7 मार्च 2019, गुरुवार, को प्रात: 7:54 मिनट पर पापाग्रह के नाम से पहचाना जाने वाला राहु नामक छाया ग्रह कर्क राशि का परित्याग कर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। सामान्यत: छाया ग्रह राहु का गोचर एक राशि में 18 माह तक भोग करता है। जिसके फलस्वरूप राहु का राशि परिवर्तन न केवल व्यक्ति विशेष के लिए अपितु अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर रूप से प्रभावकारी बनेगा। भौतिक जीवन में राहु नामक छाया ग्रह को जहां राजनीति का मूल कहा जाता है। जहां यह ग्रह अपनी शुभावस्था में बिना योग्यता के ही सर्वस्व देने की क्षमता रखता है, वहीं पापाक्रांत अवस्था में सर्वस्व समाप्त करने की भी क्षमता रखता है।
Rahu Ketu Transit 2019 : राहु-केतु के राशि परिवर्तन के बाद इन राशियों को 18 महीने रहना होगा सावधान
केतु जो विवेकशून्य अर्थात् मस्तिष्कहीन ग्रह के नाम से जाना जाता है, वह राहु के राशि परिवर्तन के साथ ही धनु राशि में प्रवेश करेगा। यह भी राहु के समान ही आगामी 18 माह तक धनु राशि में विचरण करेगा। यद्यपि केतु नामक ग्रह मंगल के समान फल देने के लिए जाना जाता है। परंतु इसका फल भावकारी अवस्था के साथ-साथ इसके बलाबल पर विचार करने पर ही किया जाना चाहिए। अपने गुप्त स्वभाव के कारण जहां इसे रहस्मय ग्रह कहा जाता है, वहीं यह असंभव को संभव एवं निश्चितता को अनिश्चितता में बदलने वाला भी होता है।
जानें किन्हें शुभ और किन्हें देंगे अशुभ परिणाम
भारतीय ज्योतिष के अनुसार राहु नामक छाया ग्रह अत्यंत बलवती पापाग्रह के नाम से जाना जाता है। जिसके फलस्वरूप गोचर में राशि से तृतीय अर्थात् मेष राशि, छठे यानी मकर राशि एवं एकादश अर्थात् सिंह राशि के लिए यह चातुर्दिक विकास का मार्ग प्रशस्त करने वाला कहा जाएगा। वहीं मीन, वृश्चिक एवं कर्क राशियों के लिए अत्यंत नकारात्मक फल प्रदान करने वाला कहा जाएगा।
Rahu Ketu Transit 2019 : सरल उपायों से दूर करें राहु की रुकावट और केतु के कष्ट
अपनी राशि के अनुसार राहु-केतु के राशि परिवर्तन का विस्तार से प्रभाव जानने के लिए आगे की स्लाइड पर क्लिक करें —
मेष
राशि के तृतीयेश राहु अत्यंत कल्याणकारी कहा जाएगा। पारिवारिक एवं सामाजिक रूप से जहां उन्नति प्रदान करेगा, वहीं पराक्रम में वृद्धि, आरोग्य वृद्धि, रुके हुए कार्यों को पूरा करने वाला सिद्ध होगा।
नवम् भाव में गया हुए केतु पूज्य कहा जाएगा। वाद-विवाद भाग्यावरोध एवं कार्यों में थोड़ा विघ्नता पैदा कर सकता है।
वृष
राशि से द्वितीयस्थ राहु सामान्य फल प्रदान करने वाला कहा जाएगा। आर्थिक रूप से जहां यह संघर्ष कराने वाला कहा जाएगा। वहीं अपने लोगों से कष्ट, सरकार से असहयोग की स्थिति उत्पन्न करेगा। परिवार में अनावश्यक विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
अष्टम् भाव में गया हुए केतु अचानक दुर्घटना अथवा स्वास्थ्य में परेशानी पैदा कर पैतृक संपदा में विवाद की स्थिति पैदा कर सकता है।