अंबेसडर कार के चाहने वालों के लिए खुशखबरी। 2020 के अंत तक यह गाड़ी एक बार फिर से भारत की सड़कों पर वापसी करने जा रही है। 1958 से देश के बड़े राजनेताओं, उद्योगपतियों और सरकार की सबसे पसंदीदा गाड़ी 2014 में बिकना बंद हो गई थी। लेकिन अब इसका उत्पादन फिर से शुरू होने जा रहा है।
मेक इन इंडिया के तहत बनी थी पहली कार
मेक इन इंडिया के तहत बनने वाली देश की पहली कार अंबेसडर का उत्पादन कोलकाता में हिंदुस्तान मोटर कंपनी ने शुरू किया था। अपने आकार-प्रकार, बैठने की आरामदेह व्यवस्था और किसी भी सड़क पर चलने के माकूल होने की वजह से यह हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन गई थी।
सत्ता की थी प्रतीक
कोलकाता स्थित हिंदुस्तान मोटर कंपनी ने काले रंग की पहली अंबेसडर कार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट की थी और उसके बाद ही यह नई दिल्ली के लुटियन्स जोन में सत्ता राजनीति और नौकरशाही का अधिकृत वाहन बन गई थी। पंखे, पर्दे और लाल-नीली बत्तियों से सुसज्जित अंबेसडर में बैठना कुछ दशक पहले तक भी लोगों की महत्वाकांक्षाओं में शामिल था, तो इसलिए कि तब यह सरकारी अधिकारियों का इकलौता वाहन थी।
सात जेनरेशन तक का सफर
1958 में जब अंबेसडर का उत्पादन शुरू हुआ था, तब से लेकर 2014 तक 7 बार इंजन में बदलाव किया गया। लेकिन इसके डिजाइन, आकार व फीचर्स में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया था। इस वजह से विदेशी कारों के बढ़िया मॉडल आने के बाद लोगों की रूचि कम होती गई और फिर इसका उत्पादन ही बंद कर दिया गया।
नए लुक में आएगी अंबेसडर कार
अंबेसडर कार बनाने वाली कंपनी के मालिक सीके बिरला ग्रुप और फ्रांस की कंपनी पीएसए ग्रुप ने ज्वाइंट वेंचर के तहत फिर से इसे लॉन्च करने का निर्णय लिया है। दोनों कंपनियां अंबेसडर को एक नए लुक में लॉन्च करेंगी। अबकी बार अंबेसडर ब्रांड को एक सेडान के तौर पर लॉन्च किया जाएगा। इसके अलावा कंपनी हैचबैक और एसयूवी को भी मार्केट में निकालेगी। सीके बिरला ग्रुप ने हाल ही में अंबेसडर कार के प्लांट में 700 करोड़ का निवेश किया है।