केतु एक रहस्यमयी ग्रह है। यह एक छाया ग्रह है। इसका कोई अपना वास्तविक रूप नहीं है। स्वभाव के कारण ज्योतिष शास्त्र में इसे एक पापी ग्रह की संज्ञा दी गई है। इस ग्रह को किसी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। लेकिन इसके बावजूद भी यह हमारे जीवन को प्रत्यक्ष रूप में प्रभावित करता है। केतु ग्रह धनु राशि में उच्च का और मिथुन राशि में नीच का माना जाता है। इसके बनने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है।
रहस्यों से भरा है ये ग्रह, दिलचस्प है इसके बनने की कहानी, जानें इसके शुभ-अशुभ प्रभाव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जानिए कैसे बना केतु ग्रह
केतु ग्रह के बनने की कहानी पौराणिक कथाओं में मिलती है। कथा के अनुसार, देवासुर संग्राम में मंथन से जो अमृत निकला, उस अमृत को जब भगवान विष्णु मोहिनी (एक सुंदर अप्सरा) के रूप में बांट रहे थे तो स्वरभानु नामक एक राक्षस देवताओं की पंक्ति में वेष बदलकर बैठ गया। जब स्वरभानु की अमृत पीने की बारी आई तो उसने अमृत तो पी लिया लेकिन सूर्य और चंद्र देव ने उसके भेद को उजागर कर दिया। इस पर भगवान विष्णु जी ने क्रोध में अपने सुदर्शन चक्र से उसका सिर और धड़ दोनों को अलग कर दिया। उसका सिर राहु कहलाया और धड़ केतु बन गया, जो बाद में दोनों ग्रहों के रूप में स्थापित हो गए।
ज्योतिष में केतु ग्रह
ज्योतिष शास्त्र में केतु ग्रह को शुभ ग्रह नहीं माना जाता है। इसके दुष्प्रभाव से व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। राहु के साथ मिलकर यह कुंडली में कालसर्प दोष का निर्माण करता है। केतु लग्न का जातक धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में अग्रणी होता है। केतु ग्रह का प्रभाव व्यक्ति को भौतिक जीवन से दूर ले जाता है। इसके प्रभाव वाले जातक वैराग्य जीवन की ओर प्रेरित होते हैं।
केतु के अशुभ प्रभाव
केतु ग्रह के कमजोर होने पर जातकों को इसके बुरे परिणाम झेलने पड़ते हैं। खासकर व्यक्ति के सिर के नीचे का हिस्सा कमजोर होता है। उसे अपने ननिहाल पक्ष से प्यार नहीं मिलता है। इसके अशुभ होने पर संतान को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव से शारीरिक पीड़ाएं भी होती हैं। व्यक्ति को कान, रीढ़ की हड्डी, घुटने, लिंग, किडनी, जोड़ों के दर्द आदि रोगों का सामना करना पड़ता है।
कुंडली में केतु को मजबूत कैसे करें
ज्योतिष शास्त्र में केतु को मजबूत बनाने के आसान उपाय बताये गए हैं। कुंडली में केतु को मजबूत करने के लिए गणपति महाराज की आराधान करें। दो रंग वाले कुत्ते को रोटी खिलाएं। केतु को मजबूत करने के लिए ज्योतिष में रत्न, जड़ी और रुद्राक्ष को धारण करना भी बताया गया है। केतु को शक्तिशाली बनाने के लिए लहसुनिया रत्न, अश्वगंधा की जड़ी और नौ मुखी रुद्राक्ष को धारण किया जाता है। इसके अलावा केतु यंत्र को स्थापित कर उसकी आराधन करना भी केतु ग्रह को मजबूत बनाता है।