ज्योतिष के अनुसार यदि किसी की कुंडली में बृहस्पति की स्थिति सही नहीं होती हैं तो उसके वैवाहिक जीवन पर अशुभ प्रभाव पड़ने लगता है। जो लोग विवाह के योग्य हैं उनकी कुंडली में भी बृहस्पति की स्थिति अनुकूल होना बहुत आवश्यक मानी जाती है। कुंडली में यदि बृहस्पति अशुभ फल दे रहा हो तो विवाह में देरी होने लगती हैं और विवाह होने में कई प्रकार की बाधाएं आती हैं। ज्योतिष शास्त्र के साथ ही धार्मिक शास्त्रों में विवाह के बंधन को मजबूत बनाने के लिए बृहस्पति देव की पूजा करने का विधान बताया गया है। यदि आपके विवाह में देरी हो रही है या फिर आपके दांपत्य जीवन में तनाव बना हुआ है तो बृहस्पति देव से जुड़े कुछ उपाय करके आप अपने वैवाहिक जीवन को सुखी बना सकते हैं और विवाह में आने वाली बाधाओं को भी दूर कर सकते हैं।
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भगवान विष्णु की पूजा करें (प्रतीकात्मक तस्वीर)
यदि आपके और जीवन साथी को बीच में मनमुटाव बना हुआ है तो गुरुवार के दिन घर के पूजास्थान पर पीले रंग का आसन बिछाकर बृहस्पति भगवान की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। अब उसपर गंगाजल छिड़के। इसके बाद दोनों पति-पत्नी एक साथ बृहस्पति देव का पूजन करें। सबसे पहले बृहस्पति देव के समक्ष शुद्ध देशी घी का दीपक प्रज्वलित करें। पूजन में पीली चीजों को शामिल करें जैसे तिलक के लिए हल्दी, चने की दाल, पीले रंग का मिष्ठान आदि। पूजन के बाद सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करें।
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बृहस्पतिवार को केले की जड़ में जल चढ़ाएं
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यदि पति-पत्नी के बीच में कटुता ज्यादा बढ़ गई है और समस्या के सुलझने का कोई मार्ग नहीं दिख रहा है तो इसके लिए लगातार 11, 21 या 51 गुरुवार का व्रत रखकर भगवान विष्णु और केले के वृक्ष का पूजन करना चाहिए। इसके साथ ही बृहस्पति देव के व्रत की कथा पड़नी या सुननी चाहिए। बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं और मान्यता है कि इससे आपका दांपत्य जीवन सामान्य होने लगता है।
कुंडली में गुरू को मजबूत बनाने के लिए भीगे हुए चने और मुक्का भगवान विष्णु को भोग के रूप में अर्पित करना चाहिए। इससे कुंडली में आपका बृहस्पति शुभ फल प्रदान करने लगता है। इसके अलावा बृहस्पतिवार के दिन किसी ब्राह्मण को पीले रंग के वस्त्र दान करने चाहिए। माना जाता है कि इससे दांपत्य जीवन में स्थिरता बनी रहती है।
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पीपल के पेड़ में जल दें (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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जिन युवक-युवतियों का रिश्ता बार-बार टूट जाता हो तो उन्हें हर बृहस्पतिवार को केले या पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि इससे विवाह में बाधाएं आ रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।