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Guru Pushya Yoga 2021: आज बना है गुरु पुष्य योग, ऐेसे उठाएं शुभ मुहूर्त का लाभ

Thu, 28 Jan 2021 12:55 PM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 28 Jan 2021 12:55 PM IST
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Guru Pushya Yoga 2021 form 28 January know the significance of this shubh muhurat
गुरु पुष्य योग 2021 - फोटो : सोशल मीडिया

आज पौष पूर्णिमा के दिन (28 जनवरी) सभी मुहूर्त में श्रेष्ठ गुरु पुष्य योग बना है। यह योग गुरुवार की मध्यरात्रि तक विद्यमान रहेगा। जब यह योग गुरुवार के दिन पड़ता है तो इसे गुरु पुष्य योग कहा जाता है। मुहूर्त शास्त्र के अनुसार, सभी 27 नक्षत्रों में 'पुष्य नक्षत्र' को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। विवाह को छोड़कर अन्य कोई भी कार्य आरंभ करना हो तो पुष्य नक्षत्र बेहद शुभ मुहूर्त में से एक माना जा सकता है। धन वृद्धि के लिए भी यह मुहूर्त श्रेष्ठ है। इसके साथ ही आज सर्वाथ सिद्धि योग और प्रीति योग बना है। 

Guru Pushya Yoga 2021 form 28 January know the significance of this shubh muhurat
गुरु पुष्य योग पर लक्ष्मी नारायण की पूजा से आर्थिक वृद्धि की संभावना प्रबल होती है। - फोटो : file photo
इस तरह से पाएं लाभ

आज के दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा से आर्थिक वृद्धि की संभावना प्रबल होती है। इस योग में धन वृद्धि के लिए महालक्ष्मी जी को कमल के फूल और सफेद रंग की मिठाई चढ़ानी चाहिए। इसके साथ ही लक्ष्मी पूजा करते समय संबंधित मंत्रों का जाप करना चाहिए। आज के दिन भगवान शिव और गणपति महाराज की पूजा करने से समस्त प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। 

Guru Pushya Yoga 2021 form 28 January know the significance of this shubh muhurat
पुष्य नक्षत्र को तिष्य कहा गया है जिसका अर्थ होता है श्रेष्ठ एवं मंगलकारी। - फोटो : सोशल मीडिया
श्रेष्ठ और मंगलकारी है यह योग

पुष्य नक्षत्र को तिष्य कहा गया है जिसका अर्थ होता है श्रेष्ठ एवं मंगलकारी। बृहस्पति भी इसी नक्षत्र में पैदा हुए थे तैत्रीय ब्राह्मण में कहा गया है कि, 'बृहस्पतिं प्रथमं जायमानः तिष्यं नक्षत्रं अभिसं बभूव। नारदपुराण के अनुसार इस नक्षत्र में जन्मा जातक महान कर्म करने वाला, बलवान, कृपालु, धार्मिक, धनी, विविध कलाओं का ज्ञाता, दयालु और सत्यवादी होता है। आरंभ काल से ही इस नक्षत्र में किये गये सभी कर्म शुभफलदाई कहे गये हैं किन्तु माँ पार्वती विवाह के समय शिव से मिले श्राप के परिणामस्वरुप पाणिग्रहण संस्कार के लिए इस नक्षत्र को वर्जित माना गया है।

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गुरुपुष्य योग में धर्म, कर्म, मंत्र जाप, अनुष्ठान, मंत्र दीक्षा अनुबंध, व्यापार आदि आरंभ करने के लिए अतिशुभ माना गया है। - फोटो : सोशल मीडिया
इन कार्यों के लिए यह बेहद शुभ मुहूर्त

गुरुपुष्य योग में धर्म, कर्म, मंत्र जाप, अनुष्ठान, मंत्र दीक्षा अनुबंध, व्यापार आदि आरंभ करने के लिए अतिशुभ माना गया है सृष्टि के अन्य शुभ कार्य भी इस नक्षत्र में आरंभ किये जा सकते हैं क्योंकि लक्षदोषं गुरुर्हन्ति की भांति हो ये अपनी उपस्थिति में लाखों दोषों का शमन कर देता है। 

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नारी जगत के लिए बेहद प्रभावशाली है यह मुहूर्त - फोटो : सोशल मीडिया
नारी जगत के लिए है बेहद प्रभावशाली

नारी जगत के लिए ये नक्षत्र और भी विशेष प्रभावशाली माना गया है। इनमें जन्मी कन्याएं अपने कुल-खानदान का यश चारों दिशाओं में फैलाती हैं और कई महिलाओं को तो महान तपश्विनी की संज्ञा मिली है जैसा की कहा भी गया है कि, देवधर्म धनैर्युक्तः पुत्रयुक्तो विचक्षणः। पुष्ये च जायते लोकः शांतात्मा शुभगः सुखी। अर्थात- जिस कन्या की उत्पत्ति पुष्य नक्षत्र में होती है वह सौभाग्य शालिनी, धर्म में रूचि रखने वाली, धन-धान्य एवं पुत्रों से युक्त सौन्दर्य शालिनी तथा पतिव्रता होती है। 

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