India Pakistan War Predition: वर्तमान में इस वर्ष 2025 में 4 बड़े ग्रहों का राशि परिवर्तन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 29 मार्च को शनि ने कुंभ से निकलकर मेष में प्रवेश किया है। इसके बाद 14 मई को बृहस्पति वृषभ से निकलकर मिथुन में और 18 मई को राहु मीन से निकलकर कुंभ में और केतु कन्या से निकलकर सिंह में गोचर करने वाले हैं। बृहस्पति ग्रह मिथुन में गोचर करते ही अतिचारी गति से चलेंगे और शनि के मकर, कुंभ के बाद मीन में गोचर से देश-दुनिया में बड़े पैमाने पर परिवर्तन हो चुका है। इसी बीच वायरल हो रही भविष्यवाणियां क्या कहती हैं भारत पाकिस्तान के संबंधों को लेकर, जानिए विस्तार से।
पहलगाम आतंकी हमला और भारत-पाक युद्ध: खप्पर योग से बन रहे हैं युद्ध जैसे हालात, जानें क्या कहते हैं ज्योतिषी
चैत्र मास से ज्येष्ठ मास के बीच 5 शनिवार, 5 रविवार और 5 मंगलवार होने से खप्पर योग बनता है जो कि अशुभ माना गया है। इसके चलते 15 मार्च से लेकर 11 जून तक भारत के लिए विनाशकारी समय रहेगा। इसका सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तान को उठाना पड़ेगा।
भारत और पाक की कुंडली
चैत्र मास से ज्येष्ठ मास के बीच 5 शनिवार, 5 रविवार और 5 मंगलवार होने से खप्पर योग बनता है जो कि अशुभ माना गया है। इसके चलते 15 मार्च से लेकर 11 जून तक भारत के लिए विनाशकारी समय रहेगा। इसका सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तान को उठाना पड़ेगा। पाकिस्तान की कुंडली में केतु लग्न में और सातवें में बुध नीचस्थ है जहां पर शनि और राहु गोचर कर रहे हैं जो संकेत करता है कि पाकिस्तान को भारी नुकसान होगा। क्योंकि नरेंद्र मोदी की कुंडली में मंगल की महादशा के अंतर्गत तृतीय और चतुर्थ भाव के कारक शनि की अंतर्दशा चल रही है जो पंचम भाव में राहु के साथ गोचर कर रहे हैं।
दूसरी ओर भारत की कुंडली में चंद्रमा की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा है। तृतीय भाव यानी पराक्रम के स्वामी चंद्रमा है जहां पर चतुर्थ भाव के स्वामी सूर्य उच्च के होकर गोचर में हैं। इस ग्रह गोचर के चलते लघु युद्ध की संभावना बनती है। उल्लेखनीय है कि हिंदू नववर्ष 2082 के राजा सूर्य, मंत्री भी सूर्य हैं। दूसरी ओर वित्त मंत्री बुध, खाद्यमंत्री शुक्र हैं। यह सिद्धार्थ नामक संवत्सर चल रहा है जो कि भारत के लिए शुभ साबित होगा।
शनि गोचर का प्रभाव
शनि का जब भी उसकी उच्च, नीच, स्वयं की और शत्रु की राशि में गोचर होता है तो देश और दुनिया में भूकंप, तूफान या युद्ध से जनहानि होती है। शनि ग्रह ने जब 24 जनवरी 2020 में खुद की राशि मकर राशि में प्रवेश किया था, तब दुनिया में कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर में लॉकडाउन लग गया था। फिर उसने 29 अप्रैल 2022 को खुद की मूल त्रिकोण राशि कुंभ में प्रवेश किया था तब यूक्रेन-रशिया के बाद इजरायल-हमास का युद्ध प्रारंभ हुआ और दुनियाभर में जन विद्रोह एवं असंतोष की भावना फैल गई।
इसके बाद शनि बृहस्पति की राशि मीन में 29 मार्च 2025 को जाने वाला था उससे पहले ही यह आशंका व्यक्त की जा रही थी कि देश और दुनिया में भूकंप और युद्ध का नया दौर चलेगा और खासकर भारत के लिए वर्ष 2025 खराब रहने की आशंका व्यक्त की जा रही थी।
वर्ष 2020 के बाद से ही देश और दुनिया के हालात लगातार बदलते और गिरते जा रहे हैं। महामारी, भूकंप, बाढ़, दंगे, विद्रोह, आंदोलन, तख्तापलट, युद्ध, आतंकवाद और महंगाई की चपेट में हर देश है। ऐसा समय करीब 80 वर्ष पहले था जबकि दूसरा विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ था।
शनि के मीन राशि में जाने का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। 1937 (द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत), 1965 (भारत-पाकिस्तान युद्ध) और 1995 (बोस्नियाई युद्ध, जापान में सुनामी) में शनि ने मीन में गोचर किया था। मीन से पहले वह कुंभ और मकर में था तब के हालात भी देखे जा सकते हैं। एक राशि में शनि ढाई साल रहता है। ढाई साल में वह सब कुछ बदलकर रख देता है। अब 2025 में शनि ने फिर से मीन राशि में प्रवेश किया है। मीन से पहले वह कुंभ और मकर में 5 साल रहकर आया है।
आने वाले 5 साल शनि का प्रकोप और बना रहेगा। पांच साल में वह भारत की दशा और दिशा पूर्णत: बदलकर रख देगा और संभवत: पाकिस्तान का नामोनिशान मिटा देगा। ज्योतिषियों का आकलन है कि जब शनि अपनी शत्रु राशि मेष में प्रवेश करेगा तब दुनिया के हालात और भी बुरे हो जाएंगे। शनि देव 3 जून, 2027 को मेष राशि में प्रवेश करेंगे। 3 जून 2027 ऐसा समय है जबकि की भारत में बड़े बदलाव होंगे।
ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति से धरती का मौसम संचालित होता है। इसी के साथ ही वह प्राणियों के जीवन में सुख, शांति और आयु प्रदान करता है परंतु जब बृहस्पति पीड़ित हो जाए तो देश और दुनिया के मौसम के साथ ही शांति भी भंग हो जाती है।
14 मई 2025 से बृहस्पति अपनी अतिचारी चाल चलेंगे। अतिचारी यानी वे तेज एवं सीधी चाल से एक राशि को पार करके समय से पूर्व ही दूरी राशि में प्रवेश करेंगे और वक्री चाल चलते हुए पुन: उसी राशि में लौट आएंगे। इससे धरती के मौसम, जलवायु के साथ ही मानव की सुख एवं शांति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह चाल करीब 8 वर्षों तक रहेगी।