आज पूर्णिमा श्राद्ध है और आज से ही पितृपक्ष शुरू हो गए हैं। दरअसल भाद्रपद पूर्णिमा को पूर्णिमा श्राद्ध के नाम से जाना जाता है। हिन्दू पांचांग के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से ही पितृपक्ष आरंभ हो जाते हैं। वहीं पूर्णिमा के बाद एकादशी, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्टी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी और अमावस्या श्राद्ध आता है। सर्वपितृ अमावस्या (श्राद्ध पक्ष का अंतिम दिन) 6 अक्तूबर 2021 को है। श्राद्ध की इन तिथियों में पूर्णिमा श्राद्ध, पंचमी, एकादशी और सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध प्रमुख माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जो हमारे पूर्वज पूर्णिमा के दिन चले गए हैं उनके लिए पूर्णिमा श्राद्ध समर्पित होता है। इस दिन उनके निमित तर्पण करवाना चाहिए। ऐसा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं भाद्रपद पूर्णिमा के दिन कुछ विशेष उपाय करने से जातकों को कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं, जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। आपको इस ये विशेष उपाय करने चाहिए -
Purnima Shraddha 2021: पूर्णिमा श्राद्ध पर ये 5 उपाय बदल देंगे आपकी तकदीर
इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से व्यक्ति को धन-धान्य की कमी नहीं रहती है। जो लोग पूर्णिमा के दिन व्रत करते हैं, उनके घर में सब प्रकार से सुख-समृद्धि का वास होता है। सारें कष्ट दूर होते हैं।
पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की प्रतिमा पर 11 कौड़ियां चढ़ाकर उनका हल्दी से तिलक करें। अगले दिन इन कौड़ियों को एक लाल कपड़े में बांधकर वहां रख दे जहां आप अपना धन रखते हैं। ऐसा करने से घर में कभी भी धन की कमी नहीं रहेगी।
आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय के समय चन्द्रमा को कच्चे दूध में चीनी और चावल मिलाकर "ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: चन्द्रमासे नम:" या " ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:. " मंत्र का जप करते हुए अर्ध्य देना चाहिए। ऐसा करने से धीरे-धीरे आर्थिक समस्याएं खत्म हो जाती हैं।
वैवाहिक जीवन में मधुरता के लिए पूर्णिमा के दिन पति-पत्नी में से किसी को चंद्रमा को अर्घ्य अवश्य देना चाहिए। पति- पत्नी साथ में भी अर्घ्य दे सकते हैं। इस उपाय से आपके दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता का रस बना रहेगा।