कार, बाइक या किसी भी वाहन की खरीदारी से पहले आपने Ex-Showroom और On-Road प्राइस के बारे में सुना होगा। आप यह भी जानना चाहते होंगे कि वाहन खरीदने पर आखिर क्यों इसकी कीमत बढ़ जाती है। यहां हम आपके बताने वाले है कि वाहन घर ले जाने से पहले आपसे क्या-क्या चार्ज लिए जाते हैं।
1. पहली बात तो यह समझिए कि किसी भी कंपनी के डीलर उस कंपनी के कर्मचारी नहीं होते। डीलरशिप को पहले फैक्ट्री से उस कार को खरीदना पड़ता है। डीलर को उस कार की कीमत जो भी चुकानी पड़ती है उसे Ex Factory Price कहते हैं।
2. इसके बाद डीलरशिप या शोरूम पर किसी ट्रक या अन्य जरिए से लाया जाता कार को है। शोरूम पर जब कार होती है उस समय उसकी कीमत Ex-Showroom Price कहलाती है। ग्राहकों को Ex Factory Price से कुछ लेना-देना नहीं होता है। उनका संबंध एक्स-शोरूम प्राइस से होता है।
3. भारत में यह नियम है कि कार शोरूम से ले जाने से पहले ही इसका Insurance जरूरी है। इसलिए कार खरीदते समय की इसका इंश्योरेंस भी कराना होता है। कुछ डीलर पार्किंग चार्जेज भी वसूलते हैं। हालांकि ऐसा सब जगहों पर नहीं है।
4. अगर कार की कीमत 10 लाख से ज्यादा है तो आपको TCS (Tax Collection at Source) चुकाना पड़ता है। हालांकि यह चार्ज रिफंड भी हो सकता है। यह 1% लगता है।