20 जून 2021 से देवगुरु बृहस्पति शनि की राशि कुंभ में वक्री हो रहे हैं। यहां पर ये 120 दिनों तक वक्री रहते हुए 18 अक्तूबर 2021 को मार्गी हो जाएंगे। गुरु वक्री होने से पहले धीरे-धीरे अपनी गति से चलते हुए कुंभ राशि में आएंगे। ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह की गिनती सबसे शुभ ग्रहों में होती है। गुरु के शुभ रहने पर उस व्यक्ति विशेष को मान सम्मान, धन,कीर्ति और बौद्धिक क्षमता में इजाफा होता है। ज्योतिष में गुरु ग्रह को धनु और मीन राशि का स्वामी माना गया है जबकि कर्क राशि में उच्च के और मकर राशि में नीच के माने गए हैं। बृहस्पति करीब 13 महीनों के अंतराल पर अपनी राशि बदलते हैं। इन 13 महीनों में सबसे ज्यादा चार महीनों तक वक्री अवस्था में ही भ्रमण करते हैं। गुरु वक्री अवस्था में भी सबसे ज्यादा शुभ फल प्रदान करते हैं। जिन जातकों की कुंडली में गुरु अच्छे भाव में रहते हैं उनका जीवन सुखी और शांति से बीतता है।
गुरु की वक्री चाल: गुरु के कुंभ राशि में टेढ़ी चाल चलने से जानिए मिथुन राशि पर प्रभाव
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ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति
ज्योतिष में बृहस्पति को गुरु का दर्जा प्राप्त है। इसलिए इन्हें गुरु ग्रह भी कहा जाता है। गुरु ग्रह को धनु और मीन राशि पर आधिपत्य है। गुरु कर्क राशि में उच्च के और मकर राशि में नीच के माने जाते है। इसके अलावा ये पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी माने जाते हैं। अगर गुरु ग्रह के कारक की बात करें तो ये धर्म, आध्यात्म, ज्ञान, शिक्षा आदि माने गए हैं। गुरु ग्रह दूसरे ऐसे ग्रह हैं जो किसी एक राशि में लंबे समय तक रहते हैं। यह करीब 13 महीनों तक किसी एक राशि में गोचर करते हैं। इन 13 महीनों के दौरान लगभग चार माह वक्री अवस्था में गुजारते हैं। देवगुरु बृहस्पति को कुण्डली में द्वितीय, पंचम, नवम, दशम एवं एकादश भाव का कारक माना जाता है। बृहस्पति से प्रभावित व्यक्ति धार्मिक,आस्थावान, दर्शनिक, विज्ञान में रूची रखने वाले एवं सत्यनिष्ठ होते हैं। गुरु सभी ग्रहों में सूर्य, चंद्रमा और मंगल के साथ मित्रवत व्यवहार करते हैं जबकि शुक्र और बुध के साथ शत्रुता का भाव रहता है।
अगर किसी जातक की कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत और शुभ भाव में होते हैं तो व्यक्ति को अच्छे परिणाम मिलते हैं और उसकी रुचि धर्म-कर्म की तरफ बढ़ने लगता है। मान-सम्मान और धन लाभ होने लगता है। वहीं अगर किसी जातक की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर या अपने शत्रु भाव में विराजमान हैं तो जातकों को परेशानियां उठानी पड़ती है। इन्हें विवाह और वैवाहिक जीवन में समस्याएं आने लगती हैं। दरिद्रता और बीमारियां चारो तरफ से घेर लेती हैं।
मिथुन राशिचक्र में तीसरे स्थान पर आने वाली राशि है। आपकी राशि में गुरु नवें भाव में वक्री होने जा रहे हैं। यह भाग्य का भाव है। जिसके चलते आपको मिले-जुले परिणाम मिलेंगे। पारिवारिक जीवन सुखमय रहने की उम्मीद के बीच ये समय शिक्षा क्षेत्र के लोगों के लिए थोड़ा कठिन रहने की संभावना है।
ज्योतिष में गुरु के उपाय
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार गुरुवार के दिन पूजन करने से बृहस्पति ग्रह मजबूत होते हैं। अगर आपकी कुंडली में बृहस्पति कमजोर है या काम में बाधा आ रही है तो गुरुवार के दिन कुछ आसान से उपाय करने से कुंडली में बृहस्पति मजबूत होता है, देवगुरु बृहस्पति की कृपा से हमारी समस्याओं का समाधान होता है। सौभाग्य बढ़ता है और किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती है। बृहस्पति देव को पीला रंग अतिप्रिय है। वे पीले रंग का पीतांबर धारण करते हैं। इसलिए इनकी पूजा में हल्दी का उपयोग किया जाता है। गुरुवार के दिन केसर पीला चंदन या फिर हल्दी का दान करना बहुत शुभ होता है। इससे घर में सुख-शांति आती है और आरोग्यता मिलती है।