कुंडली में चौथा और बाहरवें घर या उनके स्वामियों का संबंध यानी उस घर में स्थित राशि के स्वामी से विदेश में स्थायी रूप से रहने का सबसे बड़ा योग बनता है। इस योग के साथ चतुर्थ भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव आवश्यक है। यानी उस घर में कोई भी पाप ग्रह स्थित हो या उसकी दृष्टि हो। इसके साथ ही कुंडली में अच्छी दशा होना भी अनिवार्य है। बहरहाल जानते हैं कुंडली में विदेश यात्रा का योग किन परिस्थितियों में बनता है..
कुंडली में ऐसे बनते हैं विदेश यात्रा के योग, जानें कब मिलेगा आपको परदेश जाने का मौका
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Wed, 25 Dec 2019 04:59 AM IST
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