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कालाष्टमी 2019 : जानें किस पूजा से प्रसन्न होंगे भगवान भैरव और शनि दोष दूर कर देंगे मनचाहा वरदान

Sat, 22 Jun 2019 12:54 PM IST
कशिश मिश्रा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: कशिश मिश्रा Updated Sat, 22 Jun 2019 12:54 PM IST
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Kaal Bhairav Puja Vidhi Mantra Vrat Katha Puja Benefits Samagri
काल भैरव

कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव की विशेष रूप से की जाती है। अष्टमी वाले दिन काल भैरव की उत्पत्ति हुई थी। माता के गर्भ से जन्म न होने के कारण इन्हें अजन्मा भी माना जाता है, तो वहीं कुछ लोग इन्हें काशी के कोतवाल के नाम से भी जानते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से काल भैरव को याद करने पर अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहते हैं। 

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Kaal Bhairav Puja Vidhi Mantra Vrat Katha Puja Benefits Samagri
काल भैरव
दर्शन बगैर अधूरी रहती है पूजा

देवी के 52 शक्तिपीठ की रक्षा भी कालभैरव अपने 52 विभिन्न रूपों में करते हैं। भगवान कालभैरवनाथ के दर्शन और पूजन की महत्ता इसी बात के समझी जा सकती है कि न तो भगवान शिव की पूजा और न ही देवी के किसी भी शक्तिपीठ के दर्शन भैरव जी के दर्शन के बिना पूरे माने गए हैं। श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग हो, श्री काशी विश्वनाथ हो या देवी कामाख्या के दिव्य दर्शन हों, बिना भैरवनाथ के दर्शन के शिव-शक्ति के दर्शन अधूरे माने गए हैं।
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काल भैरव
पूजन से पहले पढ़ा जाता है ये मंत्र

पूजा पाठ और कर्मकांड के क्षेत्र में भी भगवान कालभैरवनाथ एक विशेष स्थान रखते हैं। पूजा करने की आज्ञा, पूजा में की गई त्रुटियां और क्रम टूटने के दोष से मुक्ति भी भैरव जी ही प्रदान करते हैं। भैरव तंत्र के अनुसार " ॐ तीखदन्त महाकाय कल्पान्तदोहनम्। भैरवाय नमस्तुभ्यं अनुज्ञां दातुर्माहिसि।" का उच्चारण पूजा से पहले किया जाता है, जिससे हमें पूजा करने की आज्ञा भैरव जी से प्राप्त होती है।
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काल भैरव
शनि की पीड़ा से मुक्ति दिलाते हैं भैरव

लाल किताब के अनुसार भगवान कालभैरव को शनि का अधिपति देव बताया गया है और शनि पीड़ा से मुक्ति के लिए एवं राहु-केतु से प्राप्त हुई पीड़ा और कष्ट की मुक्ति के लिए भैरव उपासना से उच्च और कोई उपाय नहीं है। शत्रु की पीड़ा के नाश में भी कालभैरवनाथ जी सर्वोपरि हैं और कभी-कभी ये भी देखने में आता है कि शत्रु अपने द्वेष को त्याग कर मित्र बन जाता है।
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कालभैरव
तत्काल मिलता है पूजन का फल
कालभैरव जी का नाम उच्चारण, मंत्र जाप, स्तोत्र, आरती इत्यादि तत्काल प्रभाव देता है और मनुष्य की दैहिक, देविक,भौतिक एवं आर्थिक समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। कलयुग में हनुमान जी के अतिरिक्त केवल कालभैरव जी की पूजा एवं उपासना का ही तत्काल प्रभाव बताया गया है, इसलिए हमें इनकी उपासना करके इन्हे प्रसन्न रखना चाहिए।
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