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पौराणिक कथा: जब पत्नी ने पति को बांधी थी पहली राखी, फिर शुरू हुआ रक्षाबंधन का त्योहार

Wed, 22 Aug 2018 10:53 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 22 Aug 2018 10:53 AM IST
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history of raksha bandhan according to purana first rakhi was tied by a wife to her husband

26 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। यह त्योहार भाई-बहन के आपसी रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए मनाया जाता है। रक्षा बंधन भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला इस त्यौहार में बहनें, अपने भाइयों की दाहिनी कलाई में राखी बांधती हैं और अपनी रक्षा का संकल्प लेती हैं। आमतौर पर रक्षा बंधन भाई बहन का त्योहार है लेकिन पुराणों के अनुसार पहली बार जब पत्नी ने अपनी पति की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था तभी से यह त्योहार मनाया जाने लगा। 

history of raksha bandhan according to purana first rakhi was tied by a wife to her husband

रक्षा बंधन का इतिहास वामनावतार नामक पौराणिक कथा के प्रसंग में मिलता है। इस त्योहार की शुरुआत भाई-बहन ने नहीं, बल्कि एक पति पत्नी से शुरू किया गया था। इसके बाद से संसार में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाने लगा।

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पौराणिक कथा के अनुसार एक बार दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवताओं की सेना दानवों से पराजित होने लगी। देवराज इंद्र की पत्नी देवताओं की लगातार हो रही हार से घबरा गयी और इंद्र के प्राणों रक्षा के उपाय सोचने लगी।

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काफी सोच-विचार करने के बाद इन्द्र की पत्नी शचि ने तप करना शुरू किया। इससे एक रक्षासूत्र प्राप्त हुआ। शचि ने इस रक्षासूत्र को इंद्र की कलाई पर बांध दिया। इससे देवताओं की शक्ति बढ़ गयी और दानवों पर विजय पाने में सफल हुए।

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श्रावण पूर्णिमा के दिन शचि ने इंद्र को रक्षासूत्र बांधा था। इसलिए इस दिन से रक्षा बंधन का त्योहार बनाया जाने लगा। भविष्य पुराण के अनुसार यह जरूरी नहीं कि भाई-बहन अथवा पति-पति रक्षा बंधन का त्योहार मना सकते हैं।दरअसल आप जिसकी भी रक्षा एवं उन्नति की इच्छा रखते हैं उसे रक्षा सूत्र यानी राखी बांध सकते हैं। इसलिए पुरोहित लोग आशीर्वाद वाचन के साथ अपने यजमान की कलाई में राखी बांधा करते हैं।

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