24 से ज्यादा कारों को पावर दे रहा था। हालांकि, देश में बीएस-6 एमिशन नॉर्म्स के लागू होते ही कई कंपनियों ने डीजल मॉडल ही बंद कर दिए या इंजन अपग्रेडेशन के खर्च से बचने के लिए खुद के इंजन पर काम शुरू कर दिया। इससे कंपनी के लिए ऑपरेशंस को चालू रखना घाटे का सौदा साबित होने लगा और आखिरकार कंपनी ने 2019 में भारतीय कार मार्केट को अलविदा कह दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Chevrolet Spark
- फोटो : Chevrolet
3. अर्श से फर्श पर आई Chevrolet
General Motors की सिस्टर ब्रांड शेव्रोले (Chevrolet) भारत में Tavera, Cruze, Spark और Beat जैसी लोकप्रिय गाड़ियां बेचती थी। कंपनी की फैक्ट्रियां पुणे और गुजरात में थीं। मारुति और हुंडई जैसी कंपनियों की किफायती और माइलेज वाली कारों के आगे शेव्रोले ने घुटने टेक दिए। रही सही कसर एमिशन नॉर्म्स ने पूरी कर दी जिसके वजह से कंपनियों के लिए गाड़ियों के अपग्रेड करना महंगा हो गया। कारें न बिकने के वजह से शेव्रोले का घाटा इतना बढ़ने लगा कि कंपनी ने भारत से रुखसती ले ली।
General Motors की सिस्टर ब्रांड शेव्रोले (Chevrolet) भारत में Tavera, Cruze, Spark और Beat जैसी लोकप्रिय गाड़ियां बेचती थी। कंपनी की फैक्ट्रियां पुणे और गुजरात में थीं। मारुति और हुंडई जैसी कंपनियों की किफायती और माइलेज वाली कारों के आगे शेव्रोले ने घुटने टेक दिए। रही सही कसर एमिशन नॉर्म्स ने पूरी कर दी जिसके वजह से कंपनियों के लिए गाड़ियों के अपग्रेड करना महंगा हो गया। कारें न बिकने के वजह से शेव्रोले का घाटा इतना बढ़ने लगा कि कंपनी ने भारत से रुखसती ले ली।
विज्ञापन
Mitsubishi Pajero
- फोटो : Mitsubishi
4. Mitsubishi पर निर्भरता पड़ी भारी
जापानी कार ब्रांड Mitsubishi ने भारत में साल 1998 में Lancer लॉन्च की थी। शानदार परफॉर्मेंस के चलते युवाओं के बीच इस कार को खरीदने का क्रेज था। कंपनी में भारत में प्रीमियम एसयूवी की लोकप्रियता को देखते हुए बाद में Pajero को लॉन्च किया था जो काफी लोकप्रिय हुई थी। लेकिन कंपनी प्रोडक्शन के लिए पूरी तरह Hindustan Motors पर निर्भर थी, जो उसके लिए कारें बनाती थी। भारत में हिंदुस्तान मोटर्स मित्सुबीशी का बिजनेस हैंडल करती थी, लेकिन जब हिंदुस्तान मोटर्स खुद खस्ताहाल हो गई तो उसने प्रोडक्शन बंद कर दिया। इससे भारत में Mitsubishi का आफ्टरसेल्स नेटवर्क बिखर गया और कंपनी को मार्केट से बाहर होना पड़ा।
जापानी कार ब्रांड Mitsubishi ने भारत में साल 1998 में Lancer लॉन्च की थी। शानदार परफॉर्मेंस के चलते युवाओं के बीच इस कार को खरीदने का क्रेज था। कंपनी में भारत में प्रीमियम एसयूवी की लोकप्रियता को देखते हुए बाद में Pajero को लॉन्च किया था जो काफी लोकप्रिय हुई थी। लेकिन कंपनी प्रोडक्शन के लिए पूरी तरह Hindustan Motors पर निर्भर थी, जो उसके लिए कारें बनाती थी। भारत में हिंदुस्तान मोटर्स मित्सुबीशी का बिजनेस हैंडल करती थी, लेकिन जब हिंदुस्तान मोटर्स खुद खस्ताहाल हो गई तो उसने प्रोडक्शन बंद कर दिया। इससे भारत में Mitsubishi का आफ्टरसेल्स नेटवर्क बिखर गया और कंपनी को मार्केट से बाहर होना पड़ा।