राशिचक्र में वृष दूसरी राशि है। इस राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है। इसलिए वृष राशि वाले लोग शुक्र ग्रह से प्रभावित होते हैं। शुक्र ग्रह धन, ऐश्वर्य, कला, काम, वासन, सौंदर्य आदि का कारक होता है। ऐसे में वृष या वृषभ राशि वालों में शुक्र ग्रह से संबंधित विशेषताएं पाई जाती हैं। तो चलिए जानते हैं वृष राशि वालों के गुण-दोष, शारीरिक रूप-रेखा एवं स्वभाव के बारे में विस्तार से।
वृष राशि वालों की ये विशेषता उन्हें बनाती है बेहद खास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वृष राशि वालों की शारीरिक रूप रेखा
जिस प्रकार से शुक्र ग्रह सौंदर्यता और आकर्षण को दर्शाता है, ठीक उसी प्रकार वृष राशि वाले सुंदर और आकर्षक काया के होते हैं। अपने से विपरीत लिंग के लोगों (स्त्री है तो पुरुष या पुरुष है तो स्त्री) को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। वृष राशि के लोग सुंदर कद काठी, ऊंची नाक, चमकदार आँख और कामुक होठ वाले होते हैं। यानि आपका चेहरा सुंदर और कद कांठी भी बेहद सुंदर होती है।
वृष राशि वालों का स्वभाव
वृष राशि वाले शांत और कोमल स्वभाव के होते हैं। आप व्यावहारिक और अच्छे व्यक्तित्व वाले होते हैं। धन और ऐश्वर्य के प्रति आप अधिक लालायित होते हैं। अपने कार्य के प्रति संजीदा और स्वभाविक रूप से अंतर्मुखी होते हैं। लोग आपके ऊपर विश्वास करते हैं। आप दयालु स्वभाव के भी होते हैं और लोगों की मदद के लिए आगे रहते हैं। आप अपनी सुरक्षा और प्रतिबद्धता को अहमियत देते हैं। वृष राशि के जातक अपने करीबी लोगों का ध्यान और उनकी चिंता करते हैं। आपको अपनी जिम्मेदारियों का भलिभांति अहसास होता है।
वृष राशि वालों की सेहत
वृष लग्न वाले जातकों की सेहत अच्छी होती है। इनके शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। लेकिन इसके बावजूद ही कुछ शारीरिक समस्याएं इन्हें रहती हैं। वृश राशि वालों को जुकाम से संबंधित समस्या रहती है। इसके अलावा आपको गुर्दे, गुप्तांग, मूत्राशय, गर्दन और गले में होने वाली समस्या का भी सामना करना पड़ता है।
नकारात्मक पक्ष
अंतर्मुखी होना कई बार इनके लिए परेशानी का कारण बन जाता है। आप अपनी भावनाओं को दूसरों के सामने स्पष्ट तरीके से नहीं रख पाते हैं। नए लोगों से भी आप घुलना मिलना बहुत ज्यादा पसंद नहीं करते हैं। इसलिए आपका सामाजिक दायरा भी सीमित होता है। मन में संकोच का भाव आपको मुखर नहीं बनाता है। प्रेम जीवन में आपको असुरक्षा की भावना रहती है जो आपको शक करने वाला बनाती है। आप काम-वासना के प्रति अधिक आतुर रहते हैं।