तमिलनाडू ने भारत की राजनीति में कई दिग्गज नेता दिए हैं। आजादी के बाद पचास के दशक में सी. राजगोपालचारी और के. कामराज जैसे मुख्यमंत्रियों ने अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं से न केवल प्रदेश अपितु दक्षिण के अन्य राज्यों को भी विकास की राह दिखाई।तमिलनाडू ने अस्सी के दशक में एम. जी. रामचंद्रन जैसे लोकप्रिय जननेता के माध्यम से पहली बार कांग्रेस की मजबूत सत्ता को चुनौती दी थी। उन्हीं एम. जी. रामचंद्रन के नक्शे कदम पर चलते हुए जयललिता ने तमिल राजनीति में पिछले ढाई दशकों से अपनी धाक जमा रखी थी। पांच बार मुख्यमंत्री रही जयललिता के निधन ने तमिल राजनीति में जो खालीपन पैदा किया है उसे भरना सरल नहीं होगा।
जयललिता के बाद किस ओर जाएगी तमिल राजनीति, पढ़ें बड़ी भविष्यवाणी
सचिन मल्होत्रा/ज्योतिषशास्त्री
Updated Tue, 06 Dec 2016 05:34 PM IST
विज्ञापन
जयललिता के निधन के बाद किस ओर जाएगी तमिल राजनीति, पढ़ें बड़ी भविष्यवाणी
जयललिता के निधन के बाद किस ओर जाएगी तमिल राजनीति, पढ़ें बड़ी भविष्यवाणी
विज्ञापन
विज्ञापन