राहु और केतु दोनों ही छाया ग्रह हैं जो 23 सितंबर को अपनी-अपनी राशि बदल रहे हैं। जहां राहु मिथुन राशि से वृष राशि में प्रवेश कर रहे हैं तो वहीं केतु धनु राशि से वृश्चिक राशि में आ रहे हैं। ये दोनों ही ग्रह साथ-साथ अपनी राशि परिवर्तन करते हैं और दोनों की चाल भी उल्टी दिशा में होती है।
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राहु-केतु का राशि परिवर्तन 2020
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ज्योतिष शास्त्र में ऐसा कहा जाता है कि जिन जातकों के ऊपर राहु-केतु की कृपा बरसती है वे जातक कामयाबी की बुलंदियों पर होते हैं। वहीं जिन जातकों के लिए ये अशुभ होते हैं तो ये उन जातकों के लिए मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर देते हैं। लेकिन ज्योतिष शास्त्र में दोनों ग्रह की कृपा पाने और इसके अशुभ प्रभाव से बचने के लिए एक महाउपाय बताया गया है और वह है - भैरव देव की आराधना। ऐसे करें भैरव देव की आराधना..
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उड़द की दाल से बनी मिठाई का लगाएं भोग
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उड़द की दाल से बनी मिठाई का लगाएं भोग
राहु-केतु से मिलने वाली पीड़ा को दूर करने के लिए भैरव उपासना से बड़ा कोई उपाय नहीं है। भगवान भैरव को प्रसन्न करने के लिए उड़द की दाल या इससे निर्मित मिष्ठान, दूध-मेवा का भोग लगाएं।
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भगवान भैरव को चमेली के पुष्प चढ़ाएं
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भगवान भैरव को चमेली के पुष्प चढ़ाएं
भगवान भैरव को चमेली का पुष्प अतिप्रिय है, इसलिए भैरव को मनाने के लिए, उनकी कृपा पाने के लिए इस पुष्प का विशेष रूप से प्रयोग करें।
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जपें भैरव देव के नाम की माला
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प्रतिदिन 108 बार जपें भैरव देव के नाम की माला
भगवान भैरव जी की कृपा पाने के लिए उनके 108 नाम का एक माला जप प्रतिदिन करें। इस प्रभावी उपाय से साधक के सभी भय दूर और समस्याओं का समाधान निकल आता है।