वास्तुशास्त्र के अनुसार जीवन में तरक्की व खुशहाली बनाए रखने के लिए कई सरल उपाय बताए गए हैं। जिससे आपके घर, जीवन और कार्यक्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर जाती है। वास्तु की मानें तो दिशाओं का ध्यान रख और कुछ नियमों का पालन कर कई प्रकार की समस्याओं से बचा जा सकता है।
भूलकर भी न करें दिशाओं की अनदेखी, घर में खुशहाली लाएंगी वास्तु की यह बातें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ईशान कोण को रखें साफ़-सुथरा
वास्तुशास्त्र के अनुसार उत्तर-पूर्व यानि ईशानकोण को ईश की दिशा मानी गई है।इस दिशा का संबंध जल तत्व से है। इस दिशा को सदैव हल्का और पवित्र रखना चाहिए,ऐसा नहीं होने पर परिवार में शारीरिक और मानसिक अशांति बनी रहती है।
पूर्व में खुली रखें खिड़कियां
पूर्व दिशा को वास्तु में सूर्य की दिशा मानी गई है। इस दिशा को अधिकाधिक खुला रखें क्योंकि यही से सुबह की धूप घर में अंदर आती है। सुबह के सूरज की पैरा बैंगनी किरणें रात्रि के समय उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म जीवाणुओं को खत्म करके घर को ऊर्जावान और सकारात्मक बनाएं रखती हैं। इस दिशा को बंद रखने से जीवन में तरक्की के नए अवसर प्राप्त नहीं होते।
आग्नेय कोण हो ऐसा
वास्तु में दक्षिण-पूर्व दिशा को अग्निकोण माना गया है एवं इस दिशा के स्वामी अग्नि देवता हैं। इस दिशा में अग्नि तत्व से सम्बंधित वस्तुएं जैसे विद्युत उपकरण एवं गैस चूल्हा रखना शुभ माना गया है। भूलकर भी इस दिशा में जल स्रोत न बनाएं।
यश और प्रसिद्धि की दक्षिण दिशा के स्वामी यम हैं। इस दिशा को खुला न रखें एवं इस दिशा की दीवारें अपेक्षाकृत मोटी और ऊँची रखना शुभ माना जाता है।