Retrograde Mars Effect on Zodiac Signs: वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को सेनापति का दर्जा दिया गया है। मंगल जन्मकुंडली में तीसरे, छठे और दशम भाव के कारक भी माने गए है। मंगल को लग्न और अष्टम भाव का आधिपत्य दिया गया है। व्यक्ति की ऊर्जा, साहस और पराक्रम का विचार मंगल से ही किया जाता है। तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में मंगल देव जातक को करोड़पति भी बनाते हुए देखे गए है। मंगल ग्रह भूमि के साथ-साथ इंजीनियरिंग का कारक भी कहा गया है। किसी भी व्यक्ति को भूमि और संपत्ति का सुख बिना मंगल की कृपा के नहीं मिलता है। मंगल देव 13 नवंबर को वक्री अवस्था में ही वृष राशि में प्रवेश कर रहे है। उनके इस गोचर से 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा आइए समझते हैं।
Vakri Mangal: 13 नवंबर को वक्री मंगल का वृष राशि में प्रवेश ! 12 राशियों पर क्या होगा प्रभाव ?
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मेष राशि- इस राशि के जातकों के लिए मंगल लग्न के साथ ही अष्टम भाव के स्वामी होते है। मंगल अपनी वक्री अवस्था में आपके दूसरे भाव यानी वाणी और कुटुंब भाव से गोचर करेंगे। मंगल की दृष्टि आपके पंचम, अष्टम और नवम भाव पर जा रही है। अष्टम भाव में आपके लिए शुक्र का गोचर पहले से ही हो रहा है। इस गोचर काल में आपकी वाणी में कुछ कड़वापन आ सकता है। इस समय आपकी वाणी की कटुता से परिवार में कोई विवाद जन्म ले सकता है। आपको अचानक से कोई बड़ी धन हानि हो सकती है। स्त्री वर्ग पर धन खर्च होने के योग है। पढ़ाई कर रहे जातकों को कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। अपने प्रेमी से अनबन हो सकती है। पिता से मतभेद को टालना होगा।
वृष राशि- इस राशि के जातकों के लिए मंगल सप्तम और द्वादश भाव के स्वामी होते हैं। मंगल अपनी वक्री अवस्था में आपके लग्न में ही गोचर करेंगे। मंगल की दृष्टि चौथे, छठे और सप्तम भाव पर जा रही है। सप्तम में विराजमान शुक्र पर मंगल की पूर्ण सप्तम दृष्टि है। वक्री मंगल का लग्न में गोचर स्वास्थ्य के नजरिये से थोड़ा नुकसानदायक हो सकता है। इस समय आपकी ऊर्जा में थोड़ी कमी देखी जा सकती है। इस अवधि में थोड़ा मानसिक तनाव भी हो सकता है। अपनी मां की सेहत का ध्यान रखना होगा। नौकरी में बढ़िया प्रदर्शन करेंगे। कर्जा मुक्त होने की संभावना है। अपनी पत्नी से मतभेद को बढ़ने नहीं देना है। विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण बढ़ सकता है। इस समय साझेदारी में कोई नया काम शुरू नहीं करें।
मिथुन राशि - इस राशि के जातकों के लिए मंगल लाभ भाव और रोग ऋण शत्रु यानी 11वें और छठे भाव के स्वामी हैं। मंगल अपनी वक्री अवस्था में आपके बारहवें यानी व्यय भाव में गोचर करेंगे। मंगल की पूर्ण दृष्टि आपके तीसरे, छठे और सप्तम भाव पर होगी। मंगल की छठे भाव में विराजमान शुक्र पर भी पूर्ण दृष्टि होगी। इस समय आप अपने भाई के साथ किसी विवाद को जन्म दे सकते है। अत्यधिक साहस में अपने ही काम बिगाड़ लेंगे। यात्राओं से लाभ होगा लेकिन धन खर्च की संभावना है। अगर आप रक्त विकार या बीपी जैसी बीमारी से पीड़ित है तो सेहत का आपको ध्यान रखना होगा। आपको अपने जीवनसाथी की भावनाओं की भी कद्र करनी होगी। अपने प्रेमी से कोई विवाद नहीं करे। नए निवेश के लिए समय अनुकूल नहीं है।
कर्क राशि- इस राशि के जातकों के लिए मंगल परम राजयोग कारक होते हैं। मंगल पंचम और दशम भाव के स्वामी है और वक्री अवस्था में उनका गोचर लाभ स्थान में होगा। उनकी पूर्ण दृष्टि आपके धन भाव, संतान भाव और रोग के भाव पर जा रही है। पंचम में विराजमान शुक्र पर उनकी पूर्ण सप्तम दृष्टि रहेगी। इस अवधि में आपको मंगल देव की कृपा से धन लाभ होने की उम्मीद है। आपको कोई बड़ा काम या बड़ा ऑर्डर मिल सकता है। पैतृक व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए समय अनुकूल रहेगा। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे जातकों को भी सफलता मिलेगी। इस समय किसी करीबी मित्र से मित्रता प्रेम में बदलने जा रही है। विवाहित जातक पत्नी के साथ घूमने बाहर जा सकते है।