लगभग 12 वर्ष में एक बार शनि और बृहस्पति का मिलन एक ही राशि में होता है। वर्षों बाद इस बार इनका मिलन गुरु की राशि धनु में ही होगा। शनि एवं केतु वहाँ पहले से ही विराजमान हैं अब गुरु के भी पहुंचने से तीनों ग्रह एक साथ हो जाएंगे, इन पर भी राहु एवं मंगल की भी पूर्ण दृष्टि पड़ रही है। 10 नवंबर को मंगल के तुला राशि में प्रवेश के साथ इनकी दृष्टि समाप्त हो जायेगी। यही संयोग इनके प्रभाव में और परिणाम में आकस्मिकता को जन्म देगा जो 26 जनवरी 2020 को शनि के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही समाप्त होगा। मंगल की दृष्टि भी 10 नवंबर को तुला राशि में प्रवेश के साथ ही समाप्त हो जाएगी।
गुरु ग्रह का परिवर्तन, 12 साल बाद रहेंगे शनि के साथ, 9 राशियां भाग्यशाली, 3 पर भारी
पं जयगोविंद शास्त्री
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 06 Nov 2019 11:47 AM IST
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