ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राशि परिवर्तन,उदय,अस्त,मार्गी और वक्री होना बहुत ही मायने रखता है। क्योंकि ज्योतिष में ग्रहों की चाल में बदलाव से जातकों के जीवन पर व्यापक असर पड़ता है। सभी नौ ग्रहों में अलग-अलग अंतराल पर राशि परिवर्तन करते हैं। इसी सब में शनि ग्रह का ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व होता है। शनि ग्रह को कर्मफलदाता कहा गया है यानी यह व्यक्तियों को उनके द्वारा किए गए कर्मों के आधार पर ही फल प्रदान करते हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी गति से भ्रमण करते हैं। शनि देव किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। इस साल शनि अपनी राशि बदलने वाले हैं। 29 अप्रैल को शनिदेव मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। फिर 05 जून को कुंभ राशि में रहते हुए वक्री यानी उल्टी चाल से चलने लगेंगे। जो 23 अक्तूबर तक इस वक्री अवस्था में ही रहेंगे। शनि के वक्री होने से इसका असर सभी 12 राशियों के जातकों पर पड़ेगा, लेकिन तीन राशियां ऐसी होंगी जिस पर वक्री शनि का प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ेगा। इन राशि के जातकों की परेशानियां बढ़ सकती हैं। आइए जानते हैं कौन सी है ये तीन राशियां...
Shani Vakri 2022: शनिदेव के वक्री होने से इन तीन राशि वालों को रहना होगा सतर्क
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मेष राशि
मेष राशि के जातकों के लिए शनि का कुंभ राशि में वक्री होना संकट और परेशानियों का संकेत है। आपकी राशि से शनि 11वें भाव में व्रकी होंगे। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुंडली का 11वां भाव इनकम होता है। ऐसे में शनिदेव की वक्री चाल आपके इनकम में कमी लाएगा। जो जातक बिजनेस आदि में लगे हुए उनके लिए शनि का वक्री में होना नुकसान दिलाने वाला रहेगा। व्यापार में घाटा होने के संकेत हैं। आर्थिक परेशानियां आपके लिए बढ़ सकती हैं। वैसे भी अगर ज्योतिषीय गणना के अनुसार अगर देखा जाए तो मेष राशि के स्वामी देवता मंगलदेव होते हैं। मंगल और शनिदेव की आपस में शत्रुता रहती है। इसी कारण से मेष राशि के जातकों के लिए शनि का वक्री होना परेशानियां ला सकता है।
शनिदेव आपकी राशि से सातवें भाव में वक्री होंगे। कुंडली का सातवां भाव दांपत्य का होता है ऐसे में वैवाहिक जीवन जीने वाले जातकों के लिए शनि का वक्री होना परेशानियां ला सकता है। पति-पत्नी में तनाव का माहौल रह सकता है। इसके अलावा साझेदारी में व्यापार चलाने वाले लोगों के लिए शनि का वक्री होना अनुकूल नहीं रहेगा। सेहत संबंधी किसी तरह की परेशानी आ सकती है।
आपकी राशि के लिए शनिदेव का वक्री होना कुंडली के 8वें भाव में होगा। यह भाव आयु का कहलाता है। ऐसे में आपको सेहत संबंधी परेशानियां आ सकती है। व्यापार करने वाले जातकों को धन निवेश में सावधानी बरतनी चाहिए वहीं जो जातक नौकरी में है वह नौकरी के बदलने के बारे में न सोचें। आपके लिए परेशानियां ला सकता है।