हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता कहा गया है। इनकी सवारी गिद्ध है। अपने हाथों में ये त्रिशूल, धनुष और वरमुद्रा को धारण करते हैं। शनि देव सूर्य देवता के पुत्र हैं। इनका आचरण अपने भाइयों से बिल्कुल ही विपरीत था। मान्यता है कि शनि देव मनुष्यों को उसके पापों का दंड देते हैं। इनका स्वभाव अत्यंत क्रुद्ध माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव के विषय में विस्तृत वर्णन किया गया है। हमारे पौराणिक ग्रंथों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति पर शनि की दृष्टि पड़ जाए, तो वह राजा से रंक बन जाता है। वहीं जिन लोगों पर इनकी कृपा दृष्टि पड़ती है। उनकी किस्मत खुलने में देर नहीं लगती। ऐसे लोगों को जीवन में खूब सफलता मिलती है। मान्यता है कि कुंडली में शनि की स्थिति व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती है। कुंडली में जिस स्थान पर शनि ग्रह स्थित होता है, उसे देखते हुए जातकों को कई कार्य नहीं करना चाहिए, जिनका उल्लेख लाल किताब में किया गया है। इसी कड़ी में आइए जानते हैं कि कुंडली के किस भाव में शनि ग्रह के होने पर कौन सा कार्य नहीं करना चाहिए?
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Shani Dev: अगर कुंडली के इन भावों में हैं शनि देव तो भूल कर भी ना करें ये काम, उठानी पड़ सकती है बड़ी मुसीबतें
Sat, 17 Jul 2021 06:57 PM IST
संकल्प सिंह
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संकल्प सिंह
Updated Sat, 17 Jul 2021 06:57 PM IST
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शनि देव
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शनि देव
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- यदि शनि ग्रह आपकी कुंडली के पहले खाने में है, तो आपको अपने झगड़ालू स्वभाव को छोड़ देना चाहिए।
- दूसरे खाने में है तो आपको जुआ नहीं खेलना चाहिए।
- यदि कुंडली के तीसरे खाने में है तो आपको दक्षिण दिशा में मकान का प्रवेश द्वार नहीं बनाना चाहिए।
- चौथे खाने में होने पर पराई स्त्री के ऊपर नजर ना रखें।
शनि देव
- फोटो : अमर उजाला
- पाचवें खाने में होने पर मकान नहीं बनवाना चाहिए। ऐसी स्थिति में बने बनाए मकान को खरीदने की कोशिश करें या फिर अपने दादा-परदादा के घर में रहें।
- छटवें खाने में होने पर भी मकान नहीं बनवाना चाहिए। इस स्थिति में मदिरा का सेवन बिल्कुल भी ना करें।
- यदि शनि ग्रह आपकी कुंडली के सातवें खाने में है, तो आपको पराई स्त्री के मोह में नहीं पड़ना चाहिए।
- आठवें खाने में होने पर वैश्या के साथ संपर्क नहीं बनाना चाहिए। ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार का जुआ ना खेलें।
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शनि देव
- फोटो : Social media
- शनि ग्रह नौवें खाने में है तो दो से ज्यादा मकान ना बनवाएं।
- दसवें खाने में होने पर शराब का सेवन ना करें। ऐसी स्थिति में दूसरों का भला करें।
- शनि जब ग्यारहवें खाने में होता है, तब किसी को उधार नहीं देना चाहिए।
- शनि यदि आपकी कुंडली के बारहवें खाने में है, तो मकान जैसा बनता है उसे वैसा ही बनने देना चाहिए। उसमें अपनी बुद्धि ना लागाएं।
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शनि ग्रह
- फोटो : Pixabay
इसके अलावा यदि शनि ग्रह लग्न में और गुरु पंचम में है तो कभी भी ताम्बे का दान नहीं करना चाहिए। वहीं अगर शनि आपकी कुंडली के आठवें भाग में हो तो भोजन, वस्त्र और जूते का दान कभी भी ना करें। ऐसा करने से कई अशुभ परिणाम सामने आते हैं।