ज्योतिषशास्त्र में शनिदेव को क्रूर ग्रह माना गया है। क्रूर ग्रह होने के कारण ज्यादातर लोगों का मनाना है कि इनका प्रभाव नकारात्मक होता है। शनि ग्रह सभी ग्रहों में सबसे धीमी चाल से चलने वाले ग्रह है। धीमी चाल के कारण इनका प्रभाव काफी लंबे समय समय तक रहता है। लेकिन शनि देव हमेशा अशुभ फल ही देते हैं ऐसा नहीं होता है। जिन जातकों की कुंडली में शनिदेव शुभ स्थिति में विराजमान होते हैं उनके लिए वे शुभ फल प्रदान करते हैं। शनि की शुभ स्थिति जातकों को मालामाल बना देते हैं। शनिदेव न्याय के देवता हैं यानी जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है उन्हें वह शुभ फल देते हैं और जो जातक बुरे कर्म करता है शनिदेव उन्हें दंडित भी करते हैं।
Shani Sade Sati 2021: जानिए कब दूर होगी धनु, मकर और कुंभ राशि वालों पर से शनि की साढ़ेसाती
शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव सात वर्षों तक रहता है। सात वर्षों तक चलने वाली दशा को शनि की साढ़ेसाती कहा जाता है। शनि ग्रह सभी ग्रहों में सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं। यह एक राशि से किसी दूसरी राशि में जाने के लिए करीब ढाई वर्षों का समय लेते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार हर व्यक्ति के जीवन में एक बार शनि की साढ़ेसाती अवश्य ही आती है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव रहता है तो व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिन जातकों की कुंडली में शनि अच्छे भाव में रहते हैं तो उसे जीवन में सभी तरह की सुख सुविधा प्रदान करते हैं। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मो के आधार पर शुभ या अशुभ फल देते हैं।
धनु राशि पर साढ़ेसाती कब तक?
धनु राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का आखिरी चरण चल रहा है। शनि की साढ़ेसाती किसी राशि पर तीन चरणों में आती है। पूरी तरह से साल 2023 में धनु राशि पर से शनि की साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी।
मकर राशि पर साढ़ेसाती कब तक?
मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है। 2025 में मकर राशि से शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव खत्म हो जाएगा। शनि जब मीन राशि में गोचर करेंगे तब मकर राशि के जातकों को शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव से मुक्ति मिलेगी।
शनि के मकर राशि में गोचर करने के कारण कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। कुंभ राशि पर साढ़ेसाती होने की वजह से कई तरह की परेशानियां पीछा करती हैं। कुंभ राशि से पूरी तरह शनि की साढ़ेसाती 23 जनवरी 2028 को हटेगी।