फॉक्सवैगन की हैचबैक बीटल कार को ‘आम आदमी की कार’ कहा जाता है। वहीं दुनिया को विश्व युद्ध के दलदल में धकेलने वाले जर्मनी के तानाशाह अडोल्फ हिटलर का इस कार से गहरा नाता रहा है। वहीं फॉक्सवैगन कंपनी की यह कार अब हिटलर की तरह इतिहास का पन्ना हो जाएगी। कंपनी ने 81 साल बाद इस हफ्ते से इस कार आखिरी मॉडल को बंद करने का एलान किया है।
81 साल बाद इतिहास बनी तानाशाह हिटलर की ड्रीम कार, दूसरे विश्व युद्ध में लिया था हिस्सा
27 मई 1938 में पहली बार इस कार का प्रोडक्शन
पिछले साल भी फॉक्सवैगन ने 13 सितंबर 2018 से इस कार का प्रोडक्शन बंद करने का एलान किया था। 27 मई 1938 में पहली बार इस कार का प्रोडक्शन शुरू किया गया था। जब यह कार बनी थी, तो हिचलर को कार बेहद पसंद आई थी। हिटलर की इच्छा थी कि इस कार को जर्मनी का निजी परिवहन बनाया जाए, जैसा अमेरिका में फोर्ड मॉडल टी के साथ हुआ था।
हिटलर करता था पसंद
फर्डिनांड पोर्श की डिजाइन की हुई 5 सीटर बीटल कार बाद में पीपुल्स कार में तब्दील हो गई। हिटलर को एक ऐसी कार चाहिये थी जिसे 100 किमी की रफ्तार से दौड़ाया जा सके और इसमें चार लोगों के बैठने की सुविधा उपलब्ध हो। शुरुआत में इस कार का इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सेना के कामों में किया गया। युद्ध के बाद मेजर इवान हिर्स्ट के प्रयासों से यह कंपनी ब्रिटिश हाथों में चली गई और इसका इस्तेमाल सिविलयंस के लिये होने लगा।
1950 के दशक में अमेरिका में लॉन्च
दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने के बाद मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी को आर्थिक तंगी से बाहर निकालने के लिये फॉक्सवैगन की इस कार को 1950 के दशक में अमेरिका में लॉन्च किया। पहले साल केवल दो बीटल कारें ही बिकीं। 1960 के दशक में यह कार अमेरिका में इतनी पॉपुलर हुई कि 1968 में कार के कुल उत्पादन का 40 फीसदी हिस्सा यानी 5.63 लाख कारें बिकीं। उस समय इस कार को लेकर एडवरटाइजिंग एजेंसी डोयले डाने ने इस कार की बिक्री बढ़ाने के लिये ‘थिंक स्माल’ का स्लोगन दिया। वहीं इस कार के ऊपर 1968 में डिज्नी ने एक फिल्म 'दी लव बग' भी बनाई, जिससे इस कार को काफी लाकप्रियता हासिल हुई। फिल्म में एक ऐसी फॉक्सवैगन कार की कहानी थी जो खुद सोच सकती थी।
शुरुआती नाम फॉक्सवैगन टाइप 1
शुरुआत में इस कार का नाम बीटल नहीं था, इसे फॉक्सवैगन टाइप 1 के नाम से जाना जाता था। लेकिन 1960 में बीटल कीड़े की तरह दिखने वाली इस कार का नाम बीटल रखा गया। वहीं फ्रांस में इसे कोकिनेला (लेडीबग), इटली और ब्राजील में फुस्का, मैक्सिको में वोको, बोल्विया में पेटा (टर्टल) और इंडोनेशिया में कोडक (मेंढक) नाम रखा गया।