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Apple Electric Car: एपल ने अपनी नाकाम कार परियोजना पर पानी की तरह बहाया पैसा, 10 अरब डॉलर खर्च का अनुमान

Fri, 01 Mar 2024 05:19 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 01 Mar 2024 05:19 PM IST
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Apple may have spent in excess of 10 billion dollars on its shelved Electric Car Project Titan
Apple Electric Car - फोटो : For Refernce Only
दुनिया भर में Apple (एपल) के चाहनेवालों को इस हफ्ते की शुरुआत में उस समय झटका लगा, जब अमेरिकी मीडिया में कई रिपोर्ट्स सामने आईं, जिनमें कहा गया था कि टेक दिग्गज ने अपने बहुचर्चित प्रोजेक्ट टाइटन पर काम रोक दिया है। प्रोजेक्ट टाइटन एक बेहद गोपनीय प्रोजेक्ट था, जो मूल रूप से iPhone निर्माता द्वारा एक इलेक्ट्रिक कार पर काम कर रहा था। लेकिन जबकि एपल ने न तो पुष्टि की है और न ही इस बात से इनकार किया है कि क्या प्रोजेक्ट टाइटन को रोक दिया गया है। अब यह बताया जा रहा है कि कंपनी ने इस पर 10 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं।
Apple may have spent in excess of 10 billion dollars on its shelved Electric Car Project Titan
For Reference Only - फोटो : सोशल मीडिया
एपल अपने इलेक्ट्रिक कार प्रोजेक्ट पर एक दशक से भी ज्यादा समय से काम कर रही थी। लेकिन यह कभी भी आसान रास्ता नहीं था। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, एपल शुरू में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की दुनिया में Tesla (टेस्ला) के दबदबे को चुनौती देना चाहती थी। ऐसी भी अफवाहें थीं कि एपल टेस्ला को खरीदना चाहती है और एलन मस्क के साथ बातचीत कर रही है। इसके बाद उसने सेल्फ-ड्राइविंग कार के साथ संभावित रूप से Waymo (वेमो) को टक्कर देने के लिए अपना रुख बदल दिया। इससे पहले कि वह एक बार फिर से ईवी विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करे। और पोर्शे और नासा जैसे संगठनों के कर्मचारियों को काम पर रखने के बावजूद, दिक्कतें बनी रहीं।
Apple may have spent in excess of 10 billion dollars on its shelved Electric Car Project Titan
Apple Electric Car - फोटो : For Reference Only
यह बताया गया है कि उस समय लगभग 2,000 लोग प्रोजेक्ट टाइटन से जुड़े थे, जब एपल ने कथित तौर पर वाहन की योजना को छोड़ने का फैसला किया। अटकलें तेज हैं कि काम रोकने का एक मुख्य कारण दुनिया भर में चुनौतीपूर्ण आर्थिक स्थिति हो सकती है, जिसके कारण ईवी की मांग में गिरावट आई है। ऐसे समय में जब टेस्ला, रेनो, फॉक्सवैगन और अन्य वाहन निर्माता ज्यादा किफायती ईवी बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, तो लागत कारक भी बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। क्योंकि अगर जब यह कभी लॉन्च की जाती तो एपल कार की कीमत 100,000 डॉलर से कम होने की संभावना नहीं थी।
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Apple may have spent in excess of 10 billion dollars on its shelved Electric Car Project Titan
Apple Car Concept - फोटो : Vanarama
फिर एपल कार में ऐसे फीचर्स देने का भारी बोझ था जो किसी भी प्रतिद्वंद्वी द्वारा पेश की जाने वाली किसी भी चीज से बिल्कुल अलग थीं। एक सनरूफ जो गाड़ी के केबिन में प्रवेश करने वाली सूरज की किरणों से गर्मी कम करता है और एक विंडशील्ड जो दिशा दिखाता है, ये कुछ फीचर हाइलाइट थे जिन पर काम किया जा रहा था। और भले ही एपल कार स्क्रीन के अंदर कारप्ले सिस्टम को बनाने में बड़ा दांव लगाना जारी रखे हुए है। इसकी बहुत कम संभावना है कि कुछ अत्याधुनिक तकनीक जिन पर काम किया जा रहा था, उन्हें आगे साझा किया जाएगा।
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