Guru Vakri 2024: संतान, शिक्षा, ज्ञान, धन, धार्मिक कार्य, बड़े भाई और विवाह के कारक गुरु 09 अक्तूबर को सुबह 10 बजे बुधदेव के स्वामित्व वाली राशि मिथुन में वक्री हो गए हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह शनि और राहु के बाद सबसे लंबे समय तक किसी एक राशि में रहते हैं। गुरु करीब 13 महीनों तक एक राशि में रहने के बाद दूसरी राशि में गोचर करते हैं। ज्योतिष में ग्रह अपनी चाल, स्थिति में समय-समय पर बदलाव करते हैं, इसके अलावा ये वक्री, मार्गी, अस्त और उदय भी होते हैं। ग्रहों की चाल में बदलाव होने का असर सभी राशियों के जीवन पर पड़ता है। देवगुरु अब मिथुन राशि में वक्री हो गए हैं। आपको बता दें कि बृहस्पति 3 जून 2024 को वृषभ राशि में वक्री हुए थे और अब एक बार फिर से मिथुन राशि में वक्री अवस्था में प्रवेश कर चुके हैं। अब गुरु अगले साल यानी 4 फरवरी 2025 को मिथुन राशि मार्गी होंगे। देवगुरु के मिथुन राशि में वक्री होने कुछ राशि वालों को अच्छा फायदा मिलने के योग बन रहे हैं।
Guru Vakri 2024: देवगुरु बृहस्पति हुए वक्री, इन चार राशि वालों को होगा अच्छा लाभ
मिथुन राशि में गुरु का वक्री होना किसी वरदान से कम नहीं है। आपकी राशि में गुरु का वक्री होना शुभ फल देने वाला साबित हो सकता है। गुरु के वक्री होने से आपकी सफलता के दायरे में काफी विस्तार होने वाला है। कार्यक्षेत्र में अच्छी सफलता मिलने के योग बन रहे हैं। भाग्य का भरपूर साथ आपको मिलेगा। धन लाभ के अवसरों में वृद्धि और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। जो लोग नौकरीपेशा है उनके लिए आने वाला समय बहुत ही शुभ साबित होगा। करियर में सफलता प्राप्त करने के अच्छे योग हैं। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा और अचानक से धन-संपत्ति की प्राप्ति के सुखद योग बनेंगे।
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए कुंडली के ग्यारहवें भाव में गुरु का वक्री होना बहुत ही फलदायी साबित होगा। कुंडली का 11वां भाव आय, लाभ और इच्छापूर्ति का होता है। ऐसे में यहां पर गुरु का शुभ प्रभाव पड़ने के वजह से आपके जीवन में अचानक से धन-दौलत और संपत्ति में बढ़ोतरी के योग हैं। आपको भाग्य का अच्छा साथ मिलेगा जिससे आपके धन-संपदा, संतान और सुखों में बहुत वृद्धि होगी। आपके अधूरे पड़े काम अब जल्द पूरे होंगे। जो लोग नौकरीपेशा हैं उन्हें प्रमोशन, व्यापार में उन्नति और करियर में अच्छी सफलता मिलेगी।
धनु राशि के जातकों के लिए भी गुरु का वक्री होना अच्छा साबित होगा। आपकी राशि में गुरु छठे भाव में वक्री हुए हैं। ऐसे में आपको अचानक से धन लाभ के अवसरों में वृद्धि होगी। करियर और नौकरी में उच्च स्थान की प्राप्ति संभव है। नए-नए अवसरों की प्राप्ति होगी। आपको अचानक से धन लाभ के अवसरों में वृद्धि होगी। परिवार में कोई शुभ सूचना आपको मिल सकती है। साथ ही कुछ इच्छाओं की पूर्ति होने से आपके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं। आपकी परेशानियों का अंत होगा और कष्टों से छुटकारा मिलेगा।
देवगुरु बृहस्तपति का वक्री होना मकर राशि के जातकों को लिए शुभ संकेत है। गुरु आपकी राशि के तीसरे और बारहवें भाव के स्वामी होकर छठे भाव में वक्री हुए हैं। ऐसे में आपको भाग्य का भरपूर साथ और अचानक से धन लाभ के योग बने हुए हैं। आपको पैतृक संपंति से संबंधित मामलों में सफलता मिल सकती है। नौकरी में मान-सम्मान और प्रमोशन के योग भी हैं।