आजकल अतिचारी होकर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण तथा मकर राशि में गोचर करते हुए देवगुरु बृहस्पति 14 मई की की शाम 07 बजकर 56 मिनट पर 4 माह के लिए वक्री हो रहे हैं, ये पुनः 13 सितंबर की सुबह 06 बजकर 10 मिनट पर मार्गी होंगे। धनु तथा मीन राशि के स्वामी गुरु का वक्री होना पृथ्वी वासियों विशेष करके केंद्र एवं राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्रियों, साधु-संतो और अन्य आध्यात्मिक गुरुओं के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं, आंधी तूफानों के अधिक से अधिक आने के संकेत है।
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मेष राशि- राशि से दशमभाव में गुरु कार्यक्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बनाएंगे किंतु, शुभ ग्रह होने के फलस्वरूप यह नौकरी में पदोन्नति और स्थान परिवर्तन का भी योग बनाएंगे। नई सर्विस के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर करना चाहें तो अवसर अच्छा रहेगा। विदेश यात्रा अथवा विदेशी नागरिकता के लिए आवेदन आदि करना शुभ रहेगा।
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वृषभ राशि- राशि से धर्मभाव में बृहस्पति का गोचर आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा तो बढ़ाएगा किन्तु धर्म-कर्म के मामलों में अधिक खर्च होगा। संतान संबंधी चिंता से कुछ मानसिक अशांति रहेगी। नवदंपति के लिए संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव के योग बन रहे हैं। मकान वाहन से संबंधित क्रय का संकल्प पूर्ण होने के योग।
मिथुन राशि- राशि से अष्टमभाव में बृहस्पति मिले-जुले फल देंगे। स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव रहेगा। कार्य क्षेत्र में भी षड्यंत्र का शिकार होने से बचे। अचल संपत्ति के साथ वाहन खरीदने का संकल्प पूर्ण होगा। परिवार के वरिष्ठ सदस्यों से मतभेद ना पैदा होने दें। आपके अपने ही लोग नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे, सावधान रहें।
कर्क राशि- राशि से सप्तमभाव में बृहस्पति का गोचर करना दैनिक व्यापारियों के लिए शुभ रहेगा किंतु, शादी विवाह से संबंधित वार्ता में थोड़ा विलंब हो सकता है। ससुराल पक्ष से रिश्ते बिगड़ने न दें, इस अवधि के मध्य साझा व्यापार आरंभ करने से बचें। उच्चाधिकारियों से भी मधुर संबंध बनाए रखें, शासन सत्ता का सदुपयोग करें।