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Maha Shivratri 2025: शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही नियम, जानें जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त
Sat, 15 Feb 2025 12:38 PM IST
ज्योति मेहरा
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Sat, 15 Feb 2025 12:38 PM IST
सार
भगवान शिव का जलाभिषेक करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है, ताकि पूजा विधि पूर्वक संपन्न हो और उसका अधिकतम लाभ प्राप्त हो।
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महा शिवरात्रि 2025
- फोटो : Amar Ujala
Maha Shivratri 2025: महाशिवरात्रि भगवान शिव की उपासना का एक अत्यंत पावन दिन है, जब भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं और जलाभिषेक करते हैं। यह दिन विशेष रूप से व्रत, ध्यान और भक्ति से परिपूर्ण होता है, जिसमें भक्त विभिन्न विधियों का पालन कर शिव कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। शिवलिंग पर जल चढ़ाने के दौरान कुछ महत्वपूर्ण नियमों का ध्यान रखना आवश्यक होता है ताकि पूजा विधि पूर्वक संपन्न हो और उसका अधिकतम लाभ प्राप्त हो।
शिवलिंग पर अर्पित किए जाने वाले पवित्र पदार्थ
- फोटो : freepik
शिवलिंग पर अर्पित किए जाने वाले पवित्र पदार्थ
भगवान शिव की पूजा में जलाभिषेक के साथ कुछ विशेष वस्तुओं का अर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इनमें बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प एवं शमी के पत्ते प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये सभी सामग्री शिव कृपा प्राप्ति में सहायक मानी जाती हैं। हालांकि, शिवलिंग पर तुलसी, सिंदूर, नारियल, शंख और केतकी के पुष्प अर्पित नहीं किए जाते, क्योंकि इन्हें शिव पूजा में वर्जित माना गया है।
भगवान शिव की पूजा में जलाभिषेक के साथ कुछ विशेष वस्तुओं का अर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इनमें बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प एवं शमी के पत्ते प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये सभी सामग्री शिव कृपा प्राप्ति में सहायक मानी जाती हैं। हालांकि, शिवलिंग पर तुलसी, सिंदूर, नारियल, शंख और केतकी के पुष्प अर्पित नहीं किए जाते, क्योंकि इन्हें शिव पूजा में वर्जित माना गया है।
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शिवलिंग की परिक्रमा का महत्व
- फोटो : freepik
शिवलिंग की परिक्रमा का महत्व
भगवान शिव की पूजा करते समय शिवलिंग की परिक्रमा करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। परिक्रमा करते समय ध्यान रखना चाहिए कि यह हमेशा बाईं ओर से की जाए और केवल आधी परिक्रमा तक ही सीमित हो। शिवलिंग की जलहरी को पार नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है।
भगवान शिव की पूजा करते समय शिवलिंग की परिक्रमा करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। परिक्रमा करते समय ध्यान रखना चाहिए कि यह हमेशा बाईं ओर से की जाए और केवल आधी परिक्रमा तक ही सीमित हो। शिवलिंग की जलहरी को पार नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है।
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महाशिवरात्रि 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त
- फोटो : freepik
महाशिवरात्रि 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि का पर्व वर्ष 2025 में 26 फरवरी को मनाया जाएगा। यह शुभ अवसर 26 फरवरी को सुबह 11:08 बजे से आरंभ होकर 27 फरवरी को प्रातः 8:54 बजे तक रहेगा। इस दिन जलाभिषेक के लिए विशेष मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं।
महाशिवरात्रि का पर्व वर्ष 2025 में 26 फरवरी को मनाया जाएगा। यह शुभ अवसर 26 फरवरी को सुबह 11:08 बजे से आरंभ होकर 27 फरवरी को प्रातः 8:54 बजे तक रहेगा। इस दिन जलाभिषेक के लिए विशेष मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं।
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जलाभिषेक के लिए शुभ समय
- फोटो : freepik
जलाभिषेक के लिए शुभ समय
प्रातःकालीन मुहूर्त: 6:47 बजे से 9:42 बजे तक
मध्यान्ह मुहूर्त: 11:06 बजे से 12:35 बजे तक
संध्याकालीन मुहूर्त: 3:25 बजे से 6:08 बजे तक
रात्रिकालीन मुहूर्त: 8:54 बजे से 12:01 बजे तक
महाशिवरात्रि के दिन विधिपूर्वक जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। इस शुभ अवसर पर पूरे मन से शिव अराधना करें और उनकी कृपा प्राप्त करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
प्रातःकालीन मुहूर्त: 6:47 बजे से 9:42 बजे तक
मध्यान्ह मुहूर्त: 11:06 बजे से 12:35 बजे तक
संध्याकालीन मुहूर्त: 3:25 बजे से 6:08 बजे तक
रात्रिकालीन मुहूर्त: 8:54 बजे से 12:01 बजे तक
महाशिवरात्रि के दिन विधिपूर्वक जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। इस शुभ अवसर पर पूरे मन से शिव अराधना करें और उनकी कृपा प्राप्त करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।