बहुत चटपटी है सीमा परिहार की प्रेमकहानी
- जिसने किया कन्यादान उसी से ब्याह रचा लिया
- बड़ी रोचक है दस्युसुंदरी सीमा की एक लव स्टोरी
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माथे पर काला टीका, सिर पर लाल पट्टी, हाथ में दुनाला बंदूक और बदन पर बागी वर्दी। कोमल कर कमलों ने जब बंदूक थामी तो 6 लाख एकड़ में फैले इलाके में दहशत फैल गई। चंबल के बड़े-बड़े डाकू सरगना उसके बागी तेवरों की आग में पिगलते नजर आए। बीहड़ पट्टी से लेकर पूरे चंबल के चप्पे-चप्पे तक उसके नाम मात्र से ही अच्छे-अच्छों की हवा ढीली हो जाती।
आमजनों से लेकर लालाजनों तक सब उससे खौफजदा तो थे ही, पुलिसिया महकमे के लिए भी वो ऐसा सिरदर्द बनी कि मोस्ट वॉन्टेड की फेहरिस्त में शामिल होते उसे ज्यादा दिन नहीं लगे।
उसके सिर पर ईनाम रखा गया। उसे न कानून का खौफ था और न ही पुलिस का डर। वो जब चाहे, दिन दहाड़े आती और तूफान की तरह कहर बरपा कर चली जाती। तकरीबन 30 घरों में डकैती, 200 लोगों का अपहरण और 70 लोगों की हत्या, उसके कुख्यात करियर के लिखित आंकड़ों की बानगी हैं।
वो फूलन या पुतली बाई जैसी तो नहीं, लेकिन उनसे भी कहीं ज्यादा खतरनाक साबित हुई। लेकिन बीहड़ की इस सबसे कुख्यात दस्युरानी के दिल इतना नरम था कि दो प्रेमियों का प्यार उसमें समां गया। आगे पढ़िए दस्यु सुंदरी सीमा परिहार की पूरी प्रेमकहानी।
...और डाकूरानी को इश्क हो गया
प्यार... दरअसल खुद में वो एक पूरा अहसास है जो किसी भी इंसान को पूरी तरह से बदलने में अचूक रामवाण दवा की तरह असर करता है। अच्छे-अच्छों पर इसकी तासीर भारी पड़ी। उनमें डाकूरानी सीमा परिहार भी एक हैं।
यूपी के औरैया जिले के एक ठाकुर परिवार में जन्मी सीमा परिहार की पूरी कहानी रुपहले पर्दे की उस फिल्म की तरह है जिसमें फिल्म के सारे मसाले यानी सस्पेंस, थ्रिलर, लव, ड्रामा समेत सारे एंगल होते हैं। चूकी वैलेंटाइन की बात है तो स्टोरी के लव एंगल बात कर लेते हैं।
यूपी पुलिस के हर रिकॉर्ड में सीमा के कुख्यात जीवन के बारे में कई जानकारियां मिलती हैं। लेकिन उनका पहला प्यार कौन था ये आज तक सस्पेंस लगता है।
सीमा परिहार का पहला प्यार कौन?
बंजर और जंगल में अर्से तक बसर करती रही सीमा परिहार की मसालेदार प्रेम कहानी एकबार में गले से नीचे नहीं उतरती।
जिला जालौन के वरिष्ठ पत्रकार के.पी. सिंह के मुताबिक सीमा परिहार ने उनको दिए साक्षात्कार में ये बात खुद कबूली कि उनकी दो शादियां हुई थीं।
सीमा महज 13 वर्ष की थीं जब डाकू लालाराम और कुस्मा नाइन ने उन्हें अगवा कर लिया था। नाजुक उम्र में सीमा डाकुओं के ही बीच रहीं, पलीं-बढ़ीं। इस बात का भी जिक्र सीमा ने वरिष्ठ पत्रकार के.पी. सिंह को दिए साक्षात्कार में किया था। लेकिन साल 1986 में जब सीमा ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा तो डाकू सरगना निर्भय गुज्जर के लिए दिल धड़कने लगा।
सीमा को डाकू जीवन की तमाम बारीकियां गुज्जर से पता चली थीं। धीर-धीरे दोनों इतने करीब आ गए कि रिश्ता जज्बाती होता चला गया और प्यार की शक्ल अख्तियार कर ली। बात शादी तक पहुंच गई। बतौर निर्भय गुज्जर सीमा का कन्यादान लालाराम ने किया था।
लवस्टोरी में आया ट्विस्ट
लेकिन कुछ अर्से बाद कहानी ने एकदम मोड़ लिया। सीमा ये बात भी स्वीकारी कि उन्होंने दूसरी शादी अपने पिता की उम्र के डाकू लालाराम से की थी।
बतौर सीमा लाला राम से उसे एक पुत्र भी प्राप्त हुआ। लालाराम से दूसरी शादी वाली बात को गुज्जर ने सिरे से नकार दिया था। निर्भंय को आखिरी तक यही सस्पेंस था कि सीमा का कन्यादान खुद लालाराम ने किया तो फिर वो सीमा से शादी क्यों करेगा?
]निर्देशक कृष्णा मिश्रा की हिन्दी और अंग्रेज़ी में बनी फिल्म 'वुंडेड' में भी जब इस सच को फिल्माने की बात आई तो निर्भय गुज्जर ने निर्देशक को धमकी दी थी कि अगर ऐसी कोई बात फिल्म का हिस्सा बनी तो वो सैकड़ों गावों को श्मशान बना देगा।
लेकिन लाख धमकियों के बावजूद फिल्म तैयार हुई और आलोचकों से तारीफें भी बटोरीं।
असल पटकथा की असली नायिका
अपने असल जीवन की असल पटकथा की नायिका खुद सीमा परिहार बनीं। तमाम कानूनी पेचीदगियों के चलते निर्देशक ने उन्हें उत्तरप्रदेश की इटावा जेल से जमानत पर रिहा कराया था।
लेकिन सीमा परिहार को वैश्विक पटल पर पहचान तब मिली जब ये दस्युसुंदरी एक टीवी रिएलटी शो ‘बिग बॉस’ का हिस्सा बनी।
सीमा ने बीहड़ और चंबल में करीब 18 वर्ष तक डाकूरानी बन एकछत्र राज किया और साल 2000 में पुलिस के आगे सरेंडर कर दिया था। सीमा ने बताया कि मजबूरियों के चलते बंदूक उठाई थी। लेकिन मौका मिले तो सुधरकर समाज की मुख्यधारा का हिस्सा बनना चाहेंगी।
सीमा को ग्लैमर की दुनिया और सियासी जगत दोनों ने आकर्षित किया। आखिरकार, उठा-पटक भरी जिंदगी का स्वाद चखने वाली सीमा ने फूलन के नक्शे-कदम पर सियासत का गलियारा चुना। मौजूदा वक्त में सीमा समाजवादी पार्टी की नेता हैं।