रात को सोते समय मनुष्य सपने में बहुत सारी चीजों को देखता है। उस समय उस प्रतीत होता है कि जैसे वह किसी और संसार में है। कुछ सपने अच्छे तो कुछ सपने बुरे होते हैं। जो हमें डरा देते हैं। सपने चाहें जैसे भी हो लोगों में उन सपनों का अर्थ जानने की जिज्ञासा बनी रहती है। स्वप्न शास्त्र कहता है कि सपने हमारी मनोदशा को बताने का काम करते हैं। इस सपनों का अर्थ शुभ और अशुभ दोनों प्रकार का होता है। आज इसी विषय में जानेंगे कि सपने में पूर्वजों को देखना किस स्थिति में शुभ रहता है और किस स्थिति में पूर्वजों को देखना आपके जीवन में आने वाली परेशानियों की ओर संकेत मिलता है।
यदि आपके सपने पूर्वज प्रसन्न मुद्रा में दिखाई देते हैं, तो ऐसा माना जाता है कि आपके पूर्वज आपसे खुश हैं इसलिए आपको स्वप्न आकर आशीर्वाद स्वरूप दर्शन दे रहे हैं। इस तरह के सपने यदि श्राद्ध के दिनों में आते हैं तो बहुत ही अच्छा माना जाता है। इससे संकेत मिलता है कि आपके पूर्वज आपके द्वारा किए गए श्राद्धकर्म, तर्पण आदि से प्रसन्न हैं।
यदि आप सपने में अपने पूर्वजों को बुरी स्थिति में या बुरी तरह रोते बिलखते हुए देखते हैं या फिर उन्हें रोग की अवस्था में देखते हैं तो यह सपना अच्छा नहीं माना जाता है। इस सपने का अर्थ माना जाता है कि आपके जीवन में बड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ज्योतिष के अनुसार पितृदोष लगने पर भी ऐसे सपने दिखाई देते हैं। यदि आपको इस तरह का सपना आता है तो किसी ज्योतिष से सलाह लेकर पितृदोष शांति का उपाय करना चाहिए।
यदि आप सपने में देखते हैं कि आप पूर्वजों को भोजन करवा रहे हैं तो यह बहुत ही अच्छा संकेत माना जाता है। इसका अर्थ यह माना जाता है कि आने वाले समय में आपका कोई बड़ा काम बनने वाला है और किसी बड़े कार्य में आपको सफलता मिल सकती है। यदि आप स्वयं को भी साथ में भोजन करते हुए देखते हैं तो माना जाता है कि आपके पितर आपको आशीर्वाद दे रहे हैं। इस तरह के आपके अच्छे दिन आने का संकेत देते हैं।
यदि आप सपने में देखते हैं कि आपके पूर्वज आपसे कोई बात करना चाहते हैं तो यह माना जाता है कि उनकी कोई अधूरी इच्छा रह गई है। पौराणिक मान्यता यह है कि यदि किसी मनुष्य की मृत्यु के समय उसके मन में कोई इच्छा अधूरी रह जाती है तो उसकी आत्मा पृथ्वी लोक पर ही भटकती रहती है और वह अपने सबंधियों के सपने में आकर उन्हें अपनी इच्छा बताने का प्रयास करते हैं। यदि आपके इस तरह से सपने दिखाई देते हैं तो आपके पूर्वजों के नाम से नियमित रूप से दानकर्म करना चाहिए।