Mileage Tips: इंजन ऑयल से बढ़ता है कार या बाइक की माइलेज, ऐसे चुनें सही ऑयल
मिनरल इंजन ऑयल
दरअसल ये एक परिष्कृत पेट्रोलियम ऑयल होता है और विस्तृत तापमान में काम कर सकता है। बाजार में आने वाली ज्यादातर कारों और बाइक्स में मिनरल इंजन ऑयल का इस्तेमाल होता है। यह न सिर्फ बेहद सस्ते होते हैं बल्कि फ्रिक्शन से पैदा होने वाली गर्मी से सुरक्षा के लिए पर्याप्त लुब्रिकेशन और प्रोटेक्शन भी देते हैं। वहीं यह सामान्य तापमान में बेहतर काम करते हैं, अगर तापमान ज्यादा ठंडा या ज्यादा गर्म हो तो यह बेअसर हो जाते हैं। यह सेमी-सिंथेटिक या फुली सिंथेटिक ऑयल की तुलना में सस्ता होता है।
सेमी-सिंथेटिक ऑयल
जैसा कि इसके नाम से साफ है कि यह मिनरल और फुली-सिंथेटिक के बीच का इंजन ऑयल है, जिसमें सिंथेटिक ऑयल की थोड़ी मात्रा मिनरल ऑयल में मिलाई जाती है। जिससे कीमत में बिना कोई बढ़ोतरी हुए ऑयल की गुणवत्ता बढ़ जाती है। यह ऑयल कम तापमान में भी बेहतरीन चिपचिपाहट देता है, वहीं उच्च तापमान में अच्छा प्रतिरोध देता है। वहीं सेमी-सिंथेटिक इंजन ऑयल मिनरल ऑयल से अच्छा होता है, लेकिन फुली सिंथेटिक ऑयल से बेहतर नहीं है।
फुली-सिंथेटिक ऑयल
फुली-सिंथेटिक इंजन ऑयल्स को बेहतरीन लुब्रिकेशन के लिए जाना जाता है, वहीं इनकी पररफॉरमेंस भी शानदार होती है। वहीं फुली सिंथेटिक इंजन ऑयल वाले वाहन ज्यादा माइलेज भी देते हैं। जहां मिनरल ऑयल को मूल अणुओं में तोड़ कर उसकी अशुद्धियों को बाहर निकाल दिया जाता है। वहीं फुली सिंथेटिक ऑयल में खास अणु होते हैं, जो बेहतर लुब्रिकेशन देते हैं। यह ऑयल अधिकतम और न्यूनतम तापमान पर भी बेहतरीन कार्य करता है। लेकिन इस ऑयल को बनाना महंगा पड़ता है, जिसके चलते ये बाकी दोनों से महंगा है।
इसके अलावा बाजार में कुछ और तरह के भी इंजन ऑयल मिलते हैं, जिनकी विस्कोसिटी (चिपचिपाहट) ग्रेड से उनकी परफॉरमेंस के बारे में पता लगाया जा सकता है। कम विस्कोसिटी यानी कि यह पतला होगा और इंजन में तेजी से जगह बना सकता है। वहीं ज्यादा विस्कोसिटी का मतलब है ज्यादा मोटा या भारी, वहीं यह इंजन में धीरे-धीरे जगह बनाएगा। वहीं इसमें इंजन के पुर्जो की सुरक्षा के लिए एक खास सुरक्षा लेयर भी होती है।