ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह कमजोर या किसी शत्रु ग्रह से दृष्ट हो तो उस व्यक्ति को उस ग्रह से संबंधित तमाम तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। आइए जानते हैं कि किस ग्रह की अशुभता से कौनसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सूर्य ग्रह सभी ग्रहों का मुखिया है। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, सूर्य की अशुभता के कारण हृदय रोग, उदर विकार, धन नाश, ऋण, झूठे अभियोग लगते हैं। सूर्य ग्रह की अशुभता को दूर करने के लिए सूर्य देव की आराधना करें। इसके लिए हरिवंश पुराण का पाठ, विष्णुजी की उपासना करें। इसके अलावा गेहूं, गुड़ एवं तांबें का दान करने से भी सूर्य ग्रह के दोषों से छुटकारा मिलता है।
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चंद्र देव
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चंद्रमा की अशुभता से मानसिक तनाव, चिंता, मानसिक दुर्बलता, फेफड़ों के रोग, माता की बीमारी एवं आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। चंद्रमा दोष के निवारण के लिए जातकों को अपने कुल देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए। ॐ नमः शिवाय मंत्र से शिव की उपासना करें। महामृत्युंजय का जाप करें। इसके साथ ही चावल, दूध और चांदी का दान करें।
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मंगल देव
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मंगल ग्रह के अशुभ परिणाम से जातकों को जिगर से संबंधित रोग और होठ फटते हैं। मंगल की अशुभता के कारण रक्त से संबंधित रोग भी होते हैं। मगल के बुरे प्रभावों से बचने के लिए जातकों को हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ करें। साथ ही गायत्री मंत्र का भी जाप कर सकते हैं। हनुमान जी के मंदिर में प्रसाद चढ़ाएं एवं बांटें। मसूर और लाल मूंग की दाल का दान करें।
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बुध देव
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बुध की अशुभता से स्नायु रोग एवं दंत विकार होते हैं। बुध दोष के निवारण के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। मां दुर्गा की उपासना करें। साथ ही साबूत मूंग की दाल दान में दें।